Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां

    5 hours ago

    1

    0

    ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। नितिन ने बाइक खड़ी की और सीढ़ियां चढ़ते हुए कहा- मां, मैं छत पर कमरे में सोने जा रहा हूं। शादी के बाद से वह छत पर बने कमरे में ही रहता था। उसकी पत्नी मायके गई हुई थी। रात के 9 बज चुके थे। अब तक कमरे में गए उसे 5 घंटे हो चुके थे। मैंने उसकी पसंद की प्याज की भुजिया बनाई थी। खाने के लिए कई आवाजें लगाई, लेकिन नहीं आया। कुछ देर बाद उसकी भाभी ऊपर गईं। दरवाजा खटखटाया, लेकिन जवाब नहीं मिला। वह घबराई हुई नीचे लौटीं और बोली- भइया गेट नहीं खोल रहे। इसके बाद मैं और मेरा बड़ा बेटा सूरज ऊपर गए। दरवाजा पीटा, लेकिन कोई हलचल नहीं हुई। परेशान होकर सूरज ने खिड़की से अंदर झांका तो नितिन की टांगें लटक रही थीं। यह देखते ही वह चीख पड़ा। मैं तो बेहोश हो गई।', यह कहते हुए 51 वर्षीय नितिन की मां राधा पड़ियार फूट-फूटकर रोने लगती हैं। स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज ऐसे पतियों की कहानी, जिन्होंने अपने रिश्ते से तंग आकर आत्महत्या कर ली। इससे पहले राधा से बातचीत के लिए मैं उनके घर इंदौर पहुंचा था। वह आगे बताती हैं- बड़े बेटे सूरज ने दरवाजा तोड़ा और नितिन को नीचे उतारा। उसने प्रेस आयरन की पावर केबल से फांसी लगा ली थी। नितिन ने हर्षा से लव मैरिज की थी। इस तरह बहू ने मेरे बेटे को छीन लिया। सामने दीवार पर नितिन की तस्वीर टंगी है, तभी उनकी नजर उस पर पड़ती है और देखकर उनके आंसू निकल पड़ते हैं। वह धीमी आवाज में कहती हैं- यहां नितिन और हर्षा की कई तस्वीरें लगी थीं। बेटे के जाने के बाद सब हटा दीं। बात 2013 की है। तब नितिन इंदौर में नौकरी के साथ पढ़ाई भी कर रहा था। वहां एक मार्केट में आना-जाना था, जहां हर्षा का परिवार रहता था। वे मूलरूप से राजस्थान के कुचामन के रहने वाले थे। वहीं पर नितिन और हर्षा मिले थे। नितिन ने अपनी पढ़ाई छोड़ दी, लेकिन हर्षा को एमसीए की पढ़ाई कराई। 2018 में हर्षा का परिवार इंदौर से अपने गांव राजस्थान लौट गया। हर्षा भी गई थी, लेकिन कुछ समय बाद इंदौर वापस आकर अपने चाचा के घर रहने लगी। नितिन और उसकी दोबारा मुलाकातें होने लगी। 2019 में दोनों ने शादी कर ली। उस दिन शाम को नितिन के दोस्त का फोन आया। उसने बताया- आंटी, नितिन ने मंदिर में हर्षा से शादी कर ली है। उसके बाद मेरे बड़े बेटे सूरज ने नितिन को फोन लगाया नितिन ने कहा- हां भइया, शादी कर ली है, लेकिन घर नहीं आऊंगा। वह हर्षा के साथ किराए के मकान में रहने लगा। राधा कहती हैं- लेकिन मैं बहुत चिंतित थी, क्योंकि हर्षा की मां इस शादी के खिलाफ थीं। धमकी देती थीं कि अगर मेरे बेटे ने उनकी बेटी से शादी की, तो दोनों को जिंदा जला देंगी। शादी के दो महीने बाद बड़े बेटे सूरज ने नितिन को फोन किया। कहा- मां की तबीयत खराब है, आकर देख लो। नितिन घर आया। मेरी हालत देखकर उसने हर्षा से कहा- अब यहीं रहेंगे। उसके बाद हमने दोनों के लिए रिसेप्शन भी रखा, लेकिन हर्षा के घर से कोई नहीं आया। शुरुआती 7-8 महीने सब ठीक रहा। नितिन ने अपने लिए छत पर एक कमरा बनवाया और वहीं