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    भागवत बोले- हल्दीघाटी युद्ध महाराणा प्रताप जीते, लेकिन चर्चा उल्टी:इतिहासकारों ने ऐसा नैरेटिव बनाया; अकबर की जयंती कहीं नहीं मनाई जाती

    7 hours ago

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    उदयपुर में राष्ट्र चेतना संकल्प सभा में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध को लेकर इतिहासकारों ने केवल नैरेटिव बनाया। युद्ध में केवल जीत महाराणा प्रताप की हुई थी। मुगलों के ही इतिहासकार लिखते हैं कि मुगलों को पीछे खिसकना पड़ा। फिर विजय किसकी हुई? हल्दीघाटी में विजय का ही परिणाम है कि आज महारणा प्रताप की जयंती मनाई जा रही है, अकबर की जयंती कोई नहीं मनाता है। दरअसल, महाराणा प्रताप की जयंती 486वीं जयंती और हल्दीघाटी विजय के 450 साल पूरे होने पर उदयपुर में तीन दिवसीय कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज उदयपुर के गांधी ग्राउंड में सभा का आयोजन किया गया। इसमें आरएसस प्रमुख के अलावा सीएम भजनलाल शर्मा वे अन्य भाजपा नेता भी पहुंचे थे। कॉकारोच की बात पर मुस्कुराने लगे भागवत संकल्प सभा निम्बार्क पीठ के पीठाधीश्वर श्याम शरण देवाचार्य भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि आज कई लोग हमारी एकता को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे लिए राष्ट्र ही प्रथम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्मल कीचड़ से कमल का जन्म होता है। जबकि, मलयुक्त कीचड़ से केवल कॉकरोच का जन्म होता है। हमें ध्यान रखना होगा कि हमें केवल निर्मल कमल की ओर ही बढ़ना होगा। पीठाधीश्वर के कॉकरोच की बात करने पर मोहन भागवत भी मुस्कुराने लगे। अब 3 पॉइंट में समझिए- RSS प्रमुख का भाषण 1. प्रताप या सेना नहीं, पूरा समाज लड़ा: सरसंघचालक ने कहा- आज हम राणा प्रताप की जयंती मनाते है, आपने कभी सुना कि कहीं अकबर की कोई जयंती है? हल्दीघाटी युद्ध में केवल प्रताप या सेना ही नहीं यहां पूरा समाज लड़ा। सेना और शस्त्र से तो अकबर का पलड़ा भारी था। प्रताप के पास धन कम था, शस्त्र कम थे। हम भारत के लोग कभी गुलाम नहीं होते। 2. इतिहासकारों ने गलत लिखा: हल्दीघाटी के युद्ध में विजय केवल महाराणा प्रताप की हुई थी। मुगल इतिहासकारों ने भी लिखा है कि- हम भाग गए थे। केवल हाथी मिला था। तीन हमलों के तथ्यों से ये समझा जा सकता है कि हमले में मुगल सेना के साथ क्या हुआ था। धन-बल कम होने के बाद भी प्रताप की सेना जीती थी। इतिहासकारों ने गलत लिखा। 3. हमारा इतिहास गुलामी का नहीं: भागवत ने कहा- कोई आक्रांता हमारी भूमि में पैर रखता, उस दिन से उसको हटाने के प्रयास शुरू हो जाते हैं। हमारा इतिहास गुलाम का नहीं है, हमारा इतिहास गुलाम करने वालों के खिलाफ संघर्ष का है। वो जो आंधी चलकर आई थी, स्पेन से साइबेरिया तक अपना सिक्का जमाया। लेकिन बप्पा रावल, ललितादित्य जैसे लोगों के कारण वो आंधी अंदर नहीं आ सकी थी। अब देखिए- आज के कार्यक्रम से जुड़े PHOTOS ये खबर भी पढ़िए… महाराणा प्रताप ने नहीं खायी थी घास की रोटी:अकबर ने ले लिया पसंदीदा हाथी 'रामप्रसाद'; पढ़िए- वीर शिरोमणि के 5 अनसुने किस्से
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