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    अपर्णा यादव ने PM का नाम लिया तो भड़के लोग:बोले- UGC नियमों से समाज को बांटा, साध्वी प्रज्ञा ने कहा- 13 दिनों तक टॉर्चर सहा

    5 hours ago

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    लखनऊ में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अपर्णा यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेने पर विरोध का सामना करना पड़ा। अपर्णा वीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। यहां राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। इस दौरान जैसे ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने हूटिंग शुरू कर दी। विरोध कर रहे लोगों ने कहा- पीएम ने UGC नियमों से समाज का बांट दिया है। यह कार्यक्रम राजनैतिक नहीं, सामाजिक है। इसलिए यहां प्रधानमंत्री का नाम नहीं ले। इस पर अपर्णा ने लोगों को शांत करते हुए सावरकर पर ही बोलना चालू रखा। उन्होंने सावरकर को महान क्रांतिकारी बताते हुए ‘भारत रत्न’ देने की मांग की। कार्यक्रम इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सभागार में हुआ। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर शामिल हुईं। एटीएस ने 13 दिनों तक बंधक बनाकर प्रताड़ित किया- साध्वी प्रज्ञा साध्वी प्रज्ञा ने कहा- जब तक राम वन नहीं गए, तब तक वे ‘राम’ नहीं बने। यदि माता सीता के अपमान के बाद राम रावण को क्षमा कर देते, तो वे ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ नहीं कहलाते। अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना ही पुरुषार्थ और धर्म है। उन्होंने बताया- एटीएस ने 13 दिनों तक गैर-कानूनी तरीके से बंधक बनाकर प्रताड़ित किया। कुछ बड़े नेताओं के नाम लेने का दबाव बनाया। इस दौरान सत्य को सामने लाने में कुछ लोगों ने साथ दिया। उन सभी का आभार। देश का बंटवारा करने वाला व्यक्ति ‘राष्ट्रपिता’ नहीं हो सकता साध्वी प्रज्ञा ने कहा- स्वतंत्रता के लिए पहला प्रयास असफल नहीं होता, बल्कि वह जागरण की शुरुआत करता है। बार-बार प्रयास से ही राष्ट्र में चेतना आती है। जो राष्ट्र और कर्तव्य को समझ लेता है, वही सावरकर कहलाने योग्य है। गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश का बंटवारा करने वाला व्यक्ति ‘राष्ट्रपिता’ नहीं हो सकता। उनके अनुसार भारत माता ‘आदि जननी’ हैं और सभी लोग उनके पुत्र हैं। राष्ट्रवादी विचार रखने वालों को प्रताड़ित किया गया कांग्रेस शासन की तुलना अंग्रेजी हुकूमत से करते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रवादी विचार रखने वालों को प्रताड़ित किया गया। अपने भोपाल चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि जब ‘भगवा को आतंकवाद’ कहने वाला व्यक्ति उनके सामने खड़ा हुआ, तो उन्होंने इसे वैचारिक युद्ध माना और जनता के समर्थन से विजय हासिल की। क्रांतिकारियों के परिवारों ने भी भारी कष्ट सहे। विशेष रूप से सावरकर के परिवार की महिलाओं के त्याग का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज की प्रताड़ना के बावजूद वे अपने संकल्प से पीछे नहीं हटीं। अंत में युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। अपर्णा यादव बोलीं- परिवार वाद नहीं, बीजेपी चुनी अपर्णा यादव ने कहा- यूपी में ‘मिशन शक्ति’ के जरिए महिलाओं की सुरक्षा मजबूत हुई है। उन्होंने सभा में सावरकर की प्रतिमा स्थापित कराने की घोषणा भी की और जनसमर्थन की अपील की। साथ ही कहा कि समाजवादी पार्टी छोड़कर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रवाद और परिवारवाद खत्म करने के उद्देश्य से जॉइन की थी। ये रहे प्रमुख अतिथि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. डॉ. डी.एन. उपाध्याय ने की। मौके पर मेजर जनरल अजय कुमार चतुर्वेदी, ऋषि कुमार मिश्रा, डॉ. सूर्यकांत, अजय दत्त शर्मा (प्लास्टिक सर्जरी विभाग, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी), वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार, सावरकर विचार मंच के संयोजक अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. ठकराल, पूर्व निदेशक (आयुर्वेद) उ.प्र. शासन लखनऊ, प्रो. अनिल कुमार शुक्ल तथा विश्व आयुर्वेद परिषद भोपाल की राष्ट्रीय प्रमुख शिक्षा प्रकोष्ठ की आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. चित्रा सक्सेना उपस्थित रहीं।
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