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    बच्चे का कातिल 12 घंटे तक झूठ बोलता रहा:गोरखपुर पुलिस से कहा- मैं उसे डरा रहा था और मौत हो गई; बचने के लिए लाश छिपाई

    2 hours ago

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    मैं बच्चे को डरा रहा था और उसकी मौत हो गई…। गोरखपुर में सराफा कारोबारी के 10 साल के पोते वैभव का हत्यारोपी 12 घंटे तक झूठ बोलकर पुलिस को चकमा देता रहा। सोमवार की रात करीब 11 बजे पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया। मंगलवार सुबह 11 बजे आरोपी ने अपने ही घर से बच्चे की लाश बरामद कराई थी। जब CCTV और अन्य सबूत से उसका भेद खुला तो चीखकर रोने लगा। बोला- मैं तो बच्चे को डरा रहा था, लेकिन उसकी मौत हो गई। बचने के लिए लाश बेसमेंट में छिपा दी थी। गोरखपुर के खजनी के रूद्रपुर सीबी सिंह गली निवासी वैभव हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपी सर्वेश कुमार भट्ट उर्फ बिट्टू को बुधवार को कोर्ट में पेश करने के बाद जिला जेल भेज दिया गया। इसके साथ ही पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ाते हुए आरोपी के परिजनों, करीबी लोगों की भूमिका की गहन जांच शुरू कर दी है। 7 लोगों से पूछताछ के आधार पर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात की साजिश या उसके बाद सबूत छिपाने में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही या नहीं। पुलिस का दावा है कि सबूत तेजी से जुटाए जा रहे हैं और एक सप्ताह के अंदर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी है। पुलिस पूरे केस का सीन रीक्रिएट करेगी एसपी उत्तरी दिनेश कुमार पुरी ने बताया कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। वैज्ञानिक सबूतों को और मजबूत करने के लिए आरोपी से घटनास्थल का सीन रीक्रिएशन भी कराया जाएगा। इससे हत्या की पूरी कड़ी और घटनाक्रम का तकनीकी सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद विवेचना को अंतिम रूप देकर समयबद्ध तरीके से आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। जांच के दौरान पुलिस आरोपी के पिता हरि नारायण शर्मा, भाई सतीश, भाई की पत्नी बबली, पत्नी अनामिका, दो बच्चों और सरया गांव निवासी संदीप से पूछताछ कर रही है। संदीप के पिता हरि नारायण करीब 12 साल पहले खजनी थाने में रसोइए के रूप में कार्यरत थे। पुलिस यह भी जांच रही है कि वारदात की योजना बनाने, उसे अंजाम देने या बाद में किसी तरह की मदद करने में परिवार या अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका रही या नहीं। मुख्यमंत्री से गुरु पूर्णिमा के कारण नहीं हो सकी मुलाकात मृतक वैभव के परिजनों की मुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात बुधवार को नहीं हो सकी। मंगलवार शाम महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने परिवार से मुलाकात कर मुख्यमंत्री से मिलवाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद वैभव के बड़े पिता भृगुनाथ वर्मा, पिता हनुमान प्रसाद, बाबा लक्ष्मी नारायण वर्मा, दोनों बुआ राधिका और सुनीता वर्मा मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे, लेकिन गुरु पूर्णिमा के कार्यक्रमों में व्यस्तता के कारण मुलाकात नहीं हो सकी। परिवार को 3 दिन बाद दोबारा मिलने के लिए बुलाया गया है। परिजनों का कहना है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात में वे निष्पक्ष और जल्द जांच, आरोपी के पूरे परिवार की भूमिका की जांच, आरोपी के मकान पर कार्रवाई, दोषी को फांसी की सजा दिलाने की मांग रखेंगे। परिवार का कहना है कि जब तक पूरे मामले की हर कड़ी सामने नहीं आती, तब तक उन्हें न्याय मिलने का भरोसा नहीं होगा। इस संबंध में एसपी साउथ दिनेश कुमार पुरी ने बताया कि विवेचना में सामने आने वाले हर तथ्य का वैज्ञानिक और कानूनी आधार पर परीक्षण किया जा रहा है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की मिलीभगत के सबूत मिलते हैं तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। खजनी कस्बे में शोक का माहौल सराफा व्यापारी हनुमान वर्मा के छोटे बेटे वैभव की हत्या के बाद बुधवार को खजनी कस्बे में शोक और गुस्से का माहौल बना रहा। एक ओर अयोध्या में वैभव का अंतिम संस्कार हुआ तो दूसरी ओर आरोपी के मोहल्ले में पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। सराफा बाजार में भी अधिकांश दुकानें बंद रहीं। परिजन जहां नम आंखों से वैभव को अंतिम विदाई देकर न्याय की मांग दोहराते रहे, वहीं व्यापारियों ने आरोपी के पूरे परिवार की भूमिका की जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग उठाई। अयोध्या में किया दाह संस्कार मंगलवार शाम 7:32 बजे पोस्टमॉर्टम के बाद वैभव का शव घर पहुंचा। अंतिम दर्शन के लिए देर रात तक रिश्तेदारों, व्यापारियों और आसपास के गांवों से लोगों का आना-जाना लगा रहा। घर में मातम का माहौल था और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। रात 12:20 बजे शव अयोध्या के लिए रवाना किया गया, जहां बड़े भाई आकाश ने शाम करीब 4 बजे वैदिक रीति-रिवाज से मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में शुभचिंतक भी मौजूद रहे। इससे पहले मंगलवार रात गोरखपुर के मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने मृतक के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी। 