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    62% बिजनेस लीडर अपने काम एआई से करा रहे:स्टडी के अनुसार- साथियों से ज्यादा भरोसा एआई पर, विचार टकराए तो खुद पर शक

    2 hours ago

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    ब्रिटेन के बिजनेस एग्जीक्यूटिव तेजी से अपनी सोच और फैसले लेने की क्षमता एआई चैटबॉट्स पर छोड़ रहे हैं। मार्केट रिसर्च एजेंसी 3-जेम की स्टडी के मुताबिक 62% बिजनेस लीडर ज्यादातर फैसले लेने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्टडी में 200 ओनर्स, फाउंडर्स, सीओ और दूसरे सीनियर लीडर्स को शामिल किया गया। इसमें 140 लोगों ने बताया कि जब उनके आइडिया एआई की सिफारिशों से टकराते हैं, तो वे अपने ही विचारों पर दोबारा शक करने लगते हैं। वहीं 46 फीसदी ने कहा कि अब वे अपने बिजनेस साथियों की तुलना में एआई की सलाह पर ज्यादा भरोसा करते हैं। यह ट्रेंड पिछले साल आई एक रिपोर्ट से भी जुड़ता है, जिसमें कहा गया था कि 64 फीसदी बिजनेस लीडर कर्मचारियों को निकालने (टर्मिनेशन) जैसे मामलों में भी एआई से सलाह लेते हैं। हालांकि 33-जेम सर्वे में 2025 के लिए 27 फीसदी लोगों ने कहा कि वे ऐसे फैसलों में एआई का इस्तेमाल करते हैं। एआई पर भरोसा खतरनाक, कम हो सकती है सोचने क्षमता कार्नेगी मेलन और माइक्रोसॉफ्ट की स्टडी के अनुसार, एआई पर ज्यादा निर्भरता से लोगों की गहराई से सोचने की शक्ति घट रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब हमें लगता है कि कोई काम मशीन बेहतर तरीके से कर रही है, तो हमारा दिमाग खुद कोशिश करना छोड़ देता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे सेल्फ-ड्राइविंग कार होने पर ड्राइवर सड़क से ध्यान हटाकर पूरी तरह सिस्टम के भरोसे बैठ जाता है। बच्चों के दिमागी विकास के लिए भी घातक है एआई डेनमार्क के मनोचिकित्सक सोरेन ओस्टरगार्ड ने चेतावनी दी है कि एआई पर अत्यधिक निर्भरता से विद्वानों में ‘कॉग्निटिव डेट’ यानी दिमागी सुस्ती बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि अपनी बुद्धि का इस्तेमाल न करने से सोचने की क्षमता उधार की हो जाती है। ओस्टरगार्ड ने इसे ‘एआई साइकोसिस’ नाम दिया है, जिसमें इंसान धीरे-धीरे अपनी वास्तविक मानसिक कार्यक्षमता और तर्कशक्ति खोने लगता है। एआई को काम सौंपने से बढ़ सकती है दिमागी सुस्ती एमआईटी के अनुसार, चैटजीपीटी युवाओं की क्रिटिकल थिंकिंग खत्म कर रहा है। शोध में एआई पर निर्भर लोगों की दिमागी सक्रियता गूगल सर्च करने वालों से काफी कम मिली। लेखिका नतालिया कॉस्मिना ने चेतावनी दी है कि विकसित हो रहे बच्चों के लिए एआई सबसे खतरनाक है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता और दीर्घकालिक मानसिक विकास को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
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