Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति बोले- ईरान आतंकवाद का सबसे बड़ा गढ़:सनकी और खतरनाक शासन को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दे सकते

    1 hour ago

    1

    0

    मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वॉरशिप और सैनिकों की तैनाती के बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की कूटनीति को कमजोरी न समझा जाए और जरूरत पड़ी तो सैन्य विकल्प भी इस्तेमाल होगा। वेंस ने कहा कि सैन्य कार्रवाई की धमकियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। फॉक्स न्यूज से बातचीत में वेंस ने कहा- हमें ऐसी स्थिति में पहुंचना होगा जहां ईरान, जो दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा गढ़ है, परमाणु आतंकवाद से दुनिया को धमकी न दे सके। सनकी और दुनिया के सबसे खतरनाक शासन को परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, लेकिन उनके पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं और वे उनका इस्तेमाल करने की इच्छा दिखा चुके हैं। ट्रम्प ने बुधवार को संसद में अपने संबोधन के दौरान आरोप लगाया था कि ईरान अमेरिका तक मार करने में सक्षम मिसाइलें विकसित कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पिछले साल अमेरिकी हमलों के बाद अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। वेंस बोले- बातचीत का अंतिम फैसला ट्रम्प के हाथ में है जब वेंस से पूछा गया कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता को हटाना भी अमेरिका का लक्ष्य है, तो उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प करेंगे। वेंस ने कहा कि बातचीत कितने समय तक जारी रखनी है, इसका अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प करेंगे। उन्होंने कहा- हम कोशिश जारी रखेंगे। लेकिन राष्ट्रपति के पास यह अधिकार है कि वे तय करें कि कूटनीति अपनी सीमा तक पहुंच गई है या नहीं। हमें उम्मीद है कि इस बार बातचीत बुरे अंजाम तक नहीं पहुंचेगी, लेकिन अगर पहुंचती है तो फैसला राष्ट्रपति ही करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान अगले दो हफ्तों में ज्यादा बड़ा प्रस्ताव देगा, जिससे दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम किए जा सकें। ईरान और अमेरिका के बीच तीसरे दौर की बातचीत आज यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के अधिकारी गुरुवार यानी आज जिनेवा में तीसरे दौर की बातचीत करेंगे। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची अपनी टीम के साथ जिनेवा पहुंच चुके हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ करेंगे। वॉशिंगटन इस बीच ‘मैक्सिमम प्रेशर’ अभियान के तहत नए प्रतिबंधों की भी तैयारी कर रहा है। ईरान ने जिनेवा वार्ता से पहले अमेरिकी दबाव की रणनीति को खारिज किया। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने ट्रम्प के बयानों को झूठ बताया और उन पर दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया। ट्रम्प ने कई बार चेतावनी दी है कि वार्ता विफल होने पर अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। क्षेत्रीय देशों को आशंका है कि ऐसा कदम संघर्ष को जन्म दे सकता है। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि किसी भी हमले की स्थिति में मिडिल ईस्ट में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डे उसके निशाने पर होंगे। इससे क्षेत्र में तैनात हजारों अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका के 50 फाइटर जेट मिडिल ईस्ट पहुंचे अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में पिछले हफ्ते 50 से ज्यादा फाइटर जेट भेजे। इंडिपेंडेंट फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और मिलिट्री एविएशन मॉनिटर्स ने कई F-22, F-35 और F-16 फाइटर जेट को मिडिल ईस्ट की ओर जाते हुए रिकॉर्ड किया गया। इन विमानों में से कुछ मिडिल ईस्ट में उतर चुके हैं। खासकर इजराइल के एयरबेस बेन गुरियन और ओवडा) पर, जहां अमेरिकी F-22 जेट को देखा गया और वहां लैंड करते हुए रिपोर्ट किया गया। यह जानकारी अमेरिका और ईरान के बीच 16 फरवरी को जिनेवा में हुई दूसरी दौर की बातचीत के दौरान सामने आई थी। दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते से जुड़े मुद्दों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तय की गई शर्तों को ईरान मानने को तैयार नहीं है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि बातचीत के कुछ हिस्से सकारात्मक रहे, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बनी है। इन बयानों से साफ है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत अभी भी नाजुक दौर में है। अमेरिका ने रिफ्यूलिंग टैंकर भी मिडिल ईस्ट भेजे अमेरिकी फाइटर जेट्स के साथ कई एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर भी मिडिल ईस्ट की ओर भेजे हैं। इससे संकेत मिलता है कि विमान लंबे समय तक ऑपरेशन की तैयारी में हैं। इस बीच, अमेरिकी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि USS जेराल्ड आर. फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कैरिबियन से रवाना होकर मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि फोर्ड के साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर, USS माहान, USS बैनब्रिज और USS विन्सटन चर्चिल भी हैं। इससे पहले USS अब्राहम लिंकन और अन्य महत्वपूर्ण अमेरिकी एयर और नेवल एसेट्स भी इस साल की शुरुआत में क्षेत्र में तैनात किए जा चुके हैं। इससे अमेरिका की मिडिल ईस्ट में सैन्य मौजूदगी और मजबूत हुई है। F-35 और F-16 फाइटर जेट के बारे में जानिए… ईरान-अमेरिका के बीच बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद अटका ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। ईरान का कहना है कि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह, हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद करे। अमेरिका इस मुद्दे को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन ईरान मुख्य रूप से सिर्फ परमाणु मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। ईरानी विदेश मंत्री बोले थे- हमला हुआ तो इसका असर दूसरों पर भी पड़ेगा ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिका के साथ हुए दूसरे दौर की बातचीत को सकारात्मक बताया था। अरागची ने बातचीत को लेकर उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि समझौते की दिशा में नई खिड़की खुली है। बातचीत के बाद संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में अरागची ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि बातचीत से टिकाऊ और सहमति वाला समाधान निकलेगा, जो सभी संबंधित पक्षों और पूरे क्षेत्र के हित में होगा।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी भी खतरे या हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो इसके नतीजे अकेले वह नहीं भुगतेंगे, बल्कि दूसरों पर भी इसका असर पड़ेगा। -----------------------
    Click here to Read more
    Prev Article
    चीन के पायलटों को गुपचुप देता था ट्रेनिंग, पूर्व अमेरिकी अधिकारी हुआ गिरफ्तार
    Next Article
    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- गौ माता की रक्षा ही धर्म:वाराणसी के मठ में ठहरे, पूछताछ को नहीं पहुंची प्रयागराज पुलिस; भक्तों का जमावड़ा

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment