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    बागी पार्षदों ने 15वें वित्त के बजट का मांगा ब्योरा:नगर आयुक्त को पत्र दिया, बजट वितरण में भेदभाव का लगाया आरोप

    8 hours ago

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    कानपुर नगर निगम के बागी पार्षदों ने सोमवार को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय को ज्ञापन सौंपकर 14वें वित्त, 15वें वित्त और पार्षद कोटा के बजट वितरण में भेदभाव का आरोप लगाया है। पार्षदों का कहना है कि उनके क्षेत्रों को विकास कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि नहीं दी गई, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और जनता उनके कामकाज पर सवाल उठा रही है। पार्षद विकास जायसवाल, आलोक पांडेय, लक्ष्मी कोरी और पवन गुप्ता ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि 14वें और 15वें वित्त आयोग के तहत नगर निगम को करोड़ों रुपये की धनराशि प्राप्त हुई थी और उसका वितरण भी किया गया, लेकिन कई पार्षदों को उनके हिस्से का बजट नहीं दिया गया। उनका कहना है कि यह नियमों के खिलाफ है और जनता के साथ धोखा है। उन्होंने बजट वितरण की पूरी लिस्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। अधिकारियों पर पक्षपात का लगाया आरोप पार्षद विकास जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 14वें और 15वें वित्त आयोग के तहत नगर निगम को विकास कार्यों के लिए धनराशि दी जाती है। सामान्यतः सभी पार्षदों को बराबर-बराबर धनराशि आवंटित की जाती है, लेकिन कानपुर नगर निगम में कुछ पार्षदों को पक्षपात करके बजट जारी कर दिया गया, जबकि कई पार्षदों को 14वें और 15वें वित्त की राशि नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इससे उनके क्षेत्रों में सड़क, नाली, जल निकासी और अन्य विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। उन्होंने नगर आयुक्त से मांग की कि जिन पार्षदों को बजट दिया गया है और जिन्हें नहीं दिया गया है, उसकी लिस्ट सार्वजनिक की जाए। बजट वितरण में पारदर्शिता नहीं- आलोक पांडेय वहीं पार्षद आलोक पांडेय ने बताया कि नगर आयुक्त को पत्र लिखकर 14वें और 15वें वित्त आयोग के बजट वितरण का पूरा विवरण मांगा गया है। साथ ही पार्षद कोटा की सूची उपलब्ध कराने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि बजट वितरण में पारदर्शिता नहीं होने से जनता के बीच गलत मैसेज जा रहा है। 14वें और 15वें वित्त आयोग के व्यय का मांगा ब्योरा वहीं पार्षद पवन गुप्ता ने कहा कि साल 2017-18 से अब तक 14वें और 15वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त धनराशि, उसके वितरण और व्यय का पूरा ब्योरा नगर आयुक्त को पत्र देकर मांगा गया है। उन्होंने कहा कि अगर बजट वितरण में भेदभाव हुआ है तो इसकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। बागी पार्षदों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वह कोर्ट जाएंगे।
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