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    अयोध्या मंडल में 'अमृत सरोवर' योजना बेपटरी:2323 में से 866 तालाब सूखे, भूजल बचाने की जगह ट्यूबवेल से भरे जा रहे सरोवर

    3 hours ago

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    जल संकट से निपटने और भूगर्भ जल स्तर बढ़ाने के लिए शुरू की गई 'अमृत सरोवर' योजना अयोध्या मंडल में सरकारी खानापूर्ति का शिकार हो गई है। मंडल के पांचों जिलों में बने 2323 अमृत सरोवरों की मौजूदा हालत जल संचयन के दावों की पोल खोल रही है। इनमें से 866 सरोवर पूरी तरह सूखे पड़े हैं। योजना का मूल उद्देश्य बारिश का पानी रोककर भूजल रिचार्ज करना था, लेकिन हकीकत में अधिकारी ट्यूबवेल और नहरों से पाताल का पानी निकालकर सरोवरों को 'भरा' दिखाने में जुटे हैं। यह न केवल प्राकृतिक संसाधनों के साथ मजाक है, बल्कि प्रशासनिक अदूरदर्शिता का भी प्रमाण है। अधिकारी वैज्ञानिक और पर्यावरणीय पहलुओं को भूलकर सिर्फ कागजी लक्ष्य पूरा करने में लगे हैं। नियम के मुताबिक इन सरोवरों को वर्षा जल से भरना था। इसके लिए इनलेट और आउटलेट की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए थी, लेकिन ज्यादातर जगहों पर इंजीनियरिंग की भारी खामियां हैं। बारिश का पानी सरोवर तक पहुंचाने का इंतजाम करने के बजाय नलकूपों से पानी भरवाया जा रहा है। जहां नहर नहीं है, वहां सरोवर के किनारे बोरिंग कराकर पानी भरा जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारियों को सरोवर भरवाने के निर्देश दिए हैं। अयोध्या में 61 सरोवरों में जबरन पानी भरवा दिया गया है, जबकि जिले के 241 अमृत सरोवरों में से 180 सूखे हैं। सुल्तानपुर में 337 में से 317, अमेठी में 225 में से 140, बाराबंकी में 261 में से 92 और अंबेडकरनगर में 393 में से 137 तालाब सूखे पड़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्यूबवेल से तालाब भरना पूरी तरह तर्कहीन है। भूगर्भ जल स्तर पहले से चिंताजनक स्थिति में है और ऊपर से उसे निकालकर सरोवर में डालना संकट को और बढ़ाएगा। अधिकारियों ने 'अमृत सरोवर' को महज एक इवेंट बना दिया है, जिसका मकसद फोटो खिंचवाना और फाइलों में लक्ष्य पूरा दिखाना रह गया है। जल संरक्षण की यह योजना अब खुद जल दोहन का जरिया बन गई है।
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