4 पॉइंट में पूरा मामला समझिए- 1- मासूम चौथी कक्षा में पढ़ता था, डेढ़ महीने पहले मां का निधन खजनी कस्बे में लक्ष्मी नारायण वर्मा रहते हैं। उनकी गिनती इलाके के बड़े ज्वेलरी कारोबारियों में होती है। लक्ष्मी नारायण के बेटे हनुमान का सबसे छोटा बेटा वैभव नवेल्स एकेडमी में चौथी कक्षा में पढ़ता था। डेढ़ महीने पहले वैभव की मां श्वेता वर्मा का बीमारी से निधन हो गया था। वैभव का घर जिस गली में है, उसी गली के आखिरी छोर पर 20 मीटर दूर आरोपी सर्वेश का भी घर है। सर्वेश के पिता हरिनारायण की कपड़े की दुकान है। बड़ा भाई सतीश वकील है। सर्वेश खुद एक कंप्यूटर कोचिंग चलाता है, जहां डिप्लोमा कोर्स और TET की तैयारी कराई जाती है। 2- घर से साइकिल लेकर निकला, लेकिन लौटा नहीं सोमवार दोपहर 1:30 बजे वैभव स्कूल से लौटा। घर पहुंचकर बैग रखा और यूनिफॉर्म बदलकर साइकिल लेकर घर से निकल गया। 30 मिनट बाद एक पड़ोसी ने घर आकर बताया कि वैभव की साइकिल घर के पीछे पड़ी हुई है। दादी घर से 50 मीटर दूर पहुंचीं, लेकिन वैभव नहीं दिखा। आसपास तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। दादी ने परिवार को सूचना दी। जहां साइकिल मिली थी, उससे 100 मीटर दूर खाली खेत में वैभव की एक चप्पल पड़ी हुई थी। 3- CCTV में आरोपी बच्चे के साथ जाता दिखा परिवार को अपहरण का शक हुआ। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने तत्काल पांच टीमें गठित कीं। एक टीम ने CCTV फुटेज खंगालने शुरू किए। इस बीच पुलिस को एक CCTV फुटेज में वैभव पड़ोसी सर्वेश भट्ट के साथ खेत की ओर जाता दिखाई दिया। पुलिस ने सर्वेश को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। 4- शव मिलने के बाद गुस्साई भीड़ थाने में घुस गई वैभव के शव का पोस्टमार्टम मंगलवार को दो डॉक्टरों के पैनल ने किया। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वैभव की गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। पोस्टमार्टम के बाद बच्चे का शव एंबुलेंस से घर भिजवाया गया। घटना के बाद नाराज भीड़ थाने में घुस गई। वहां लॉकअप में बंद आरोपी को बाहर निकालने की कोशिश की। पुलिस ने सख्ती बरतते हुए भीड़ को हटा दिया। संयुक्त परिवार का सबसे दुलारा था वैभव वैभव संयुक्त परिवार का सबसे छोटा और सबसे चहेता सदस्य था। परिवार के मुखिया लक्ष्मी नारायण वर्मा और उनकी पत्नी द्रौपदी देवी के पांच बेटे और तीन बेटियां हैं। दूसरे बेटे हनुमान प्रसाद वर्मा का सबसे छोटा बेटा होने के कारण वैभव पूरे परिवार का दुलारा था। बड़े चाचा त्रिभुवन वर्मा खजनी में व्यवसाय करते हैं। तीसरे चाचा डॉ. द्वारिका वर्मा एम्स में तैनात हैं, जबकि गौरीशंकर वर्मा की घंटाघर में दुकान है। उमाशंकर वर्मा भी पारिवारिक कारोबार से जुड़े हैं। तीनों बुआ राधिका, सुनीता और अंजली भी भतीजे की मौत से गहरे सदमे में हैं। परिजनों ने बताया कि हर वर्ष 11 फरवरी को वैभव का जन्मदिन पूरे परिवार के साथ मनाया जाता था। आरोपी सर्वेश कुमार भट्ट उर्फ बिट्टू के मोहल्ले में बुधवार को पूरे दिन सन्नाटा छाया रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए चार थानों की पुलिस तैनात रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी का स्वभाव पहले से ही अलग-थलग रहने वाला था। जेल से छूटने के बाद भी उसका आम लोगों से मेलजोल बेहद सीमित था। पड़ोसियों के अनुसार, वह बिना किसी से बातचीत के आता-जाता था। मोहल्ले के अधिकांश लोगों को यह भी जानकारी नहीं थी कि वह प्रयागराज में लेखपाल भर्ती परीक्षा में दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने के मामले में 45 दिन नैनी जेल में रह चुका था। ----------------------- ये खबर भी पढ़िए- कारोबारी के पोते की हत्या करके एक करोड़ फिरौती मांगी: 36 लाख का कर्ज चुकाना था ‘मुझ पर 36 लाख रुपए का कर्ज था। किस्त जमा न करने पर पिता ताने मारते थे। नालायक कहते थे। इससे परेशान होकर सराफा कारोबारी के बेटे के अपहरण की योजना बनाई। AI की मदद से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के बारे में जानकारी जुटाई। गैंग कैसे काम करता है? फिरौती कैसे मांगता है, यह समझा। इंटरनेट से 199 रुपए में कंबोडिया का मोबाइल नंबर खरीदा और उसी पर वॉट्सऐप अकाउंट बनाया।’ यह कबूलनामा है गोरखपुर में सराफा कारोबारी के 10 साल के पोते वैभव की हत्या के आरोपी कंप्यूटर टीचर सर्वेश उर्फ बिट्टू भट्ट का है। पढ़ें पूरी खबर…
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