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    भूमि विवाद में किसान पर कार्रवाई का आरोप:भाकियू अराजनीतिक ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला; 6 जुलाई को महापंचायत

    13 hours ago

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    बिजनौर के नजीबाबाद क्षेत्र के गांव आलोपुर में भूमि विवाद और उससे जुड़े आत्महत्या प्रकरण को लेकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) ने नगीना सांसद चंद्रशेखर और जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनियन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में किसान परिवार के साथ अन्याय हो रहा है और राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की जा रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मामले का निष्पक्ष समाधान नहीं हुआ तो 6 जुलाई को नजीबाबाद में होने वाली महापंचायत से एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह घोषणा शुक्रवार को गत्रा समिति बिजनौर कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाकियू (अराजनीतिक) के राष्ट्रीय संरक्षक बाबा राजेंद्र मलिक, राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौ. मांगेराम त्यागी, प्रदेश उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह रंधावा, युवा प्रदेश अध्यक्ष चौ. दिगंबर सिंह, मुजफ्फरनगर जिलाध्यक्ष सुधीर पवार, मेरठ जिलाध्यक्ष कालू प्रधान, बिजनौर जिलाध्यक्ष नितिन सिरोही और प्रदेश उपाध्यक्ष अतुल बालियान सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। नेताओं ने आरोप लगाया कि गांव आलोपुर में दलित समाज के कुछ लोग एक किसान के खेत से जबरन रास्ता निकालने का प्रयास कर रहे थे। किसान की शिकायत पर लेखपाल ने जांच में भूमि किसान की बताते हुए वहां रास्ता बनाने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद विवाद जारी रहने पर किसान ने सिविल कोर्ट से स्थगन आदेश (स्टे) भी प्राप्त कर लिया था। भाकियू नेताओं का आरोप है कि इसी बीच दलित समाज के एक व्यक्ति ने कथित रूप से जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की जेब से मिले कथित सुसाइड नोट में एसडीएम, कोतवाल और किसान परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज थे। इसके बावजूद पुलिस ने किसान परिवार के नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर एक व्यक्ति को जेल भेज दिया, जबकि सुसाइड नोट में नामजद प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। यूनियन नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर मुकदमा दर्ज किया है तो उसमें नामजद अन्य अधिकारियों को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। उन्होंने मांग की है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। आत्महत्या के लिए कथित रूप से उकसाने इस अवसर पर संगठन ने 6 जुलाई को नजीबाबाद में पंचायत में लगभग 20 हजार किसान शामिल होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि किसान परिवार खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस नहीं लिया गया और किसान को बिना शर्त रिहा नहीं किया गया तो महापंचायत की जायेगी किसान नेताओ ने जिम्मेदार अधिकारियों कोदेते चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह निष्पक्ष कार्रवाई नही कर सकते तो अपना तबादला करा लेना चाहिए। पत्रकार वार्ता के दौरान कुछ नेताओं ने सांसद और प्रशासन के खिलाफ तीखी टिप्पणियां भी कीं।
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