Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    अमेरिका में 2 लाख भारतवंशी वोटर्स के नाम कटे:मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प को हार का डर; 2024 में 65% ने डेमोक्रेट्स को वोट दिया था

    20 hours ago

    1

    0

    अमेरिका की वोटर लिस्ट से 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स का नाम कट गया है। इन लोगों के नाम उन 26 राज्यों में काटे गए हैं, जहां ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। अमेरिका में करीब 21 लाख भारतवंशी वोटर्स हैं। 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में ट्रम्प की पार्टी को हार का डर सता रहा है। इसकी एक वजह भारतीय मूल के वोटरों का रुझान है, जो हमेशा से उनकी विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रहा है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में करीब 65% भारतीय मूल के लोगों ने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस को वोट दिया था। वोटर लिस्ट की जांच क्यों हो रही अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन वोटर लिस्ट की जांच कर रहा है, ताकि अयोग्य वोटर्स के नाम हटाए जा सकें। सरकार का कहना है कि इससे चुनाव में गड़बड़ी रोकने और वोटिंग प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। इसी मकसद से ट्रम्प ‘सेव अमेरिका एक्ट’ का समर्थन कर रहे हैं। फरवरी में अमेरिकी संसद के निचले सदन ने इस बिल को मंजूरी दी थी। इसके तहत वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने वालों को अमेरिकी नागरिकता साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज देने होंगे। वोट डालने के लिए पहचान पत्र दिखाने के नियम भी सख्त किए जाएंगे। ये नियम मतदान केंद्र पर और डाक से वोट डालने, दोनों पर लागू होंगे। ट्रम्प चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली होने के दावा करते रहे हैं। हालांकि, इन दावों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं मिले हैं। ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस की एक रिसर्च में भी जांच किए गए चुनावों में धांधली के मामले बेहद कम पाए गए। बिल के विरोधियों का कहना है कि सख्त दस्तावेजी नियमों के कारण उन योग्य नागरिकों को भी वोट देने में परेशानी हो सकती है, जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट नहीं है। मोक्रेटिक पार्टी के नेताओं का आरोप है कि ट्रम्प प्रशासन इन कदमों से मिडटर्म चुनावों को प्रभावित करना चाहता है। ट्रम्प के कामकाज से 70% अमेरिकी संतुष्ट नहीं ट्रम्प के खिलाफ उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी में बगावत के संकेत दिखने लगे हैं। ट्रम्प की लोकप्रियता घट रही है। पार्टी नेताओं को डर है कि मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प का साथ उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। नवंबर में होने वाले चुनाव से पहले कई रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प से दूरी बना रहे हैं। कुछ ने अपनी चुनावी वेबसाइट से ट्रम्प और उनके 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे का जिक्र हटा दिया है। कुछ नेता उनके साथ मंच साझा करने से भी बच रहे हैं। AP-NORC सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 30% अमेरिकी ट्रम्प के कामकाज से खुश हैं। अर्थव्यवस्था पर उनकी अप्रूवल रेटिंग 26% है। महंगाई से निपटने के मामले में यह सिर्फ 17% है। 65% से ज्यादा अमेरिकी बढ़ती कीमतों के लिए ट्रम्प की नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं। संसद में ट्रम्प के लिए बहुमत बचाना जरूरी है -------------------- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने टाटा-विप्रो को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने गुरुवार को 8 बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। इनमें भारत की चार कंपनियां टाटा, इंफोसिस, विप्रो और HCL हैं। इनके अलावा माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी पर भी यह रोक लगाई गई है। पूरी खबर पढ़ें…
    Click here to Read more
    Prev Article
    ओबामा के करीबी थे, अब ट्रम्प के खास बने जुकरबर्ग:राष्ट्रपति ने जेल भेजने की धमकी दी थी, अब साथ मिलकर AI के नियम बना रहे
    Next Article
    मस्क का डेढ़ साल पहले अपमान, अब सम्मान:ट्रम्प ने नेशनल साइंस मेडल से नवाजा, कहा- इलॉन हमारे दौर के एडिसन

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment