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    मेरठ जेल में पति की कातिल 5 पत्नियां पछता रहीं:परिवार ने साथ छोड़ा, बच्चे की याद सता रहीं; जेल अधीक्षक ने बताई सलाखों में कैसी जिंदगी

    2 hours ago

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    मेरठ में पति को सांप से डसवाकर हत्या कराने की आरोपी दामिनी इन दिनों जिला जेल में बंद है। इसी जेल की महिला बैरक में नीले ड्रम हत्याकांड की आरोपी मुस्कान, पति की हत्या के आरोप में रविता, कोमल और अंजली भी बंद हैं। इन सभी पर अपने-अपने प्रेमियों के साथ मिलकर पति की हत्या करने का आरोप है। इन महिलाओं की दुनिया अब जेल की चारदीवारी तक सिमट गई है। दिन जेल की तय दिनचर्या, योग, काम, काउंसिलिंग और ट्रेनिंग में गुजरता है, जबकि रातें बच्चों और परिवार की याद में बीतती हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि समय के साथ इनमें अपने किए को लेकर पछतावा भी बढ़ा है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने इन महिला बंदियों की दिनचर्या, मानसिक स्थिति, बच्चों से जुड़ी व्यवस्था, काउंसिलिंग, स्वास्थ्य और जेल के अंदर की जिंदगी के बारे में विस्तार से बताया। पूरी रिपोर्ट पढ़िए… सवाल: जेल में पति की हत्या के आरोप में कितनी महिलाएं बंद हैं? जवाब: इस समय जेल में ऐसी पांच महिलाएं बंद हैं, जिन पर प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या करने का आरोप है। इनमें कोमल, मुस्कान, रविता, दामिनी और अंजली शामिल हैं। इससे पहले इसी तरह के मामलों में बंद कविता, सोनम और संगीता को जमानत मिल चुकी है। महिला बंदियों को उनकी स्थिति के अनुसार बैरकों में रखा जाता है। नई महिला बंदियों को 12ए और पुरानी बंदियों को 12बी बैरक में रखा जाता है। जेल में महिलाओं की कुल तीन बैरक हैं। इनमें से एक बैरक को ट्रेनिंग सेंटर बनाया गया है, जहां महिला बंदियों को सिलाई, कढ़ाई, कंप्यूटर की ट्रेनिंग दी जाती है। उनके लिए लाइब्रेरी की भी सुविधा है, जहां वे किताबें पढ़ सकती हैं। सवाल: जेल में महिला बंदियों की डेली रूटीन क्या है? जवाब: महिला और पुरुष, दोनों बंदियों की दिनचर्या लगभग एक जैसी होती है। सुबह 6 बजे अलार्म बजते ही सभी जग जाते हैं। सबसे पहले बंदियों की गिनती होती है। इसके बाद नित्यकर्म, योग, व्यायाम, स्नान और पूजा-पाठ कराया जाता है। फिर बंदियों की ड्यूटी शुरू होती है। रोटेशन के आधार पर किसी की ड्यूटी रसोई, किसी की सफाई और किसी की बगीचे की देखभाल में लगती है। नाश्ता भी बंदी ही तैयार करते हैं। सुबह 10 बजे तक सभी बंदी नाश्ता कर लेते हैं। इसके बाद मुलाकात का समय शुरू होता है। साथ ही ट्रेनिंग, पढ़ाई, सिलाई-कढ़ाई और अन्य काम चलते हैं। दोपहर का खाना भी ड्यूटी पर लगे बंदी तैयार करते हैं। सभी बंदी अपनी थाली लेकर खाना लेते हैं। भोजन के बाद फिर गिनती होती है और कुछ समय के लिए सभी अपनी बैरकों में आराम करते हैं। शाम 4 बजे चाय और बिस्किट दिए जाते हैं। इसके बाद दोबारा गिनती होती है। शाम को संध्या आरती और पूजा-पाठ होता है। रात का भोजन कराने के बाद अंतिम गिनती होती है और रात 9 बजे सभी बंदी अपनी-अपनी बैरकों में सोने चले जाते हैं। सवाल: क्या फिल्मों की तरह जेल में हर बंदी की अलग बैरक होती है? जवाब: नहीं, रियलटी फिल्मों से बिल्कुल अलग होती है। जेल में हर बंदी की अलग बैरक नहीं होती। इसे डोरमेट्री की तरह समझ सकते हैं, जहां कई बंदी एक साथ रहते हैं। छोटी बैरक में करीब 30 और बड़ी बैरक में लगभग 60 बंदी रहते हैं। वे वहीं सोते हैं, आपस में बातचीत करते हैं। मेरठ जिला जेल में महिलाओं की तीन बैरक हैं। इनमें दो बैरकों में महिला बंदियों को रखा गया है। इस समय कुल 61 महिला बंदी हैं। 12ए बैरक में 30 और 12बी बैरक में 31 महिलाएं हैं। पुरुष बंदियों के लिए 35 बैरक हैं। जेल का पूरा संचालन जेल मैन्युअल के नियमों और अनुशासन के अनुसार होता है। फिल्मों में दिखाई जाने वाली जेल रियल जेल से काफी अलग होती है। सवाल: महिला और पुरुष बंदियों से कौन-कौन से काम कराए जाते हैं? जवाब: महिला और पुरुष दोनों तरह के बंदी अपनी-अपनी बैरकों की साफ-सफाई, भोजन बनाना और बर्तन साफ करने जैसे काम करते हैं। इसके अलावा पुरुष बंदियों को सब्जियां उगाने, खेती करने, बागवानी और बैट बनाने जैसे भारी काम दिए जाते हैं। वहीं, महिला बंदियों को सिलाई, कढ़ाई, एंब्रॉयडरी और अन्य कौशल आधारित कार्यों की ट्रेनिंग और काम कराया जाता है। सवाल: क्या जेल में बंदियों की पढ़ाई-लिखाई की भी व्यवस्था होती है? जवाब: हां, जेल में बंदियों की शिक्षा की व्यवस्था है। यहां लाइब्रेरी और किताबें सब है। जो बंदी पढ़ना चाहते हैं, वे पढ़ सकते हैं। उनके लिए टीचर भी आते हैं। जो बंदी पहले से शिक्षित हैं, वे भी अन्य बंदियों को पढ़ाने में हेल्प करते हैं। महिला और पुरुष, दोनों बंदियों को यह सुविधा मिलती है। बंदियों को परीक्षाएं भी दिलाई जाती हैं। सवाल: जिन महिला बंदियों के छोटे बच्चे होते हैं, उनका क्या होता है? जवाब: इस समय मेरठ जिला जेल में 4 ऐसी महिला बंदी हैं, जिनके साथ उनके छोटे बच्चे रह रहे हैं। सभी बच्चों की उम्र छह साल से कम है। इनमें सबसे छोटा बच्चा मुस्कान की 6 महीने की बेटी है। छह साल तक का बच्चा अपनी मां के साथ जेल में रह सकता है। छह साल से अधिक उम्र होने पर बच्चे को बाल सुधार गृह या निर्धारित संस्थान में भेज दिया जाता है। पुरुष बंदियों के साथ बच्चों को रखने की अनुमति नहीं होती। सवाल: गर्भवती या डिलीवरी के बाद महिला बंदियों को क्या सुविधा मिलती है? जवाब: जेल नियमावली के अनुसार, सभी बंदियों को निर्धारित खाना दिया जाता है। जेल में यूज होने वाली अधिकांश सब्जियां और फल परिसर में ही उगाए जाते हैं। गर्भवती और नवप्रसूता महिलाओं को नियमों के अनुसार दूध, फल और अन्य आवश्यक पोषक आहार उपलब्ध कराया जाता है। उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच जेल की महिला डॉक्टर करती हैं। जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज के सरकारी डॉक्टर भी जांच करते हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं और अन्य चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। सवाल: पति की हत्या के आरोप में बंद महिलाओं को क्या अपने किए पर पछतावा होता है? जवाब: हां, ज्यादातर महिलाओं को अपने किए पर पछतावा होता है। जेल आने के बाद उन्हें अपने किए का एहसास होता है। काउंसलिंग के दौरान वे कई बार अपनी भावनाएं खुलकर शेयर करती हैं। परिवार से दूर होने और बच्चों की चिंता उन्हें सबसे ज्यादा परेशान करती है। हमारा प्रयास रहता है कि कौशल विकास प्रशिक्षण के जरिए उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद वे सम्मानजनक तरीके से अपना जीवनयापन कर सकें। बंदियों की मानसिक स्थिति बेहतर रखने के लिए नियमित रूप से योग, ध्यान, रामायण पाठ और भजन जैसे कार्यक्रम कराए जाते हैं। काउंसलर के साथ एक-एक कर होने वाली बातचीत में वे खुलकर अपनी बातें बताती हैं। कुल मिलाकर, उन्हें अपने किए पर पछतावा जरूर होता है। सवाल- ये महिलाएं सबसे ज्यादा किसे याद करती हैं? जवाब- ये महिलाएं सबसे ज्यादा अपने बच्चों को याद करती हैं। पति को मार चुकी हैं। परिवार इनसे ताल्लुक नहीं रखना चाहता। 5 में से कुल 3 महिलाओं के परिवार के लोग ही उनसे मिलने आते हैं। बाकी दामिनी, मुस्कान से मिलने कोई नहीं आया। अमूमन महिला बंदियों से उनका परिवार बातचीत नहीं करता। सवाल: मुस्कान जेल में क्या काम कर रही है? उसकी सेहत कैसी है? जवाब: मुस्कान के साथ उसकी 6 महीने की बेटी है, इसलिए उससे कोई काम नहीं कराया जा रहा। जेल नियमावली के अनुसार जिन महिला बंदियों के साथ छोटे बच्चे होते हैं, उन्हें काम से छूट दी जाती है। मुस्कान और उसकी बेटी दोनों स्वस्थ हैं। जेल आने के बाद मुस्कान की सेहत में काफी सुधार हुआ है। उसका वजन करीब 10 से 12 किलो बढ़ा है। उसका नशा भी पूरी तरह छूट चुका है। बच्ची की नियमित देखभाल, टीकाकरण और अन्य जरूरी सुविधाएं जेल प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही हैं। दोनों को जरूरत का सामान, कपड़े और अन्य आवश्यक चीजें भी दी जा रही हैं। सवाल: क्या जेल में रामायण पढ़ने और सुनने की भी व्यवस्था है? जवाब: हां। हाल ही में सांसद अरुण गोविल ने जेल के करीब 1500 बंदियों को रामायण की प्रतियां भेंट की थीं। इच्छुक बंदी इन्हें पढ़ते हैं। इसके अलावा सुबह और शाम जेल के रेडियो और कंट्रोल रूम से भजन, सुंदरकांड और अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी प्रसारित किए जाते हैं, जिन्हें सभी बंदी सुनते हैं। सवाल: पति की हत्या के आरोप में बंद महिलाओं के पास सरकारी वकील हैं या निजी? जवाब: मुस्कान की शुरुआत से ही सरकारी वकील पैरवी कर रहे हैं। अन्य महिलाओं में कुछ के पास निजी वकील हैं। दामिनी ने भी अपने लिए निजी वकील करने की इच्छा जताई है। जेल प्रशासन हर बंदी से पूछता है कि उसे सरकारी वकील की जरूरत है या नहीं। जरूरत होने पर सरकारी वकील उपलब्ध कराया जाता है। सवाल: दामिनी का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ है? क्या वह अपने बेटे को याद कर रही है? जवाब: दामिनी का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण हो चुका है और उसकी स्थिति सामान्य है। जेल प्रोटोकॉल के तहत स्वास्थ्य विभाग की महिला डॉक्टर उसका विस्तृत परीक्षण करेंगी। जरूरत पड़ने पर उसे अन्य जांचों के लिए अस्पताल भी भेजा जाएगा। दामिनी अपने छह साल के बेटे को बहुत याद कर रही है। जेल आने के बाद से वह उससे मिलना और बात करना चाहती है, लेकिन अब तक परिवार का कोई सदस्य उससे मिलने नहीं आया है। सवाल: पति की हत्या के आरोप में बंद महिलाओं के प्रेमी भी इसी जेल में हैं। क्या उनकी मुलाकात होती है? जवाब: नहीं। जेल नियमावली के अनुसार मुलाकात केवल पति-पत्नी या रक्त संबंधियों से ही कराई जाती है। प्रेमी-प्रेमिका या अन्य गैर-रिश्तेदारों को मुलाकात की अनुमति नहीं होती। इसलिए मुस्कान-साहिल, दामिनी-तुषार, रविता-अमरदीप या अन्य किसी आरोपी की आपस में मुलाकात नहीं हो सकती। केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेशी के दौरान, जब सभी न्यायाधीश के सामने उपस्थित होते हैं, तब कुछ क्षण के लिए एक-दूसरे को देख पाते हैं। सवाल: टूटते वैवाहिक रिश्तों और ऐसे मामलों को देखकर आपको दुख होता है? जवाब: व्यक्तिगत तौर पर ऐसे मामले देखकर बहुत दुख होता है। किसी भी व्यक्ति को किसी की जान लेने का अधिकार नहीं है। इन घटनाओं का असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज पर पड़ता है। विवाह जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था के प्रति लोगों की सोच नकारात्मक होती जा रही है। रिश्तों में धैर्य और समझ कम हो रही है, जिससे परिवार टूट रहे हैं। अगर पति-पत्नी साथ नहीं रहना चाहते तो कानूनी तरीके से अलग हो सकते हैं, लेकिन हत्या जैसा अपराध किसी समस्या का समाधान नहीं है। ऐसे मामलों में एक व्यक्ति की जान चली जाती है और दूसरा जेल पहुंच जाता है। सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को उठाना पड़ता है। उनके भविष्य और मानसिक स्थिति पर इसका गहरा असर पड़ता है। यह सब देखकर वास्तव में पीड़ा होती है। सवाल: हाल के वर्षों में पति की हत्या के मामलों में नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। इसे आप कैसे देखते हैं? जवाब: मेरी नजर में इसके पीछे कई कारण हैं। सोशल मीडिया का प्रभाव भी एक बड़ा कारण है। आज रिश्तों में सहनशीलता पहले की तुलना में कम होती जा रही है। छोटी-छोटी बातों पर लोग बड़े फैसले ले लेते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध होने की चाह भी कई लोगों की सोच को प्रभावित कर रही है। कुछ लोग कुछ हजार लाइक या फॉलोअर्स मिलने पर खुद को बहुत बड़ा मानने लगते हैं। अहंकार और जल्दबाजी में लिए गए फैसले कई बार लोगों को अपराध की राह पर ले जाते हैं। --------------------------- ये खबरें भी पढ़िए- पति को सांप डसवाने वाली मेरठ की दामिनी की लवस्टोरी, पहली नजर में प्यार, घरवालों से लड़कर शादी; फिर ड्राइवर के लिए हत्या मेरठ में दामिनी ने जिस पति को सांप से डसवाया, एक समय वह उसे बेइंतहा प्यार करती थी। 7 साल पहले दोनों ने परिवार के खिलाफ जाकर लव मैरिज की। एक बेटा भी हुआ। सब कुछ अच्छा चल रहा था। फिर ऐसा क्या हुआ कि दामिनी को अतुल की हत्या करनी पड़ी? पुलिस, दामिनी-अतुल के घरवालों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों से बातचीत में जो कहानी सामने आई। पढ़ें पूरी खबर… पति को सांप डसवाने वाली बोली-ऐसी हत्या करो, नेचुरल लगे: गूगल पर जहरीला सांप खोजा; बॉयफ्रेंड से कहा- फंसने वाला काम मत करना मेरठ में पति को सांप से डसवाने वाली दामिनी की कहानी के पहले पार्ट में आपने उसके और पति अतुल के अफेयर के बारे में पढ़ा। दामिनी की लाइफ में कैसे शादीशुदा बॉयफ्रेंड तुषार की एंट्री होती है? दूसरे और आखिरी पार्ट में पढ़िए…कैसे दामिनी और तुषार ने सपेरों से डील की। हत्या को नेचुरल मौत दिखाने की साजिश रची… पढ़ें पूरी खबर…
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