रहने लगा। राधा बताती हैं कि एक दिन हर्षा की बड़ी बहन का फोन आया। उसके बाद दोनों में बातचीत शुरू हुई और कुछ समय बाद वह मेरे घर आने लगी। उसके बाद हर्षा का स्वभाव बदलने लगा। उसकी मायके वालों से बातचीत बढ़ी और घर का माहौल बिगड़ने लगा। वो नितिन से कहती थी- तुम्हारे मां-बाप होते कौन हैं, मुझे कुछ कहने वाले? मैं 9 बजे सोकर उठूं या 11 बजे? धीरे-धीरे उसने नितिन पर अलग घर बसाने का दबाव बनाना शुरू किया। वह कहती थी- परिवार से अलग हो जाओ और मेरे नाम से फ्लैट खरीदो। रिश्ता बचाने के लिए नितिन फिर किराए के मकान में रहने लगा। हर्षा, नितिन से कहती- बाहर खा लिया करो... मेरे लिए भी लाया करो। मैं कोई नौकर नहीं हूं, जो बनाकर खिलाऊं। उस वक्त हर्षा के माता-पिता नितिन से पैसे मांगते, लेकिन लौटाते नहीं। इन वजहों से नितिन टूटने लगा था। इस बातचीत के दौरान, राधा के बड़े बेटे सूरज ऑफिस से घर आ जाते हैं। उन्हें देखते ही राधा थोड़ी देर चुप हो जाती हैं, फिर भर्राई आवाज में कहती हैं- मैं नितिन के बिना रह नहीं पाती। दिवाली का दिन था। उस दिन हर्षा का नितिन से झगड़ा हुआ था। शाम को हम दीये और मिठाई लेकर उसके घर पहुंचे, तो वह एक कोने में बैठा था। उसने कहा- हर्षा कई दिनों से फ्लैट लेने को लेकर लड़ रही है। नाराज है, इसलिए आज उसने खाना नहीं बनाया। उस रात हमने उसके घर दीये जलाए, खाना मंगवाकर खिलाया और लौट आए। कुछ दिन बाद नितिन फिर से हर्षा को लेकर घर आ गया। उस समय हर्षा तीन महीने की गर्भवती थी। इस बार नितिन ने ऊपर कमरे के पास एक छोटा किचन भी बनवा दिया, लेकिन हर्षा का व्यवहार नहीं बदला। एक दिन अचानक वह अपने मायके चली गई। वहां जाकर गर्भपात करवा लिया और नितिन को बताया कि बच्चा खराब हो गया है। उसके बाद नितिन खुद उसे लेकर वापस आया। राधा बताती हैं- 2023 में हर्षा फिर गर्भवती हुई। उसने बेटे को जन्म दिया, तो लगा, सब ठीक हो जाएगा। पोता पांच महीने का था। होली आने वाली थी। हर्षा ने कहा कि उसके मायके में पूजा है, जाना पड़ेगा। हमने रोकने की कोशिश की, लेकिन नहीं मानी। उसके बाद फिर लौटकर नहीं आई। मायके से नितिन को फोन करके कहती- मेरे नाम से फ्लैट खरीदो, तभी आऊंगी। जब नितिन ने फ्लैट नहीं खरीदा, तो उसने राजस्थान के कुचामन में हमारे खिलाफ दहेज प्रताड़ना, रेप का केस दर्ज कराया। हमें जेल हो गई। काफी दिनों बाद जमानत मिली। इसके बाद हमें हर सुनवाई पर राजस्थान जाना पड़ता था। वहां हर्षा का परिवार समझौते के नाम पर 20 लाख रुपए मांगता था। धमकी देता- पैसे दो और मामला खत्म करो... नहीं तो जीना हराम कर देंगे। राधा बताती हैं- आखिरी बार दिसंबर 2024 में हम सुनवाई के लिए गए थे। वहां हर्षा ने कचहरी में नितिन का कॉलर पकड़ लिया और कहा- तू जिंदा क्यों है रे नितिन? 20 लाख नहीं दे सकता, तो मर क्यों नहीं जाता? उस घटना के बाद नितिन बहुत परेशान हो गया। गुमसुम रहने लगा। मुकदमे की अगली तारीख में अभी 10 दिन बाकी थे। उस दिन रात में उसने फांसी लगा ली। यह कहते हुए राधा फिर से रो पड़ती हैं। बगल में बैठे सूरज की भी आंखें भर आती हैं। रुंधे गले से वह कहते हैं- भाई ने 14 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा था। नोट में नितिन ने हर्षा, उसकी मां और दोनों बहनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। भाई की मौत के 10 दिन बाद एफआईआर दर्ज हुई थी। मामले में अभी हर्षा और उसकी मां इंदौर जेल में हैं, जबकि उसकी दोनों बहनें जमानत पर बाहर आ गई हैं। अब इंदौर से निकलकर मैं दिल्ली पहुंचता हूं। वहां छतरपुर में 70 साल की ऊषा बरनवाल से मुलाकात होती है। वह बेटे की मौत के बाद अपनी बेटी मोनिका के साथ रह रही हैं। बातचीत के लिए बैठते ही वह भर्राई आवाज में कहती हैं- पता नहीं, उस औरत को क्या चाहिए था। आखिर उसने मेरे इकलौते बेटे की जान ले ली। ऊषा यह बातें अपने हॉल के सोफे पर बैठकर रही हैं। सामने दीवार पर उनके पति और बेटे निशांत की तस्वीरें टंगी हैं। वह बताती हैं- 2015 की बात है। हम वाराणसी में रहते थे। एक रिश्तेदार ने कहा- आपके बेटे की उम्र 31 साल हो गई है। एक पढ़ी-लिखी लड़की है, परिवार अच्छा है... शादी कर दीजिए। मैंने सोचा, बेटा सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, अच्छी कमाई कर रहा है। हमने रिश्ता तय कर दिया। उसी साल अप्रैल में शादी भी हो गई। शादी के बाद बहू निधि एक हफ्ते हमारे साथ रही। फिर निशांत के साथ नोएडा चली गई। कुछ समय बाद वहां दोनों के बीच झगड़े बढ़ने लगे, लेकिन बेटे ने कभी शिकायत नहीं की। 2022 में कोरोना के दौरान लॉकडाउन बढ़ा तो दोनों वाराणसी आ गए। उनका एक बच्चा भी हो चुका था। वहां रहने के दौरान निधि गुस्से में हमारे किराएदारों से लड़ती। कहती- मकान खाली करो, इसमें मुझे रहना है। निशांत मुझसे कहता- ‘मां, किस लड़की से आपने शादी करवा दी? सनकी है।’ उसी बीच 18 सितंबर 2023 को मेरे पति की अचानक मौत हो गई। हमें समझ नहीं आया कि उन्हें क्या हुआ था। उसके बाद घर में तनाव बढ़ गया। बेटे और निधि के बीच झगड़े बढ़ते गए। पति की मौत के बाद मैं दिल्ली बेटी के पास आकर रहने लगी। उस वक्त बेटा बार-बार कहता- मां, मेरे पास आकर रहो। लेकिन मैं कहती- तू ऑफिस चला जाएगा, तो पूरे दिन तेरी पत्नी को कैसे झेलूंगी? कुछ पल रुककर ऊषा कहती हैं- काश बेटे के पास चली जाती तो शायद उसकी जान बच जाती। 14 सितंबर 2024 की रात एक बजे थे। मेरे पति की बरसी में चार दिन बचे थे। वाराणसी से देवर का फोन आया। उन्होंने बताया कि निशांत ने आत्महत्या कर ली है। उन्हें खबर बहू निधि ने दिया। ऊषा रोते हुए कहती हैं- सोचिए, हम नोएडा से ज्यादा दूर नहीं थे... फिर भी बहू ने हमें फोन न करके मेरे देवर को किया। उसके बाद मेरी बेटी ने निधि को फोन किया। जवाब आया- हां, निशांत ने सुसाइड कर लिया है। आ जाओ। हम तुरंत नोएडा निकल पड़े। रास्ते में पुलिस का फोन आया कि वह शव अस्पताल लेकर जा रही है। ऊषा की आवाज कांपने लगती है। वह कहती हैं- उसके बाद हम अस्पताल पहुंचे, तो सामने स्ट्रेचर पर बेटे का शव पड़ा था। निधि पुलिस वालों के साथ खड़ी, बोतल से पानी पी रही थी। उसके चेहरे पर तनिक भी पछतावा नहीं था। सदमे में मेरी बेटी मोनिका बोल पड़ी- तुमने मेरे भाई की जान ले ली न! अस्पताल से लौटकर हम निशांत के फ्लैट पर पहुंचे। जिस कमरे को निधि आत्महत्या की जगह बता रही थी, वहां कटी हुई रस्सियां पड़ी थीं। पंखे में फंदे का