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    BHU में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस:राजघाट उत्खनन के पुरावशेष होंगे आकर्षण, बनारस पर आधारित गैलरी को किया जाएगा शुरू

    1 hour ago

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    अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर बीएचयू परिसर स्थित भारत कला भवन में सोमवार को कला, इतिहास और संस्कृति से जुड़े विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संग्रहालय परिसर में चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें 16 से 25 वर्ष आयु वर्ग के 25 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मक कल्पनाओं को कैनवास पर उकेरकर कला के विविध रंग प्रस्तुत किए। वहीं, बीएचयू के कला संकाय एवं वेल बीइंग सर्विसेज सेल की ओर से चयनित विद्यार्थियों के लिए ‘क्यूरेटेड वॉक’ का आयोजन किया गया। संग्रहालय के सहायक संग्रहाध्यक्ष डॉ. दीपक भरथन अलाथुर के मार्गदर्शन में छात्रों को संग्रहालय की दुर्लभ कलाकृतियों और ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी दी गई। ‘बनारस गैलरी’ बनेगी नई पहचान कार्यक्रम के दौरान भारत कला भवन प्रशासन ने संग्रहालय में जल्द ही ‘बनारस गैलरी’ शुरू किए जाने की जानकारी भी दी। संग्रहालय के असिस्टेंट डायरेक्टर प्रो. निशांत ने बताया कि संग्रहालय की दूसरी मंजिल पर स्थित एक पुराने बंद हिस्से की मरम्मत के बाद उसे ‘बनारस गैलरी’ के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बनारस स्वयं में एक जीवंत संग्रहालय है, जहां प्राचीनता और आधुनिकता साथ-साथ दिखाई देती है। नई गैलरी में प्राचीन काशी से लेकर आधुनिक बनारस तक की सांस्कृतिक यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा। राजघाट उत्खनन के पुरावशेष होंगे आकर्षण प्रस्तावित गैलरी में राजघाट उत्खनन से प्राप्त दुर्लभ पुरावशेषों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। जानकारी के अनुसार राजघाट में पहला उत्खनन वर्ष 1940 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किया गया था, जबकि 1960 से 1969 के बीच बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग ने व्यापक खुदाई कराई थी। खुदाई में मिले मिट्टी के बर्तन, प्राचीन मुहरें और अन्य अवशेषों से यह प्रमाणित हुआ कि यह क्षेत्र 8वीं शताब्दी ईसा पूर्व से 18वीं शताब्दी ईस्वी तक लगातार आबाद रहा। यहां प्राप्त गुप्तकालीन ब्राह्मी लिपि की एक मुहर, जिस पर ‘वाराणसी-अधिष्ठानाधिकरणस्य’ अंकित है, विशेष महत्व रखती है। अब जानिए कैसे तैयार हुआ भारत कला भवन महामना की कर्मभूमि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में इस संग्रहालय की स्थापना 1 जनवरी 1920 को भारत कला परिषद के रूप में हुई थी। इसके प्रथम आजीवन सभापति महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर थे। वर्ष 1950 में यह बीएचयू का हिस्सा बन गया। इसमें हड़प्पा काल की वस्तुएं, प्राचीन मूर्तियां, दुर्लभ सिक्के, हस्तलिखित ग्रंथ, और 12वीं से 20वीं शताब्दी के बीच के भारतीय लघुचित्र शामिल हैं। यह संग्रहालय दो मंजिलों में बना है, जिसमें मुख्य रूप से भारतीय लघुचित्र, मूर्तिकला, प्रागैतिहासिक वस्तुएं, बीएचयू के संस्थापक की निजी वस्तुएं (मालवीय गैलरी), और वस्त्र-आभूषण की दीर्घाएँ शामिल हैं।
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