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    अयोध्या में सहस्त्र लिंगम रामेश्वर भगवान का वाषिर्कोत्सव मनाया गया:रुद्राष्टाध्यायी का अखंड पाठ, सहस्त्र लिंगम का अभिषेक और हवन से सुवासित हुआ वातावरण

    2 hours ago

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    अयोध्या के रामकोट मोहल्ले स्थित राम कचहरी चारों धाम मंदिर में सहस्त्र लिंगम रामेश्वर भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा के एक वर्ष पूर्ण होने पर समारोह का आयोजन हुआ। नव दिवसीय रुद्र महापुराण अनुष्ठान का समापन होली के पावन दिवस पर विधिवत हवन-पूजन के साथ किया गया। श्रीराम जन्मभूमि से लगभग 200 दूरी पर स्थित इस मंदिर परिसर में एक वर्ष पूर्व आंध्र प्रदेश के श्रद्धालु के. श्रीनिवास राव के सहयोग से दक्षिण भारत से लाए गए सहस्त्र लिंगम रामेश्वर भगवान शिव की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। वर्षपूर्ति के अवसर पर आयोजित इस विशेष अनुष्ठान ने मंदिर परिसर को वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया। मंदिर के महंत शशिकांत दास महाराज ने बताया कि यह पावन स्थल स्वामी अंबर दास महाराज की तपोस्थली रहा है। उनके तप, त्याग और भगवान शिव की अनुकंपा से ही यहां सहस्त्र लिंगम रामेश्वर भगवान की स्थापना संभव हो सकी। रुद्राष्टाध्यायी का अखंड पाठ और सहस्त्र लिंगम का निरंतर अभिषेक चला उन्होंने बताया कि नौ दिनों तक 24 घंटे रुद्राष्टाध्यायी का अखंड पाठ और सहस्त्र लिंगम का निरंतर अभिषेक चलता रहा। एक मार्च को विधिवत कलश पूजन हुआ, जबकि चार मार्च को हवन-पूजन के साथ अनुष्ठान की पूर्णाहुति दी गई। 215 से अधिक वैदिक आचार्यों एवं श्रद्धालुओं ने क्रमवार रुद्राष्टाध्यायी पाठ किया आंध्र प्रदेश से पधारे के. श्रीनिवास राव ने बताया कि महंत शशिकांत दास के निर्देशन में आंध्र प्रदेश सहित देश के विभिन्न प्रांतों से आए 215 से अधिक वैदिक आचार्यों एवं श्रद्धालुओं ने क्रमवार रुद्राष्टाध्यायी पाठ और अभिषेक में सहभागिता की। होली के उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न इस धार्मिक आयोजन ने श्रद्धालुओं को भक्ति और आस्था के सूत्र में बांध दिया।मंदिर परिसर में अनुष्ठान के दौरान प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। वैदिक मंत्रों की गूंज, धूप-दीप की सुगंध और अभिषेक की पावन धारा ने वातावरण को शिवमय बना दिया। धर्म, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत यह आयोजन अयोध्या की सतत जीवंत धार्मिक परंपरा का सशक्त प्रमाण बनकर उभरा है।
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