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    अफसरों के हत्यारोपी की दुकान गरीबों को देने पर विचार:HPCL में खुद बोलेरो चलाकर घुसा था आरोपी, 4 मिनट में वारदात को दिया अंजाम

    4 hours ago

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    बदायूं में हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP) के 2 अफसरों के हत्या के आरोपी अजय प्रताप सिंह के ताऊ की जमीनों पर बुलडोजर कार्रवाई के लिए SDM ने अनुमति मांगी है। प्रशासन इस जमीन को गरीबों को देने की योजना पर भी विचार कर रहा है। मंगलवार को मुख्य आरोपी अजय सिंह की मार्केट पर बुलडोजर चला। पहले से चिह्नित 11 दुकानें और एक हॉल ढहा दिया गया। 53 अन्य खाली कराई गईं हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी खुद बोलेरो चलाकर प्लांट के अंदर घुसा था। उसने महज चार मिनट में पूरी वारदात को अंजाम दिया था। उसके साथियों ने खुलासा किया कि उसने अपना दबदबा और रसूख बनाने के लिए वारदात की। वहीं, अजय की कोटेदार मां की दुकान पर बिजली चोरी पकड़ी गई है। उन पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। एसएसपी अंकिता शर्मा ने कहा है कि परिजन जिन पर भी आरोप लगा रहे हैं। उन सभी से पूछताछ होगी। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी। असिस्टेंट मैनेजर हर्षित मिश्रा के परिजनों ने BJP विधायक पर भी आरोप लगाए हैं। 11 दुकानों पर बुलडोजर चला मंगलवार को HP के 2 अफसरों के मुख्य हत्यारोपी अजय सिंह की मार्केट पर बुलडोजर चला। मंगलवार सुबह 10 बजे SDM धर्मेंद्र सिंह 2 बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंचे थे। पहले से चिह्नित 11 दुकानें और एक हॉल ढहा दिया गया। 53 अन्य खाली कराई गई हैं। 2 दिन पहले प्रशासन ने नोटिस दिया भी दिया था। बुलडोजर कार्रवाई के दौरान पुलिस और PAC के 100 से ज्यादा जवान मौके तैनात रहे। प्रशासन का कहना है कि मार्केट सरकारी जमीन पर बनाई गई थी। आरोपी ने फर्जी कागजों के जरिए इसे खुद,अपने ताऊ और रिश्तेदारों के नाम करवा लिया था। ज्यादातर दुकानें किराए पर उठी थीं। हर महीने 1 लाख से ज्यादा किराया आता था। 53 दुकानें गरीबों को देने पर चल रहा विचार आरोपी अजय सिंह के ताऊ और पूर्व प्रधान राकेश सिंह द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाई गईं दुकानों पर बुलडोजर चलाने की अनुमति एसडीएम दातागंज धर्मेंद्र सिंह ने डीएम अवनीश राय से मांगी है। दूसरी तरफ प्रशासन इन 53 दुकानों को गरीबों को आवंटित करने की योजना पर भी विचार कर रहा है। ताकि इलाके के जरूरतमंद लोग रोजगार मिल सके। इसे लेकर अधिकारियो के बीच मंथन जारी है। हालांकि, इसकी अनुमति शासनस्तर से ही मिलेगी। SDM ने बताया कि फिलहाल इस मामले पर विचार किया जा रहा है। हालांकि कोई लिखित प्रस्ताव अभी नहीं बना है। इस पर केवल विचार चल रहा है। आरोपी खुद बोलेरो चलाकर प्लांट के अंदर गया 17 मार्च को अजय का साथ देने वाले गैस किट ऑपरेटर मुनेंद्र विक्रम सिंह और ड्राइवर धर्मेंद्र यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया कि वह खुद बोलेरो चलाकर प्लांट में घुसा था। उसने महज चार मिनट में दो लोगों की हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, यह पूरी वारदात प्री-प्लांड थी। प्लांट में तैनात गैस किट ऑपरेटर मुनेंद्र विक्रम सिंह ने गेट खुलवाया और उसे खुला रखा। ताकी अजय बिना किसी परेशानी के अंदर जा सके। ड्राइवर धर्मेंद्र यादव भी घटना के समय प्लांट के अंदर ही मौजूद था। धर्मेंद्र भी एक तमंचा अपने साथ ले गया था। जांच में पता चला है कि वारदात से पहले तीनों आरोपियों के बीच लगातार मोबाइल पर बातचीत हुई थी। अजय ने पहले मुनेंद्र को कॉल किया, जिसके बाद मुनेंद्र ने धर्मेंद्र से संपर्क किया। इसके बाद धर्मेंद्र और मुनेंद्र गाड़ी लेकर सैजनी पहुंचे, जहां से अजय ने खुद गाड़ी चलाकर प्लांट तक का सफर तय किया। धर्मेंद्र यादव भी अपने साथ तमंचा लेकर गया था। प्लांट में घुसते ही अजय ने महज 4 मिनट में वारदात की और वहां से फरार हो गया। शुरुआत में धर्मेंद्र ने बोलेरो लूट की बात कही ती। पुलिस ने मामले में बोलेरो लूट की धारा भी जोड़ी थी। हालांकि, जांच में आरोपियों की मिलीभगत सामने आने के बाद इस धारा को हटा दिया गया है। पुलिस का कहना है कि ड्राइवर ने खुद ही वाहन आरोपी को सौंपा था, इसलिए लूट का मामला नहीं बनता। कॉल डिटेल के आधार पर मुनेंद्र और धर्मेंद्र की भूमिका स्पष्ट हुई है। दोनों के खिलाफ साजिश रचने का मुकदमा दर्ज किया गया है। दबदबा बनाने के लिए की हत्या पूछताछ के दौरान मुनेंद्र और धर्मेंद्र ने पुलिस को बताया कि अजय प्रताप ने इलाके में अपना रसूख और दबदबा कायम रखने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया था। हालांकि, इसके पीछे की ठोस वजह अब भी साफ नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने सिर्फ दोस्ती में सहयोग करने की बात कबूल की है। अब पढ़िए, डबल मर्डर कैसे हुआ… पीठ पर तमंचा सटाकर मारी थी गोली अजय ने पुलिस को बताया था- 12 मार्च को दोपहर 1 बजे मैं HPCL प्लांट गया था। उस समय प्रशासनिक भवन में मीटिंग चल रही थी। मैं वहां पहुंचा, तो 5 लोग बैठे थे। मैंने सभी को बातों में उलझाए रखा कि मुझे नौकरी पर वापस रख लो। इसी बीच मैं असिस्टेंट मैनेजर हर्षित मिश्रा के पीछे पहुंचा और पीठ पर तमंचा सटाकर ट्रिगर दबा दिया। आगे पड़ी मेज पर खून का फव्वारा छूटा, जिसे देखकर लोग डर गए और भागने लगे। इसके बाद मैंने DGM सुधीर गुप्ता को दौड़ा लिया। 3 राउंड फायरिंग की, जिनमें से 2 गोलियां सुधीर को लगीं। वह जमीन पर गिर पड़े। पुलिस ने गेट के भीतर लगे CCTV चेक किए तो पता चला कि 1:55 बजे बोलेरो लेकर अजय प्लांट के अंदर गया था। 1:59 बजे बाहर निकला। यानी उसने सिर्फ 4 मिनट में वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने FIR के बाद एक्शन नहीं लिया इस पूरे हत्याकांड में बदायूं पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई थी। आरोपी अजय सिंह आउटसोर्स कर्मचारी था। प्लांट में पराली की सप्लाई का ठेका लेता था। उसे नौकरी से निकालकर उसकी फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। इसके बाद अजय करीब 3 महीने से DGM सुधीर गुप्ता को जान से मारने की धमकी दे रहा था। सुधीर गुप्ता ने 4 फरवरी को मूसाझाग थाने में अजय के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि अजय लगातार धमका रहा है और उनका पीछा करता है। सुधीर गुप्ता इतने डर गए थे कि उन्होंने रिटायरमेंट के 5 साल पहले ही VRS के लिए आवेदन दे दिया था, जो मंजूर हो गया था। 31 मार्च को उनकी नौकरी का आखिरी दिन था। वहीं, हर्षित मिश्रा ने भी अपने ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था। लेकिन, उससे पहले ही दोनों की हत्या कर दी गई। FIR के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की थी। SSP-CO हटा दिए गए थे हत्याकांड के बाद 13 मार्च को SSP डॉ. बृजेश कुमार सिंह और उझानी के CO डॉ. देवेंद्र कुमार पचौरी को हटा दिया गया था। SSP को पुलिस मुख्यालय में लॉजिस्टिक विभाग में तैनाती दी गई थी। उनकी जगह कासगंज की SP अंकिता शर्मा को भेजा गया था। वहीं, CO को DGP ऑफिस से अटैच किया गया था। उनकी जगह CO राहुल पांडेय को उझानी सर्किल की कमान सौंपी गई थी। आरोपी को दोनों पैरों में मारी गई गोली CO डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया- अजय सिंह ने वारदात में इस्तेमाल हथियार जंगल में छिपा दिया था। 13 मार्च को पुलिस उसे बरामदगी के लिए जंगल ले गई। इसी दौरान उसने झाड़ियों से तमंचा निकालकर पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसके दोनों पैरों में गोली लगी। आरोपी ने कबूला- बेइज्जती करते थे, इसलिए मार डाला पुलिस पूछताछ में अजय ने बताया- अफसर मेरे सम्मान को ठेस पहुंचाते थे। कभी मुझसे मेज साफ करवाते थे, तो कभी लोगों के सामने पानी लाने को कहते थे। बाद में साजिश कर मुझे नौकरी से निकलवा दिया। इलाके में मेरी छवि खराब कर दी। इसलिए दोनों को मार डाला। सुधीर नोएडा, हर्षित पीलीभीत के रहने वाले थे सुधीर गुप्ता के पिता का नाम दयाकिशन हैं। वे मूलरूप से नोएडा सेक्टर-50 के सिल्वर एस्टेट अपार्टमेंट के रहने वाले थे। फिलहाल बरेली में रह रहे हैं। वहीं, हर्षित मिश्रा पीलीभीत के पूरनपुर के के रहने वाले थे। उनकी शादी करीब 2 साल पहले हुई थी। उनके कोई बच्चा नहीं था। हर्षित के पिता और पत्नी को मिलेगा शस्त्र लाइसेंस वहीं, पीलीभीत प्रशासन हर्षित के पिता और पत्नी को शस्त्र लाइसेंस देगा। मंगलवार को पूरनपुर के नायब तहसीलदार ने हर्षित के घर पहुंचकर कागजी प्रक्रिया पूरी कराई। इशके बाद मंगलवार को हर्षित मिश्रा के पिता, मां, पत्नी और मामा कड़ी सुरक्षा के बीच बदायूं पहुंचे। परिजनों ने सीबीआई जांच की अपील की है। घरवालों का आरोप है कि मामले में लीपापोती की जा रही है। हर्षित के मामा ने कहा कि स्थानीय विधायक भी आरोपियों से मिले हुए हैं। हर्षित की मां रानी मिश्रा ने एक सप्ताह में संतोषजनक कार्रवाई न होने पर पूरे परिवार सहित आत्मदाह की चेतावनी दी है। हर्षित की पत्नी सुमति मिश्रा ने बताया कि घटना के दिन उनके पति बैठक में शामिल नहीं होना चाहते थे। लेकिन, अफसर लगातार दबाव बना रहे थे। --------- यह खबर भी पढ़ें… HP मैनेजर के पिता बोले-बेटे के हत्यारों को फांसी हो:मामा का दर्द- योगीजी क्या ब्राह्मण होना पाप है; बदायूं में प्लांट में हुई थी हत्या 'एसआईटी हमें स्वीकार है, लेकिन हमें फाइनली सीबीआई जांच चाहिए। आरोपियों के लिए फांसी चाहिए। फाइनल जस्टिस चाहिए। हमारे बच्चे की निर्मम हत्या हुई है। खाकी में कमी रही, पॉलिटिकल प्रेशर में कमी रही। खाकी चाहती तो आरोपी को समझाया जा सकता था। सीओ उझानी डॉ. देवेंद्र ने अपनी इंटरनल रिपोर्ट दी थी कि इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए, वर्ना कुछ भी हो सकता है। फिर भी हमारे बेटे की हत्या हो गई। विधायकजी अगर यह इंडस्ट्री लेकर आए तो किसी को मौत देने के लिए लाए थे। हमें मालूम होता कि हमारे बेटे की हत्या हो जाएगी, तो हम उसे कभी बदायूं नहीं भेजते।' यह दर्द है एचसीपीएल के असिस्टेंट मैनेजर हर्षित मिश्रा के पिता सुशील मिश्रा का है। पढ़ें पूरी खबर…
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