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    अयोध्या में अमरूद की सघन बागवानी पर प्रशिक्षण:वैज्ञानिक विधि से किसान प्रति हेक्टेयर 30-40 मीट्रिक टन उत्पादन ले सकते हैं

    2 hours ago

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    अयोध्या में किसानों की आय बढ़ाने और कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल करने के उद्देश्य से अमरूद की वैज्ञानिक खेती पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय के तत्वावधान में फल विज्ञान विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम में डॉ. निरंजन सिंह के नेतृत्व में किसानों को सघन बागवानी की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को “ओपन सेंटर लीडर सिस्टम” के बारे में विस्तार से बताया गया। इस पद्धति में पौधों के बीच का मुख्य तना हटाकर 4-5 प्रमुख शाखाओं को रस्सी की मदद से छतरी के आकार में विकसित किया जाता है। इससे सूर्य का प्रकाश पौधे के अंदर तक पहुंचता है, जिससे नई टहनियां (कल्ले) तेजी से निकलती हैं और फलन क्षमता बढ़ती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जितने अधिक नए कल्ले विकसित होंगे, उतना ही अधिक फल उत्पादन संभव होगा। डॉ. निरंजन सिंह ने बताया कि इस विधि से पौधों की ऊंचाई नियंत्रित रहती है, जिससे देखभाल और फल तुड़ाई आसान हो जाती है। उन्होंने कहा कि सघन बागवानी अपनाने पर प्रति हेक्टेयर 30 से 40 मीट्रिक टन तक उत्पादन प्राप्त हो रहा है, जबकि पारंपरिक खेती में यह उत्पादन केवल 8 से 10 मीट्रिक टन तक सीमित रहता है। इस प्रकार किसान 4 से 5 गुना तक अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. भानु प्रताप ने भी किसानों को उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के शोध प्रक्षेत्र में वर्तमान में करीब 40 जर्मप्लाज्म और 16 अमरूद की विभिन्न प्रजातियों पर शोध कार्य चल रहा है, जिनमें भारतीय और विदेशी दोनों किस्में शामिल हैं। आने वाले समय में “नरेंद्र 1, 2, 3, 4” नाम से नई उन्नत किस्में किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अमरूद में विटामिन की प्रचुर मात्रा होती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। ऐसे में इसकी वैज्ञानिक खेती न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि पोषण सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगी।
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