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    भारतीय मजदूर संघ ने 18 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा:श्रम कानूनों में संशोधन सहित कई मांगों पर देशव्यापी प्रदर्शन

    2 hours ago

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    भारतीय मजदूर संघ ने श्रम कानूनों में संशोधन सहित 18 सूत्रीय मांगों को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन किया। इसी क्रम में गाजीपुर में जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार को एक ज्ञापन सौंपा गया। यह प्रदर्शन संघ के 21वें अखिल भारतीय त्रिवार्षिक अधिवेशन में पारित प्रस्तावों के समर्थन में आयोजित किया गया। संघ का 21वां अखिल भारतीय त्रिवार्षिक अधिवेशन 6, 7 और 8 फरवरी 2026 को पुरी में संपन्न हुआ था। इसमें देशभर से आए प्रतिनिधियों ने श्रमिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और सर्वसम्मति से कई प्रस्ताव पारित किए। अधिवेशन से पहले, संघ के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री को ज्ञापन सौंपकर श्रम कानूनों को बिना किसी छूट के सभी सेक्टरों में लागू करने की मांग की थी। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020 में संशोधन, त्रिपक्षीय तंत्र का पुनर्गठन तथा इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस बुलाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। संघ ने ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन 1000 से बढ़ाकर 7500 रुपये प्रतिमाह महंगाई राहत के साथ लागू करने, ईपीएफ व ईएसआईसी की वेतन सीमा बढ़ाने और बोनस भुगतान अधिनियम 1965 की पात्रता सीमा में वृद्धि की भी मांग की। संघ ने संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 की भावना के अनुरूप स्कीम वर्करों व ठेका श्रमिकों को स्थायी करने, सामान्य भर्ती पर लगी रोक हटाने और गारंटीड रोजगार सुनिश्चित करने की मांग की है। इन मांगों के समर्थन में 25 फरवरी 2026 को देशव्यापी धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। गाजीपुर में सौंपे गए 18 सूत्रीय ज्ञापन में आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और उनके मानदेय में वृद्धि करने की मांग शामिल थी। इसमें एनएचएम संविदा कर्मियों की बीमा व वेतन विसंगतियों का समाधान, बैंकिंग क्षेत्र में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने और सहकारी बैंकों में वेतनमान पुनरीक्षण जैसी मांगें भी उठाई गईं। ज्ञापन में संविदा व आउटसोर्सिंग कर्मियों के लिए नियमावली बनाने, सफाई कर्मचारियों को 18 हजार रुपये वेतन व नियमितीकरण प्रदान करने की मांग की गई। इसके अलावा, 108 व 102 एंबुलेंस के बर्खास्त कर्मियों की बहाली, पटरी-रेहड़ी व ई-रिक्शा चालकों को स्थायी स्थान व सामाजिक सुरक्षा देने, दिहाड़ी व ग्रामीण मजदूरों के पारिश्रमिक निर्धारण, मिड-डे मील कर्मचारियों का मानदेय 10 हजार रुपये करने और पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग भी शामिल थी। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार को महंगाई, बेरोजगारी और असुरक्षा से जूझ रहे मजदूरों के हित में शीघ्र सकारात्मक पहल करनी चाहिए, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
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