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    'अविमुक्तेश्वरानंद डिप्टी सीएम-सतुआ बाबा के संपर्क में थे':आशुतोष महाराज बोले- उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के कहने पर धरना खत्म हुआ

    21 hours ago

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    माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अवि मुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच हुआ विवाद अब राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है। इस मामले के बाद अवि मुक्तेश्वरानंद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुख्यवादी आशुतोष महाराज सीधी लड़ाई छिड़ गई है। यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के उस बयान-चोटी पकड़कर पीटना महापाप, पाप लगेगा, पर आशुतोष महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आशुतोष महाराज ने डिप्टी सीएम पर गंभीर आरोप लगाते हुए वीडियो तक जारी कर दिया। साथ ही उन्होंने बिना नाम लिए सीएम योगी के करीबी सतुआ बाबा का नाम लिए बिना उन्हें निशाने पर लिया है। पहले डिप्टी सीएम केशव मौर्या ने शंकरचार्य से माफी मांगते हुए स्नान करने का आग्रह किया था। अब ब्रजेश पाठक ने भी मौनी अमावस्या पर हुई मारपीट को पाप बता दिया। सतुआ बाबा और अविमुक्तेश्वरानंद गुरुभाई हैं- आशुतोष महाराज अवि मुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कोर्ट में वाद दर वाद दाखिल करने वाले आशुतोष महाराज ने कहा कि – माघ मेले 2026 में अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा जो धरना प्रदर्शन और ड्रामेबाजी की गई, इसके पीछे बहुत बड़ी साजिश और बड़े बड़े व्यक्तियों का हाथ सामने आया है। आरोप लगाया कि ​उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और एक चर्चित बाबा जो माघ मेले में बहुत चर्चा में रहे हैं, जिनका आश्रम बनारस में है- ये लोग अविमुक्तेश्वरानंद और जो इनके गुरु भाई हैं। सदानंद सरस्वती इनके सीईओ प्रकाश उपाध्याय (सीआईओ जो सीईओ होता है), इनके नंबर की जांच करा ली जाए। ​मैंने डीजीपी से मांग की है कि इनके नंबरों की जांच कराई जाए, कॉल डिटेल (CDR) की जांच कराई जाए, IP एड्रेस की जांच कराई जाए। कितनी बार इंटरनेट के द्वारा उपमुख्यमंत्री से बात हुई, कितनी बार उपमुख्यमंत्री ने अविमुक्तेश्वरानंद के नंबर पर बात की, और कितनी बार उस चर्चित बाबा ने बात की है? कुर्सी हथियाने के लिए यह सब षड्यंत्र हुआ ​यह बहुत बड़ा खेल हुआ है। मैं इस बात का दावा करता हूं कि 'धरना तब खत्म करना, जब मैं वहां पर आकर तुमको पानी पिला दूंगा।' तो इसके पीछे की राजनीति समझिए। अपने आप को नेता बनाने के लिए, कुर्सी हथियाने के लिए यह सब षड्यंत्र हुआ है। हमने उत्तर प्रदेश सरकार के डीजीपी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच हो और जांच होने के बाद यदि तथ्य सामने आते हैं तो इनके खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया जाए। इन्होंने सनातन की संस्कृति बिगाड़ने का काम किया है, माहौल खराब किया है और श्रद्धालुओं को परेशान किया है। इनके नंबर की पूरी की पूरी जांच होनी चाहिए।" अवि मुक्तेश्वरानंद के खिलाफ तीन वाद हैं दाखिल आशुतोष महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के खिलाफ प्रयागराज में दो और कैरना कोर्ट में एक वाद दाखिल किया है। शामली के कैराना में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कक्ष संख्या–5 के जज संदीप पारचा ने परिवाद दाखिल कर विपक्षियों को नोटिस जारी करने, बयान दर्ज करने का आदेश पारित किया है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। इससे पहले आशुतोष महाराज ने प्रयागराज के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (रेप एवं पाक्सो विशेष न्यायालय) में वाद दाखिल कर यौन शोषण समेत अन्य गंभीर आरोप लगा दिए। इस मामले में 21 फरवरी को आदेश जारी होगा। इसके अलावा जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य अवि मुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मानहानिकारक बयान और डिजिटल दुष्प्रचार का आरोप लगाते हुए कैराना की अदालत में परिवाद दायर किया था। कोर्ट के बाहर बनाई रील श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुख्यवादी