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    अलीगढ़ में सैकड़ों परिवारों के आशियाने पर संकट:गभाना तहसील में बिना जांच सीलिंग में दर्ज की 60 साल से बनी आबादी, लेखपाल सस्पेंड

    1 hour ago

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    अलीगढ़ की गभाना तहसील में राजस्व विभाग की लापरवाही ने सैकड़ों परिवारों के आशियानों पर संकट खड़ा कर दिया है। पिछले 60 सालों से बसी घनी आबादी और दुकानों वाली करोड़ों की जमीन को तहसील स्टाफ ने कागजों में 'रिक्त' दिखाकर सरकारी खाते (सीलिंग) में दर्ज करा दिया। यह मामला सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों की शिकायत में प्राथमिक जांच में दोषी पाए जाने पर लेखपाल त्रिलोकी प्रसाद को निलंबित कर दिया गया है, जबकि राजस्व निरीक्षक राकेश भारती के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेजी गई है। ​60 साल पुरानी बस्ती को बताया खाली मैदान पूरा विवाद गभाना की खाली भूमि को बचाने के खेल से शुरू हुआ। दरअसल, गभाना की गाटा संख्या 57 की करीब 28 बीघा भूमि सीलिंग में दर्ज थी, जिस पर लंबे समय से अदालती कार्यवाही चल रही थी। कोर्ट के आदेशानुसार, याची पक्ष शशांक प्रताप सिंह ने विकल्प के तौर पर रामपुर की गाटा संख्या 17 और 24 की भूमि को सीलिंग में शामिल करने का प्रस्ताव दिया। तहसील के राजस्व अमले को इस जमीन का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करना था। आरोप है कि लेखपाल और कानूनगो ने बिना मौका मुआयना किए फर्जी रिपोर्ट लगा दी कि यह जमीन खाली है। इसी गलत रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने रामपुर की करीब 52 बीघा जमीन से निजी मालिकाना हक खत्म कर उसे उत्तर प्रदेश सरकार (सीलिंग) के नाम दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया। दो दिन पहले खुला राज हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन को कागजों में सरकारी घोषित किया गया, वहां पिछले कई दशकों से 300 से अधिक मकान और दुकानें बनी हुई हैं। यह इलाका जीटी रोड के पास स्थित एक घनी बस्ती है। इस खेल का खुलासा तब हुआ जब कुछ स्थानीय निवासी दो दिन पहले तहसील में किसी काम से अपने दस्तावेज निकलवाने पहुंचे। जमीन की मालिक निकली सरकार वहां पता चला कि जिस जमीन पर उनका घर बना है, उसकी मालिक अब सरकार है। यह खबर फैलते ही रामपुर और गभाना के ग्रामीण भड़क गए। लोगों ने एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया। ग्रामीणों का कहना है कि तहसील स्टाफ के भ्रष्टाचार और गलत रिपोर्ट की सजा उन्हें बेघर होकर भुगतनी पड़ रही है। ​एसडीएम का आश्वासन और दोषियों पर कार्रवाई ग्रामीणों के विरोध और साक्ष्यों को देखते हुए एसडीएम हरिश्चंद्र ने लेखपाल त्रिलोकी प्रसाद की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया है। साथ ही, राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एसडीएम ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि इस पूरे प्रकरण को दोबारा पटल पर लाया जा रहा है और फाइल तैयार कर गलत इंद्राज (Entry) को सुधारने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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