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    बृजभूषण शरण सिंह ने नानाजी देशमुख को श्रद्धांजलि दी:उनके कार्यों को नजदीक से देखने के कई अवसर मिले

    15 hours ago

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    चित्रकूट में भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भारत रत्न नानाजी देशमुख के आवास सियाराम कुटीर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने नानाजी के साथ बिताए पलों को याद किया। अपने चित्रकूट प्रवास के दौरान, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह सियाराम कुटीर स्थित नानाजी के कक्ष में गए और उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने कुछ देर कक्ष में बैठकर नानाजी से जुड़ी अपनी पुरानी यादें साझा कीं। दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ता निखिल मिश्रा ने रोली-टीका और गमछा भेंट कर उनका अभिनंदन किया। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि नानाजी अक्सर कहते थे कि जिस दिन गांव जाग जाएंगे, उस दिन दुनिया जाग जाएगी। उन्होंने यह बात अपने राजनीतिक अनुभव और सामाजिक दृष्टिकोण से कही थी और इसे करके भी दिखाया। उन्होंने बताया कि नानाजी की उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद से शुरू हुई सामाजिक यात्रा में उन्हें समाज-मूलक कार्यों को करीब से देखने के कई अवसर मिले। सिंह ने आगे कहा कि श्रद्धेय नानाजी अब हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन विचार के रूप में वह आज भी मौजूद हैं। सियाराम कुटीर आकर उनकी पुरानी यादें ताजा हो गईं। उन्होंने नानाजी के कार्यों को यज्ञ के समान बताया, जिनसे उन्हें विशेष ऊर्जा का संचार होता था। पूर्व सांसद ने बताया कि जब तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी गोंडा आए थे, तब वे भी नानाजी के कार्यों के प्रत्यक्षदर्शी रहे थे। उन्हें नानाजी के स्वावलंबन संबंधी कार्यों को बहुत करीब से देखने का कई बार अवसर मिला। नानाजी का व्यक्तित्व विराट था और उनसे हर मुलाकात एक नया अनुभव देती थी। उन्होंने गांव के मर्म को समझा और वहां के लोगों के पुरुषार्थ को जगाने का काम किया। नानाजी ने लोगों को 'अपना काम अपने आप करो' की सीख देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। आज उनका हुनर सीखने के लिए दुनिया भर से लोग आ रहे हैं। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जब नानाजी कहते थे कि गांव बदल सकते हैं, लोग गरीबी की जंग जीत सकते हैं और लोगों में स्वावलंबन भरा पड़ा है, केवल उसे जगाने की जरूरत है, तब शायद किसी को यह चमत्कार होने का भरोसा नहीं रहा होगा।
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