हिस्सा अटका था और पास ही एक कैंची रखी थी। यह सब देखकर लगा कि मामला वैसा नहीं है, जैसा बताया जा रहा है। उनका आरोप है कि पुलिस ने उस घर की ठीक से छानबीन नहीं की। जब हमने सीसीटीवी फुटेज देखे, तो पता चला कि पूरी घटना रात साढ़े नौ बजे के बाद की थी। उससे पहले दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। ऊषा का दावा है कि घटना से पहले निशांत ने कई वीडियो भी रिकॉर्ड किए थे। वे बाद में उसकी मोबाइल से मिले थे। इसलिए निधि, निशांत का मोबाइल फोन लेना चाह रही थी और अपना फोन छिपाकर रखना चाह रही थी। निशांत का सिम कार्ड निधि के मोबाइल में था। मौत के तुरंत बाद उसने बेटे का सिम अपने फोन में लगा लिया था। ऊषा यह भी दावा करती हैं कि- निधि ने पुलिस से कहा था कि उसने अकेले ही निशांत का शव पंखे से उतारा और गार्ड को बुलाकर बाहर लेकर आई। आखिर जिस महिला के पति की मौत हुई हो, क्या वह अकेले शव उतार पाएगी? कोई जांच-पड़ताल हुई? निशांत की बहन मोनिका आरोप लगाती हैं कि- जांच तो छोड़िए, पुलिस ने निधि से ठीक से पूछताछ तक नहीं की। घटना के तुरंत बाद निधि सामान लेकर मायके रांची चली गई। कमरे में एक पैंट मिली थी, जिसमें गुटखे के पैकेट रखे थे। मेरा भाई गुटखा नहीं खाता था। समझ नहीं आया कि उस रात कमरे में कौन आया था। ठीक से जांच होती, तो शायद सच सामने आ जाता। मोनिका यह भी आरोप लगाती हैं कि- उस फ्लैट को सीज नहीं किया गया और कुछ ही दिनों बाद उसे पेंट कर दिया गया। वह बताती हैं कि नोएडा की सूरजपुर कोर्ट ने मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए थे। अभी मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में है। रुंधी आवाज में मोनिका कहती हैं- लगता नहीं कि भाई को न्याय नहीं मिलेगा। अगले दिन सुबह मैं गुरुग्राम पहुंचता हूं, जहां डॉली से मुलाकात होती है। डॉली एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती हैं। धीमी आवाज में कहती हैं- शादी के चार महीने के भीतर ही मेरे भाई ने आत्महत्या कर ली। रिश्ता एक मैट्रिमोनियल साइट के जरिए तय हुआ था। सितंबर 2024 की बात है। हम पटना के रहने वाले हैं। लड़की का परिवार रांची का। 9 नवंबर को हम लड़की देखने गए, लेकिन वहां हमसे बिना ठीक से बातचीत के भाई को अगूंठी पहनाकर सगाई करा दी। उसके बाद लड़की नोएडा स्थित मेरे भाई के फ्लैट पर आने-जाने लगी। उसी साल फरवरी में शादी कर दी गई। एक हफ्ता पटना में रहने के बाद विकास, पत्नी एकता को लेकर नोएडा चला गया। मार्च में दोनों की पहली होली थी। एकता शादी में मिले गिफ्ट और गहनों से खुश नहीं थी। झगड़ा करती थी। बालकनी से कूदने की धमकी देती थी। एक बार तो भाई को पुलिस भी बुलानी पड़ी थी। शादी के करीब दो महीने के बाद एकता की मां भी नोएडा आईं। उनके सामने भी एकता भाई से झगड़े करती। भाई ने परेशान होकर हमें बताया। उसके बाद हमने उसे गुरुग्राम बुला लिया। उधर, मां-बेटी उसका कीमती सामान और गहने लेकर रांची चली भाग गईं और हमारे खिलाफ केस दर्ज करा दिया। एकता ने हमें सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया, लेकिन विकास से स्नैपचैट पर बात करती थी। एक दिन उसने विकास से कहा- रांची में मेरा दम घुट रहा है, मुझे ले चलो। उसकी जिद पर जुलाई में भाई विकास, एकता के घर गया। वहां उसके परिवार वालों ने उसे नंगा करके पीटा, कान पकड़कर उठक-बैठक कराई और भगा दिया। उस सदमे में वह एक होटल पहुंचा और हाथ की नस काट ली। पुलिस को खबर मिली, तब उसे अस्पताल ले गई। उसके बाद विकास नोएडा आकर रह रहा था। 3 अगस्त 2025 की बात है। एकता एक दिन अचानक नोएडा भाई के पास पहुंची। दोनों के बीच झगड़ा हुआ। एकता ने विकास के शरीर पर नाखूनों से चोट पहुंचाई और अगले दिन सामान पैक करके वापस रांची चली गई। वह रास्ते में ही रही होगी। 5 अगस्त की रात भाई ने आत्महत्या कर ली। उससे पहले भाई ने हमें एक वीडियो भेजा था। कलाई की नस काटने के बाद फंदा लगा लिया था। वह रुककर कहती हैं- जब तक हम गुरुग्राम से नोएडा पहुंचते, देर हो चुकी थी। मां उस समय छोटी बहन के पास ऑस्ट्रेलिया गई हुई थीं। वो आज भी कहती हैं- अगर वह विदेश नहीं जाती, तो उनका बेटा बच जाता। रुंधे गले से डॉली कहती हैं- भाई की मौत के बाद एफआईआर दर्ज कराने के लिए भटकती रही। जिन लोगों पर शक है, वे आज भी खुले में घूम रहे हैं। मामला सूरजपुर सेशन कोर्ट में है। एकता जमानत पर बाहर है। पुरुष आयोग की अध्यक्ष बरखा त्रेहान कहती हैं, ‘जब भी ऐसे मामले सामने आते हैं तो लगता है कि जो कानून महिलाओं को बचाने के लिए बने थे, उन्हीं को ढाल बनाकर अब पुरुषों को फंसाया जा रहा है। पुरुषों को आगे आकर बोलना पड़ेगा।’ नोट- घरेलू हिंसा का शिकार महिला या पुरुष, कोई भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में परिवार, दोस्तों या काउंसलर से मदद लें। आत्महत्या समाधान नहीं है। ---------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-जान बचानी थी, तो सिर पर बांध ली भगवा पट्टी:दंगे की तस्वीर ने मेरी जिंदगी बर्बाद की- हिंदुत्व का चेहरा बना, लेकिन मिला कुछ नहीं 2002 गुजरात दंगे के दो पोस्टर बॉय की कहानी, जिनमें हिंदुत्व का चेहरा बने मोची अशोक परमार आज दो वक्त की रोटी को मोहताज हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात सड़क पर सोते हैं। वे उस वक्त 27 साल के थे। आज 51 साल के हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-वो बेटी जैसी थी, उसके पिता बोले-तूने इसका रेप किया: 25 साल बाद जेल से बरी, आज भी लगता है कोई मारने आ रहा है 57 साल के आजाद खान अपने भाई की किराने की दुकान पर बेसुध बैठे हुए हैं। तीन महीने पहले ही 25 साल बाद जेल से बाइज्जत बरी होकर आए हैं। अकेले में कुछ बुदबुदा रहे हैं। पूछने पर कहते हैं- पूरी जिंदगी काल-कोठरी में गुजार दी। अब किसी से क्या ही बात करूं, क्या ही बचा है! पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
    Click here to Read more
    Prev Article
    यूपी के मिर्जापुर में सड़क हादसा, 11 की मौत:इनमें से 9 जिंदा जले, बोलेरो और कार ट्रक-ट्राले से टकराईं, बोलेरो में आग लगी
    Next Article
    ट्रैफिक से लेट पहुंचे छात्र, डायरी में दर्ज हुई सजा:अम्बेडकरनगर में सेंट पीटर्स इंटर कॉलेज में मिल रही सजा, स्कूल का भी ट्रैफिक गार्ड नहीं

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment