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    आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट भर्ती को लेकर मंत्री आवास घेरा:लखनऊ में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, साल 2024 से 51 तारीखों के बाद भी नहीं निकला समाधान

    12 hours ago

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    वर्ष 2024 की आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट भर्ती में हो रही देरी को लेकर बुधवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने लखनऊ स्थित मंत्री डॉ. दया शंकर मिश्र ‘दयालु’ के आवास का घेराव किया। अभ्यर्थियों ने शीघ्र सुनवाई और भर्ती प्रक्रिया के निस्तारण की मांग को लेकर नारेबाजी की। सरकार से ठोस पहल करने की अपील की। देखिये 3 तस्वीरें… 51 तारीखों के बाद भी नहीं निकला समाधान अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया कोर्ट केस के कारण अटकी हुई है और अब तक 51 तारीखें लग चुकी हैं। लगातार बढ़ती तारीखों से अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि सरकारी पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी न होने के कारण मामला लंबित चल रहा है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लंबे समय से तैयारी कर रहे युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। कई अभ्यर्थियों की आयु सीमा भी प्रभावित हो रही है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है। प्रदेश में 60 प्रतिशत पद रिक्त अभ्यर्थियों के मुताबिक, प्रदेश में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के लगभग 60 प्रतिशत पद खाली हैं। सरकार की ओर से 1002 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, जबकि कुल स्वीकृत पद करीब 2100 हैं। इनमें से लगभग 1200 पद अब भी रिक्त पड़े हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर पद खाली होने से आयुष और स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में दवाओं के वितरण और फार्मेसी संचालन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बेंच-वाइज फैसला या लिखित परीक्षा कराने की मांग प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने मांग की कि कोर्ट में बेंच-वाइज निर्णय कराकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो सरकार उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के माध्यम से लिखित परीक्षा आयोजित कर भर्ती प्रक्रिया पूरी कराए। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए इस मामले में प्राथमिकता से हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि लंबित भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी हो सके और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिल सके।
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