व पक्षकार आशुतोष महाराज ने शुक्रवार को पॉक्सो कोर्ट में नाबालिगों के बयान दर्ज कराए। इस दौरान उन्होंने रील भी बनाई। इस रील में आशुतोष महाराज फाइल लेकर प्रयागराज की जिला अदालत में पहुंच रहे हैं। इसमें बैकग्राउंड में डायलाग है- एक सलाह देता हूं, आप उसके खिलाफ जाने की जुर्रत मत करना। एक और रील है। इसमें गाना बजता है- हमें साथ चाहिए, हम चैन से नहीं रहेंगे हमें इंसाफ चाहिए। भगवा वस्त्र में आशुतोष महाराज समर्थकों और वकीलों के बीच में चल रहे हैं। इसके अलावा कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद आशुतोष महाराज का रोते हुए वीडियो सामने आया है। आशुतोष महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अवि मुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच हुआ विवाद हुआ। देशभर के साधु-संतों ने रिएक्शन दिया। कोई पक्ष में आया तो कोई विरोध करने लगा। इन सबके बीच जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज एकाएक सबसे ज्यादा चर्चा में आ गए। पहले तो उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद का विरोध किया। फिर उनके खिलाफ प्रयागराज कमिश्नर थाने में तहरीर दे डाली। इसके बाद आशुतोष महाराज ने प्रयागराज के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (रेप एवं पाक्सो विशेष न्यायालय) में वाद दाखिल कर यौन शोषण समेत अन्य गंभीर आरोप लगा दिए। पॉक्सो कोर्ट ने आशुतोष महाराज के वाद पर फैसला सुरक्षित कर लिया। 21 फरवरी को आदेश जारी होगा। देशभर की निगाहें इस मामले पर टिकी हैं। तय होगा कि शंकराचार्य के खिलाफ FIR होगी या केस डिसमिस हो जाएगा। बता दें कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद (शिकायत) दायर करके कहा- गुरुकुल की आड़ में वह बाल उत्पीड़न करते हैं। आशुतोष महाराज ने कहा- अविमुक्तेश्वरानंद अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। उनके पास आय से अधिक संपत्ति है। इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया कोर्ट के नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया था। अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा- हमने कोर्ट में सारे साक्ष्य दिए हैं। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। जबसे हमने गोमाता की रक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की, तब से सरकार और कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा था। अब 20 फरवरी को दोनों पक्षों के वकील कोर्ट में पेश होंगे। बता दें, चित्रकूट की श्री तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्यवादी और पक्षकार भी हैं। माघ मेले में हुए विवाद के बाद रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने आ गए थे। पहले पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, फिर कोर्ट गए 24 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के 6 दिन बाद आशुतोष महाराज ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर से अविमुक्तेश्वरानंद की 2 शिकायतें की थीं। पहली शिकायत में आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों को रखा जाता है। उनसे निजी सेवा, भीड़ जुटाने, कार्यक्रमों और पालकी उठवाने जैसे काम कराए जाते हैं। बच्चों का यौन शोषण होने की भी आशंका है। माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों में भी बच्चों से काम कराया गया। यह बाल अधिकार और श्रम कानूनों का उल्लंघन है। शिविर में अवैध हथियार होने की भी आशंका है। आय से अधिक संपत्ति और कई बैंक खातों की जांच की जानी चाहिए। मुकुंदानंद नाम के व्यक्ति की भूमिका की जांच कराई जाए। दूसरी शिकायत में आशुतोष महराज ने अविमुक्तेश्वरानंद पर फर्जी लेटरपैड और दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया। कहा कि माघ मेला क्षेत्र में अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बता रहे। वह “ज्योतिष्पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से लेटरपैड और दस्तावेज बनवाकर अफसरों को पत्र भेज रहे। ये लेटरपैड-पत्र फर्जी और भ्रामक हैं। इनसे प्रशासन और आम लोगों को गुमराह किया जा रहा। इन लेटरपैड पर 24 जनवरी, 2026 (माघ शुक्ल पंचमी) की तारीख दर्ज