Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    अखिलेश 55-60 सीट से ज्यादा छोड़ने को तैयार नहीं:कांग्रेस छोटे दलों के सहारे दबाव बना रही; सीट शेयरिंग पर कितना उलझा पेंच

    22 hours ago

    1

    0

    यूपी विधानसभा चुनाव- 2027 के लिए सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग का मामला उलझता जा रहा है। कांग्रेस इस मसले को इसी अक्टूबर महीने में सुलझा लेना चाहती है। पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष और सांसद इमरान मसूद पहली बार अपना सुर नरम करते 'सम्मानजनक सीटों' की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, प्रतापगढ़ से सपा सांसद शिवपाल सिंह पटेल कांग्रेस की 150 सीटों की मांग को पूरी तरह अव्यावहारिक बता चुके हैं। तर्क दिया है कि यूपी में सपा के सवा सौ विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के सिर्फ दो। इसलिए कांग्रेस की वास्तविक हैसियत 10 से 20 सीटों की ही है। उन्हें 50 सीटें देना भी बहुत बड़ी बात होगी। कांग्रेस यूपी के छोटे दलों को साधकर सपा पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। सवाल है कि आखिर सीट शेयरिंग को लेकर अखिलेश यादव और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में शामिल राहुल गांधी व प्रियंका गांधी से बात क्यों नहीं हो पा रही? यूपी कांग्रेस में नेतृत्व बदलाव और एमएलसी चुनाव से खुद को दूर रखकर भी पार्टी सपा से मनचाही सीट क्यों नहीं ले पा रही? पढ़िए स्टोरी… कांग्रेस 200 से 150 तक पहुंची, अब सम्मानजनक सीटें मांग रही कांग्रेस ने यूपी विधानसभा के लिए सपा से पहले 200 सीटें मांगी थीं। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने तो कांग्रेस को बड़ा भाई तक बता दिया था। कहा था कि बराबरी से कम पर कोई समझौता नहीं। लेकिन, समय के साथ कांग्रेस नेताओं के सुर नरम पड़ते जा रहे हैं। 200 सीट मांगने वाले यूपी प्रभारी ही अब 150 की बात करने लगे हैं। 7 अक्टूबर को यूपी के कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने सम्मानजनक सीट की बात कहकर साफ कर दिया कि कांग्रेस अब पूरी तरह से सपा के सामने नतमस्तक हो चुकी है। एमएलसी चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारकर कांग्रेस पहले ही यह संदेश दे चुकी है कि वह सपा के खिलाफ नहीं जा रही। सवाल है कि आखिर कांग्रेस कितनी सीट चाहती है? इसका जवाब वरिष्ठ पत्रकार हिसाम सिद्दीकी देते हैं। कहते हैं- कांग्रेस यूपी में फिर से खुद को स्थापित करना चाहती है। यह तभी संभव है, जब हर जिले में उसके पास कोई ना कोई मजबूत चेहरा हो। ऐसे में कांग्रेस की कोशिश है कि वह यूपी विधानसभा चुनाव में 75 से 80 सीटों पर लड़ें। इसमें हर जिले में एक सीट और अमेठी, रायबरेली व सहारनपुर जैसे जिले में एक से अधिक सीटें चाहती है। मतलब, कांग्रेस के लिए सम्मानजनक सीटों की संख्या 75 से 80 के बीच मानी जा रही है। इस पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- सपा के लिए कांग्रेस की ये मांग पूरी करना क्यों मुश्किल यूपी में कांग्रेस का जनाधार किसी से छिपा नहीं है। कई जिलों में उसका संगठन जीरो है। वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र प्रसाद कहते हैं- सपा 2027 का विधानसभा चुनाव यूपी में सरकार बनाने के लिए लड़ रही है। उसे भी पता है कि अगर 2027 में वह चूकी, तो ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और डीएमके जैसा हश्र उसका भी हो सकता है। आज की तारीख में इंडिया गठबंधन में सपा ही कांग्रेस की सबसे मजबूत सहयोगी है। भाजपा की कोशिश है कि वह सपा जैसे मजबूत सहयोगी को यूपी में हराकर इस गठबंधन को और कमजोर करे। यही कारण है कि सपा इस बार एक-एक सीट को तौल रही है। सपा अगर कांग्रेस की मांग के मुताबिक 75 से 80 सीटें दे देगी, तो उसके पास लड़ने के लिए 320 से 325 सीटें ही बचेंगी। ऐसे में 202 का आंकड़ा छून पाना सपा के लिए मुश्किल होगा। सपा चाहती है कि कांग्रेस भी उसी मजबूती से लड़े, जिससे बहुमत के आंकड़े को छूना आसान हो सके। यही कारण है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पहले ये बयान दिया था कि सीट शेयरिंग का एक ही फॉर्मूला है जीत का…। कांग्रेस बताए कि वह किस सीट पर कौन से प्रत्याशी को उतारेगी? सपा चाहती है कि कम से कम कांग्रेस उसे ऐसी 50 सीटों की सूची दे। सपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस से ये सूची मांगी गई थी, जो अब तक उसकी ओर से उपलब्ध नहीं कराई गई है। यही कारण है कि दोनों पार्टियों में सीट शेयरिंग का मसला सुलझ नहीं पा रहा। सीट शेयरिंग पर राहुल-प्रियंका और अखिलेश की अब तक नहीं हुई बात सपा और कांग्रेस से जुड़े सोर्स का दावा है कि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व को एक बात समझ में आ चुकी है कि गठबंधन में ही यूपी विधानसभा और आगे 2029 का लोकसभा लड़ा जाएगा। मतलब, सपा-कांग्रेस में ये गठबंधन लंबा चलने वाला है। 