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    अल-कायदा मॉड्यूल केस में 3 आतंकियों को उम्र कैद:50-50 हजार का जुर्माना, कुकर बम के साथ 2021 में लखनऊ में पकड़े गए थे

    7 hours ago

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    लखनऊ की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने अल-कायदा से जुड़े आतंकी मॉड्यूल मामले में फैसला सुनाते हुए 3 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला सोमवार को एडीजे-3/स्पेशल जज जैनेंद्र पांडेय की अदालत ने सुनाया है। मिनहाज अहमद, मुसीरुद्दीन और तौहिद को ठहराया दोषी कोर्ट ने मामले में मुख्य आरोपी काकोरी निवासी मिनहाज अहमद, मड़ियांव निवासी मुसीरुद्दीन उर्फ मुसीर और बड़गाम जम्मू-कश्मीर निवासी तौहिद को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने अपने फैसले में माना है कि आरोपियों ने सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र के तहत आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी की थी, जो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था। इन आरोपियों को जुलाई 2021 में लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। एनआईए कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला अदालत में चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य पेश किए। पब्लिक प्रॉसीक्यूटर ब्रजेश यादव और मनोज सिंह ने बताया कि जांच के दौरान आरोपियों के पास से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, हथियार और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए थे। इन साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने यह माना कि आरोपी आतंकवादी संगठन से जुड़े थे और बड़े हमले की साजिश रच रहे थे। इस केस में दो मुख्य आरोपी मिनहाज अहमद और मुसीरुद्दीन पर आरोप है कि वे 15 अगस्त से पहले राजधानी समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों में सिलसिलेवार धमाकों की साजिश रच रहे थे। एटीएस की कार्रवाई में दोनों के पास से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, कुकर बम और हथियार बरामद हुए थे। अदालत ने इससे पहले सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 2023 में मिली जमानत, अब आया 2 मार्च 2023 को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दोनों आरोपियों को जमानत दे दी थी। इसके बाद से ही यह मामला अदालत में विचाराधीन था। अब एनआईए की विशेष अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था, जिसे आज सोमवार शाम 5 बजे सुनाया जाएगा। इस फैसले को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजरें टिकी हुई हैं। 11 जुलाई 2021: ATS को मिली थी आतंकी साजिश की बड़ी सूचना 11 जुलाई 2021 को एटीएस उत्तर प्रदेश को खुफिया सूचना मिली थी कि अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़े लोग भारत में सक्रिय होकर आतंकी घटनाओं की साजिश रच रहे हैं। जांच में सामने आया कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर से संचालित नेटवर्क के निर्देश पर भारत में अल-कायदा इंडियन सबकॉन्टिनेंट के तहत मॉड्यूल तैयार किया जा रहा था। इस मॉड्यूल का उद्देश्य देश के युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करना, उन्हें संगठन में शामिल करना और बड़े आतंकी हमलों के लिए तैयार करना था। जांच एजेंसियों के अनुसार, लखनऊ में भी इसी तरह का एक नेटवर्क खड़ा किया जा रहा था, जिसमें स्थानीय युवकों को जोड़कर उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही थी। लखनऊ में तैयार हो रहा था मॉड्यूल, 15 अगस्त से पहले धमाकों की साजिश जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी मिनहाज अहमद और मुसीरुद्दीन इस मॉड्यूल के मुख्य सदस्य थे। ये दोनों अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई संवेदनशील इलाकों में बम धमाके करने की योजना बना रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी भवनों, भीड़-भाड़ वाले बाजारों और ऐतिहासिक स्थलों को निशाना बनाने की तैयारी थी। योजना इतनी खतरनाक थी कि इसमें मानव बम के इस्तेमाल तक की बात सामने आई थी। 15 अगस्त से पहले इस साजिश को अंजाम देने की तैयारी चल रही थी। ATS की रेड में खुला राज: घर से मिला कुकर बम और विस्फोटक जखीरा सूचना की गंभीरता को देखते हुए एटीएस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए टीमों का गठन किया। एक टीम ने मुसीरुद्दीन को उसके घर से गिरफ्तार किया, जहां से विस्फोटक बनाने की सामग्री बरामद हुई। दूसरी टीम ने मिनहाज अहमद के घर पर दबिश दी, जहां से जो बरामदगी हुई, उसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया। घर से एक तैयार कुकर बम, दूसरा कुकर बम बनाने की तैयारी, पिस्टल और जिंदा कारतूस के साथ भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मिली। इसके अलावा पोटैशियम परमैंगनेट, गंधक, काले और सफेद पाउडर, सैकड़ों माचिस की डिब्बियां, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान भी बरामद किया गया। मौके पर पहुंची बम निरोधक दस्ते की टीम ने कुकर बम को निष्क्रिय किया। पूछताछ में खुलासा: सोशल मीडिया से हुआ कट्टरपंथ, खुद बनाया बम पूछताछ में आरोपी मिनहाज अहमद ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए वह कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ा और फिर टेलीग्राम के माध्यम से विदेशी आकाओं के संपर्क में आया। उसे निर्देश दिया गया था कि वह विस्फोटक सामग्री जुटाए और स्थानीय युवाओं को जोड़कर मॉड्यूल तैयार करें। उसने अपने साथी मुसीरुद्दीन को भी इसमें शामिल किया और उसे बम बनाने के तरीके सिखाए। आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि उसने खुद कुकर बम तैयार किया था और जल्द ही लखनऊ में धमाका करने की योजना थी, लेकिन उससे पहले ही एटीएस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ केस, देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला इस पूरे मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 121ए, 122, 123 के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (UAPA), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला केवल एक आपराधिक साजिश नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता पर हमला करने की सुनियोजित कोशिश थी।
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