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    अफसरों का दावा- अवसरवादी का 'पंडित' ऑप्शन देना अपराध नहीं:यूपी दरोगा भर्ती परीक्षा का दोबारा पेपर नहीं होगा; समय पर आएगा रिजल्ट

    2 hours ago

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    यूपी दरोगा भर्ती परीक्षा में अवसरवादी के लिए ‘पंडित’ ऑप्शन देने पर सियासत गरमा गई है। अब सवाल उठ रहा है कि जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी? भर्ती बोर्ड, बोर्ड के पूर्व अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में कोई बड़ा एक्शन हो, ऐसा नहीं लगता। न कंपनी ब्लैक लिस्ट होगी और न ही कोई अपराध बनेगा। हां, रिजल्ट भी समय पर जारी हो जाएगा। CM योगी ने पुलिस भर्ती बोर्ड से पूरी प्रक्रिया की जांच करने के लिए कहा था, लेकिन अभी तक एक्शन कुछ नहीं हुआ। दैनिक भास्कर ने दरोगा भर्ती परीक्षा कराने वाली एजेंसी के बारे में छानबीन की। देखा, ‘पंडित’ ऑप्शन रखने के 3 असली जिम्मेदार कौन हैं? पहला- भर्ती बोर्ड के चेयरमैन दूसरा- भर्ती बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक तीसरा- परीक्षा कराने वाली एजेंसी नियमावली 2008 में बनी, लीक से बचने के लिए सब कुछ गोपनीय रखा यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड से जुड़े अधिकारियों से बातचीत करने के बाद सामने आया कि 2008 में पहली बार भर्ती बोर्ड बनाया गया। उसी वक्त नियमावली भी तय हुई थी। इसमें पेपर सेट कराने से लेकर रिजल्ट आउट करने तक सभी कामों के लिए भर्ती बोर्ड और उसके अफसर ही जिम्मेदार बताए गए। उस वक्त भी पेपर सेट कराने और उसके पब्लिकेशन के लिए बाहरी एजेंसी को जिम्मेदारी दी जाती थी। नियमावली में लिखा है- बोर्ड किस एजेंसी से पेपर सेट करवा रहा, ये गोपनीय रखा जाएगा। इसके टेंडर भी ओपन नहीं होंगे, बल्कि बोर्ड के अधिकारी एजेंसी सीधे चुनेंगे। अब यूपी दरोगा भर्ती परीक्षा में आए एक सवाल के ऑप्शन में ‘पंडित’ शब्द आने के बाद जिम्मेदार किसको माना जाए, इसकी चर्चा शुरू हो चुकी है। कहा जा रहा है, पेपर सेट होने के बाद किस अधिकारी की मॉनिटरिंग के बाद फाइनल होते हैं। बोर्ड के अधिकारियों से बात करने के बाद सामने आया कि ऐसी गड़बड़ियों के लिए चेयरमैन और परीक्षा नियंत्रक को जिम्मेदार ही नहीं माना जा रहा। ऐसा कैसे? हमने इसके लिए भर्ती बोर्ड के डीआईजी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज से बात की। वह कहते हैं- सवाल को लेकर जो विवाद पैदा हुआ है, उसकी जांच के आदेश दिए गए हैं। मैं बताना चाहता हूं कि पुलिस भर्ती बोर्ड अपने पेपर खुद निर्धारित नहीं करता। ये काम गोपनीय संस्थाओं से करवाता है। पेपर लीक से बचने के लिए बोर्ड का कोई भी अधिकारी-कर्मचारी पेपर को देख नहीं सकता। पेपर के सील्ड पैकेट सेंटर पर 2 अभ्यर्थियों की मौजूदगी में पहली बार खोले जाते हैं। जिस सवाल और उसके विकल्प को लेकर विवाद है, उसकी जांच पूरी होने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। क्या एजेंसी ब्लैक लिस्ट होगी? इस पूरे विवाद के बाद अभ्यर्थियों के दिमाग में सबसे बड़ा सवाल चल रहा है कि क्या परीक्षा कराने वाली एजेंसी ब्लैक लिस्ट की जाएगी‌? बोर्ड से जुड़े अधिकारी मानते हैं- ये इतना बड़ा मामला नहीं है कि इसमें परीक्षा कराने वाली एजेंसी को ही ब्लैक लिस्ट कर दिया जाए। पूर्व DGP सुलखान सिंह कहते हैं- तकनीकी रूप से इस सवाल में कोई गड़बड़ी नहीं है। इसे केवल तूल दिया जा रहा। इस सवाल को लेकर कोई अपराध बनता ही नहीं। इसका रिजल्ट भी समय पर दे दिया जाएगा। इस मामले में अभी भर्ती बोर्ड से कराई जा रही जांच की रिपोर्ट का इंतजार है। ऐसे में परीक्षा भी दोबारा कराए जाने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता। इतना जरूर होगा कि इस परीक्षा के बाद एक नई SOP बनाई जाएगी। इसमें किसी धर्म, जाति, संप्रदाय से जुड़े सवालों से परहेज करने के लिए कहा जाएगा, जिससे किसी की भावना आहत होती हो। पेपर सेट करने वाली एजेंसी कैसे तय होती है? भर्ती बोर्ड से जुड़े एक अधिकारी का कहना है- भर्ती बोर्ड परीक्षा के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाता है। इसमें देशभर की एजेंसियां हिस्सा लेती हैं। ये टेंडर ओपन नहीं होते। बोर्ड खुद ही ऐसी एजेंसियों को बुलाता है। फिर उनमें से किसी एक को चुन लेता है। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह कहते हैं- पेपर तैयार करने की प्रक्रिया काफी गोपनीय होती है, क्योंकि ये काम भर्ती बोर्ड का नहीं होता। इसलिए भर्ती बोर्ड को भी नहीं पता होता कि परीक्षा में कौन-कौन से सवाल पूछे जा रहे हैं। एजेंसियां सवाल कैसे तैयार करती हैं? भर्ती बोर्ड में सेवाएं दे चुके एक अधिकारी कहते हैं- एजेंसियां विषय विशेषज्ञों को हायर करती हैं। अगर पेपर 100 सवाल का होगा, तो उनसे 200 सवाल लिए जाते हैं। अलग-अलग विशेषज्ञों से लिए गए सवालों को इकट्‌ठा करके 4 सेट पेपर तैयार किए जाते हैं। आमतौर पर 4 विषय- सामान्य हिंदी, सामान्य ज्ञान, संख्यात्मक एवं मानसिक योग्यता, कानून व संविधान से संबंधित सवाल तैयार किए जाते हैं। सवाल सिलेबस के अनुसार तय होते हैं। प्रश्न तैयार होने के बाद भी जांच की जाती है कि जो विकल्प दिए गए हैं, वह सही है या नहीं। कोई गलती या अस्पष्टता तो नहीं है। प्रिंटिंग के दौरान कैसे करते हैं सुरक्षा विवाद का केंद्र पंडित विकल्प वाला सवाल सवाल था- अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक शब्द चुनिए- विकल्प थे- सदाचारी, पंडित, अवसरवादी और निष्कपट। भर्ती बोर्ड से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि सवाल पूछा गया है। उसका विकल्प दिया गया है, न कि पर्यायवाची। हमेशा 3 विकल्प गलत होते हैं। ऐसे में पंडित शब्द को अवसरवादी से कैसे जोड़ा जा सकता है? हालांकि, विकल्प के रूप में पंडित को शामिल करने पर ब्राह्मण समाज, भाजपा के विधायकों और नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि 'पंडित' शब्द ज्ञान, विद्वानता और धार्मिक सम्मान से जुड़ा है। इसे अवसरवादी से जोड़ना समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। सियासत क्यों गरमाई? यह मामला भाजपा के लिए चुनौती बन गया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, विधायक शलभमणि त्रिपाठी, पीएन पाठक, रमेश मिश्रा जैसे नेताओं ने इस सवाल पर आपत्ति जताई। इनमें से कुछ ने बयान दिए और कुछ ने सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कार्रवाई की मांग की है। वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस कहते हैं- सियासत का कारण ये है कि सामान्य दिनों में ये प्रश्न आया होता, तो इग्नोर कर दिया जाता। यह सवाल ऐसे मौके पर आया है, जब पहले से ब्राह्मण अपनी अस्मिता पर चोट पहुंचाने की बात कर रहे हैं। मामला चाहे भाजपा विधायकों की बैठक के बाद मिली नोटिस का हो, यूजीसी का, घूसखोर पंडित का, शंकराचार्य का हो या बटुकों की चोटी पकड़ कर खींचने का। ऐसे में जब प्रश्नपत्र में ऐसा सवाल आया, तो डैमेज कंट्रोल करने के लिए पार्टी नेताओं ने ही विरोध शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री को पत्र लिखने लगे। मुख्यमंत्री ने भी तत्परता से निर्णय लेते हुए इसे गलत बताया और जांच के निर्देश दिए। यूपी में ब्राह्मणों की नाराजगी का सिलसिला ऐसे चला ----------------------- यह खबर भी पढ़ें- UP दरोगा भर्ती परीक्षा-अवसरवादी का ऑप्शन 'पंडित' देने पर विवाद, सीएम योगी ने कहा- जातीय कमेंट बर्दाश्त नहीं उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती परीक्षा में अवसरवादी के विकल्प में ‘पंडित’ ऑप्शन दिए जाने पर विवाद हो गया है। सीएम योगी ने सभी भर्ती बोर्ड को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा- जाति, धर्म को लेकर अमर्यादित टिप्पणी न की जाए। यह कतई बर्दाश्त नहीं है। बार-बार ऐसी गलती करने वालों को प्रतिबंधित किया जाए। पढ़िए पूरी खबर...
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