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    अयोध्या मेडिकल कॉलेज में वाटरलेस शैंपू-बॉडीवॉश पड़े धूल खा रहे:7 महीने से गोदाम में डंप, मरीजों को नहीं मिल रहा

    5 hours ago

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    अयोध्या के दशरथ मेडिकल कॉलेज में करीब 20 लाख रुपये के वाटरलेस शैंपू और बॉडीवॉश गोदाम में डंप पड़े हैं। खरीद के बाद इनका लाभ मरीजों को नहीं मिल सका और सामान एक कोने में पड़ा रह गया। मामला सामने आने के बाद अब खरीद प्रक्रिया और जिम्मेदार अधिकारियों की जांच की बात कही जा रही है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मार्तोलिया हैं। उनसे पहले इस पद पर डॉ. सत्यजीत वर्मा तैनात थे। उनके कार्यकाल में 20 लाख रुपये के शैंपू और बॉडीवॉश खरीदे गए, लेकिन उनका उपयोग नहीं हुआ। यह मामला उजागर होने के बाद कॉलेज प्रशासन में खलबली मच गई है। इन सैंपों को रिसर्च के लिए मंगवाया गया था जानकारी के अनुसार, बेड सोर से पीड़ित मरीजों को साफ-सुथरा रखने और संक्रमण से बचाने के उद्देश्य से वाटरलेस शैंपू और बॉडीवॉश मंगाए गए थे। अलग-अलग मरीजों पर इनके उपयोग के जरिए यह अध्ययन भी किया जाना था कि कौन-सा उत्पाद अधिक उपयुक्त है। हालांकि खरीद के बाद इस दिशा में कोई कार्य नहीं हुआ। खरीद के समय के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा का 16 जनवरी 2026 को तबादला हो गया। इसके बाद से यह सवाल उठ रहा है कि सामान का उपयोग क्यों नहीं किया गया। क्या गंभीर मरीज अस्पताल में नहीं आ रहे थे या उन्हें यह सुविधा उपलब्ध ही नहीं कराई गई। खरीद प्रक्रिया में कई अधिकारी शामिल खरीद प्रक्रिया में इमरजेंसी ट्रॉमा इंचार्ज, प्रभारी अधिकारी सेंट्रल स्टोर, क्रय अधिकारी (जेम बायर), वित्त नियंत्रक और प्राचार्य की सहमति शामिल रही। 7 महीने बाद भी मरीज को नहीं मिल रहा प्रभारी अधिकारी केंद्रीय भंडार की ओर से 9 सितंबर 2025 को प्रमाणित किया गया कि बीजक में दर्शाया गया सामान सही गिनती में प्राप्त हुआ। इसके बाद से सामान गोदाम में ही पड़ा है। जिन मरीजों के लिए यह खरीदा गया, उन्हें आज तक इसका लाभ नहीं मिला। प्राचार्य ने दिए जांच के संकेत मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मार्तोलिया ने बताया कि गोदाम में शैंपू और बॉडीवॉश रखे होने की जानकारी मिली है। इतनी बड़ी मात्रा में खरीद क्यों की गई, इसकी जांच कराई जाएगी। यदि जरूरत नहीं थी तो खरीद क्यों हुई, इसके लिए कमेटी गठित कर क्रय प्रक्रिया की जांच कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि सरकारी धन की बर्बादी के मामले धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। अब 20 लाख रुपये की लागत से वाटरलेस शैंपू और बॉडीवॉश खरीद का प्रकरण चर्चा में है। इनकी खरीद तत्कालीन प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा के कार्यकाल में की गई थी। आरोप है कि उस समय दवाओं की कमी थी और मरीज परेशान थे। कई रोगियों को महंगे दामों पर मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही थीं, बावजूद इसके शैंपू और बॉडीवॉश की बड़ी मात्रा में खरीद कर ली गई। फरवरी 2025 में भेजा गया था डिमांड लेटर फरवरी 2025 में ट्रॉमा सेंटर इंचार्ज ने प्राचार्य को डिमांड लेटर भेजा था, जिसमें मेडिकल कॉलेज दर्शननगर के विभिन्न विभागों में गंभीर मरीजों के उपचार के लिए सामग्री की आवश्यकता बताई गई। इसी मांग में 100 एमएल के दो हजार वाटरलेस बॉडीवॉश और दो हजार 200 वाटरलेस शैंपू शामिल किए गए। सिर्फ पांच दिन बाद 27 फरवरी को जेम पोर्टल के माध्यम से कलेंस्टा इंटरनेशनल कंपनी से खरीद प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इसमें वाटरलेस बॉडीवॉश 499 रुपये प्रति पीस और शैंपू 449 रुपये प्रति पीस की दर से कुल 4200 पीस खरीदे गए। कुल लागत 19 लाख 76 हजार रुपये आई, जिसका भुगतान मानक मद-20 सहायता अनुदान सामान्य गैर-वेतन से किया गया। इसके बावजूद आज तक यह सामान गोदाम के एक कोने में पड़ा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह खरीद उस समय की गई, जब मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी के कारण मरीज परेशान थे और उन्हें बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही थीं।
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