है। इसी तारीख का इस्तेमाल कर “श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से पत्र जारी किए गए, जिनकी वैधता पर सवाल उठाए गए। पढ़िए आशुतोष महाराज ने कोर्ट में जो वाद दायर किया जब प्रशासन ने आशुतोष महाराज की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो उन्होंने 8 फरवरी को कोर्ट में वाद दायर किया। इसमें उन्होंने लिखा- मेरे ट्रस्ट की ओर से माघ मेला में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुक्ति के लिए माता शाकुंभरी देवी का महायज्ञ किया जा रहा है। मेरे शिविर में 2 शिष्य आए, जो नाबालिग हैं। उन्होंने मेरे सामने कई खुलासे किए। उन्होंने मुझसे शिष्य बनने की इच्छा चाही। कहा कि हम असुरक्षित हैं। मुझसे पुलिस संरक्षण और न्यायिक सहायता मांगी। बच्चों ने मुझे बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने हमें अपने साथ रखा। कई बार कुकर्म किया। यह सब एक साल तक किया गया। महाकुंभ- 2025 के दौरान मेला क्षेत्र में भी कुकर्म किया गया। माघ मेला- 2026 के दौरान दोनों बच्चों से फिर से कुकर्म किया गया। अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य यह कहकर बच्चों पर दबाव बनाते थे कि यह गुरु सेवा है। इससे आशीर्वाद मिलेगा। बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें अविमुक्तेश्वरानंद के साथ भी सोने को कहा जाता है। दोनों बच्चे मौका पाकर हमारे शिविर में आए। इसके बाद 24 जनवरी को झूंसी थाने में शिकायत दी गई। 25 जनवरी को पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक माघ मेला को ई-मेल से शिकायत की। 27 जनवरी को डाक से पुलिस अधीक्षक माघ मेला को शिकायत भेजी। लेकिन, कोई FIR नहीं दर्ज हुई। इसके बाद मुझे धमकियां मिलने लगीं। जानिए आशुतोष महाराज कौन है? आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का जन्म शामली जनपद के कांधला कस्बे के एक पंडित परिवार में हुआ था। इनके पिता राजेंद्र पांडे दिल्ली रोड पर चलने वाली प्राइवेट बसों में कंडक्टर की करते थे। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज कांधला के प्राचीन शाकंभरी सिद्धप्पीठ मंदिर की कमेटी से जुड़े। वर्तमान में वह प्रबंधक भी हैं। इन्हीं के परिवार के चाचा प्रदीप पांडे मंदिर में पुजारी हैं। 2022 में उन्होंने जगतगुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ली थी, इसके बाद से वह सन्यासी जीवन जी रहे है। मौनी अमावस्या पर प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोकी थी 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए। शंकराचार्य बिना गंगा स्नान किए माघ मेले से विदा हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का स्वामी रामभद्राचार्य ने किया था विरोध मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर तुलसी पीठ स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा था- अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अन्याय नहीं हुआ। अन्याय तो उन्होंने किया है। संगम तक पालकी से जाने का नियम नहीं है। उनको बिल्कुल सही नोटिस दिया गया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- स्वामी रामभद्राचार्य की बात मत करिए, वो दोस्ती निभा रहे हैं। उनको लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं क्योंकि वो कुछ भी बोलते हैं। वो हमारे कुल का है ही नहीं। अगर हमारे कुल का होता तो उसको हमारा दर्द होता। जहां तक पालकी की बात है, पेशवा भी हमारी पालकी उठवाकर लाते थे। अब अविमुक्तेश्वरानंद के बारे में जानिए ज्योतिष्पीठ का पूरा विवाद जानिए ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… अविमुक्तेश्वरानंद बोले-योगी मुख्यमंत्री या महंत में से एक पद छोड़ें:सीएम खलीफा जैसे, भगवा पहनने वाला मीट का व्यापार नहीं कर सकता प्रयागराज माघ मेला छोड़ने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों काशी में हैं। यहां शंकराचार्य एक बार फिर खुलकर बोले। उन्होंने कहा- योगी खलीफा जैसे हैं। वह सीएम की कुर्सी छोड़ दें या फिर महंत का पद। योगी को असली हिंदू साबित करने के लिए मैंने 40 दिन दिए थे। 10 दिन बीत गए, अब उनके पास 30 दिन बचे हैं। पढ़िए पूरी खबर
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