2029 में तभी इस गठबंधन को फायदा होगा, जब 2027 में वो यूपी फतह कर लें। वरिष्ठ पत्रकार हिसाम सिद्दीकी के मुताबिक, अभी तक सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी-प्रियंका गांधी के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बात नहीं हुई है। ये भी दावा करते हैं कि इन तीन नेताओं की सहमति से ही यूपी में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला भी तय होगा। इसके अलावा अन्य जो भी नेता बोल रहे हैं, उनके बयान के कोई मायने नहीं। तो क्या सूची तैयार करने के लिए छोटे दलों को साध रही कांग्रेस हाल के दिनों में राहुल-प्रियंका से यूपी में सक्रिय छोटे दलों के कई नेताओं ने मुलाकात की है। इसके अलावा भी कांग्रेस में लगातार कई बड़े चेहरों को शामिल कराने का क्रम जारी है। अपनी जनता पार्टी के बैनर तले यूपी की राजनीति में सक्रिय पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य भी अपने बेटे उत्कृष्ट मौर्य के साथ राहुल-प्रियंका से मिल चुके हैं। बताते हैं कि पिता-पुत्र कांग्रेस के सिंबल पर यूपी चुनाव में उतरेंगे। इसी तरह चौहान समाज की पार्टी चला रहे गाजीपुर के डॉ. संजय चौहान और अपना दल (कमेरावादी) के पंकज निरंजन की भी राहुल गांधी से मुलाकात हो चुकी है। पंकज निरंजन विधायक पल्लवी पटेल के पति हैं। माना जा रहा है कि ये सभी नेता कांग्रेस के सिंबल पर विधानसभा चुनाव में उतरेंगे। इससे पहले कांग्रेस में हेमंत चौधरी अपनी जन सरदार पार्टी का कांग्रेस में विलय कर चुके हैं। हेमंत चौधरी पूर्व में अपना दल (एस) में राजनीति कर चुके हैं। उनकी पार्टी का कुर्मी समाज में खास असर था। बस्ती और सिद्धार्थनगर जिले की करीब 8-10 सीटों पर हेमंत चौधरी का प्रभाव माना जाता है। मथुरा की राजनीति के कद्दावर स्तंभ और 8 बार के पूर्व विधायक पंडित श्याम सुंदर शर्मा भी कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। कांग्रेस इन छोटे दलों के नेताओं की मदद से अपनी सूची तैयार करना चाहती है। जिससे सपा से सीट शेयरिंग के समय वह अपनी बात का वजन भी बता सके। 2022 विधानसभा चुनाव का फॉर्मूला अपना सकती है सपा वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं- गठबंधन में दोनों दलों को लचीलापन दिखाना होगा। सपा को हर हाल में कांग्रेस को 70 से ज्यादा सीटें देनी ही पड़ेंगी। सपा 2022 के विधानसभा चुनाव का फॉर्मूला भी अपना सकती है। जिसमें प्रत्याशी उसके होंगे, लेकिन सिंबल कांग्रेस का होगा। मतलब, कांग्रेस की तरफ से मजबूत प्रत्याशी नहीं दिए जाने पर सपा समझौता करने के लिए एक विकल्प पेश कर सकती है। 2022 में सपा ने सुभासपा की कई सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। खुद पल्लवी पटेल सपा के सिंबल पर चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंची थीं। -------------------------------------- भास्कर एक्सक्लूसिव पढ़ें - यूपी चुनाव में 200 सीट मांगने वाली कांग्रेस का सरेंडर, MLC की 11 सीटों में एक पर भी नहीं उतारा प्रत्याशी यूपी चुनाव में सपा से गठबंधन के लिए बराबर की सीट मांग रही कांग्रेस ने MLC चुनाव में सरेंडर कर दिया। MLC की 11 सीटों में से एक पर भी पार्टी ने प्रत्याशी नहीं उतारा। दावेदार नामांकन के आखिरी दिन तक इंतजार करते रह गए। दैनिक भास्कर ने बीते 10 महीनों से कांग्रेस का झंडा लेकर प्रचार कर रहे 8 प्रत्याशियों से बात की। उनका कहना है कि पार्टी ने उनके साथ धोखा किया। अब उनके सामने अपना सम्मान बचाने की चुनौती है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
    Click here to Read more
    Prev Article
    लखनऊ के प्लासियो मॉल तक पहुंची गोमती:IIT बंद, बैकुंठ धाम जलमग्न ; आपदा प्रबंधन दफ्तर तक पहुंचा पानी
    Next Article
    45 लाख गांठ वाली कालीन, डिजाइन में 50 जानवर छिपे:दावा- साड़ी के वेस्ट से बनी जयपुरी कालीन; भदोही एक्सपो में 56 देशों के खरीदार

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment