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    BHU लगाएगा भैंसों का जेनेटिक इतिहास:किस रास्ते यूरोप-पश्चिम एशिया तक पहुंचीं भैंसें,ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में शोधार्थी ने किया अध्ययन

    1 hour ago

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    विश्व में पहली बार बीएचयू के शोधार्थी शैलेश भैंस के विस्थापन पर शोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत से भैंस को इराक, ईरान, मिस्र और इटली में कब और किन रास्तों से ले जाया गया। इस शोध के पीछे उनकी वजह यह है कि यदि सही समय और रास्तों की जानकारी मिल जाती है, तो मानव सभ्यता के सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। ज्ञान लैब में कार्यरत शोध छात्र शैलेश देसाई ने यूनाइटेड किंगडम के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पांच महीने का शोध दौरा पूरा किया। यह दौरा अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 तक रहा, जिसके दौरान उन्होंने प्राचीन डीएनए तकनीकों का उपयोग कर एनिमल डोमेस्टिकशन के इतिहास पर अध्ययन किया। भैंस के जेनेटिक इतिहास का लगाएंगे पता ऑक्सफोर्ड के शोध मे शैलेश ने भैंस के जेनेटिक इतिहास पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में भैंसों की उत्पत्ति और डोमेस्टिकशन प्रक्रियाओं को समझने पर काम किया, साथ ही यह जांचा कि भैंसें पश्चिम एशिया में कब और कैसे पहुंचीं, जिसमें ईरान, इराक, इटली और मिस्र जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य भारतीय उपमहाद्वीप और पश्चिम एशिया के बीच लंबे समय से समुद्री संपर्कों की ओर इशारा करते हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में भैंसों की पहुंच का समय और आनुवंशिक विशेषताएं अभी तक अबूझ पहेली हैं। टीम ने नदी और दलदली जगहों का लिया सैम्पल इसके अलावा, उन्होंने नदी और दलदली जगहों पर रहने वाली भैंसों की जेनेटिक इतिहास की जांच की, जिसमें पूर्वी एशिया की आबादियां भी शामिल हैं। शोध यात्रा के दौरान, उन्होंने प्रोफेसर लार्सन की प्राचीन डीएनए प्रयोगशाला में डीएनए डेटा उत्पन्न किया। प्राचीन डीएनए अनुसंधान में पुरातात्विक और ऐतिहासिक नमूनों जैसे हड्डियों, बालों और त्वचा से आनुवंशिक सामग्री निकालना शामिल होता है, जिसके लिए विशेष प्रयोगशाला सुविधाओं की आवश्यकता होती है। उनका शोध भारत में एनिमल पैलियोजेनोमिक्स को आस्थापित करने मे मदद करेगा।
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