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    बाराबंकी के हिंद मेडिकल कॉलेज विवाद में नया मोड़:डॉ. सचान- डॉ. मिश्रा पर 300 करोड़ के कर्ज, फर्जी डीड और मीटिंग मिनट्स पर घमासान

    14 hours ago

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    बाराबंकी के सफेदाबाद स्थित हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज का प्रबंधन विवाद अब खुली जंग में बदलता दिख रहा है। एक ओर डॉ. आमोद कुमार सचान और डॉ. रिचा मिश्रा अवैध तख्तापलट और जालसाजी के आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर ट्रस्टी डॉ. बी.के. सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह दस्तावेजों के साथ सामने आकर पूरे घटनाक्रम को “ट्रस्ट के भीतर लिया गया वैधानिक निर्णय” बता रहे हैं। दावा–प्रतिदावा के बीच यह हाई-प्रोफाइल मामला अब कानूनी मोड़ लेता नजर आ रहा है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब डॉ. आमोद कुमार सचान और डॉ. रिचा मिश्रा ने आरोप लगाया कि संस्थान में अवैध तरीके से प्रबंधन बदलने की कोशिश की गई है। उन्होंने मीटिंग मिनट्स और रेजोल्यूशन को फर्जी बताते हुए इसे बाहरी साजिश करार दिया। इसके जवाब में मानवेंद्र सिंह ने प्रेस के सामने दस्तावेज रखे और कहा कि यह कोई तख्तापलट नहीं, बल्कि ट्रस्ट के भीतर विधिवत प्रक्रिया के तहत लिया गया निर्णय है। उनका कहना है कि ट्रस्ट में केवल तीन नहीं, बल्कि कुल छह ट्रस्टी हैं और बहुमत से लिए गए फैसले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। छह ट्रस्टी, हस्ताक्षर और विवादित मीटिंग मिनट्स मानवेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट में सुशीला चौधरी, मधु चौधरी और सरोजिनी वर्मा समेत छह सदस्य हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन मीटिंग मिनट्स और प्रस्तावों को फर्जी बताया जा रहा है, उन पर स्वयं डॉ. रिचा मिश्रा के हस्ताक्षर मौजूद हैं। उनके अनुसार, डॉ. सचान को पद से हटाने और दो ट्रस्टियों के इस्तीफे निरस्त करने की प्रक्रिया में डॉ. रिचा मिश्रा की सहमति शामिल थी। यह खुलासा सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। अब सवाल उठ रहा है कि अगर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हैं, तो फिर फर्जीवाड़े का आरोप किस आधार पर लगाया गया? 300 करोड़ का कर्ज और फर्जी डीड का आरोप विवाद यहीं नहीं थमा। मानवेंद्र सिंह ने डॉ. आमोद कुमार सचान पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप भी लगाया है। उनका दावा है कि संस्थान के नाम पर करीब 300 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया, जिसकी जानकारी अन्य ट्रस्टियों को नहीं दी गई। आरोप यह भी है कि इस प्रक्रिया में फर्जी डीड तैयार की गई और ट्रस्ट के सदस्यों को अंधेरे में रखा गया। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला केवल प्रबंधन विवाद नहीं, बल्कि आर्थिक अनियमितताओं की बड़ी जांच का विषय बन सकता है। अदालत की दहलीज पर पहुंच सकता है मामला दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो चुके हैं। संस्थान से जुड़े कर्मचारी और छात्र भी असमंजस की स्थिति में हैं। प्रबंधन विवाद का असर संस्थान की साख पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दस्तावेजों की सत्यता और वित्तीय लेनदेन की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मामला अदालत तक पहुंचने की पूरी संभावना लिए हुए है और कानूनी लड़ाई लंबी चल सकती है। सफेदाबाद का यह मेडिकल संस्थान अब चिकित्सा से ज्यादा ट्रस्ट वॉर की वजह से चर्चा में है—आने वाले दिनों में सच क्या है, यह अदालत और जांच एजेंसियों की पड़ताल तय करेगी।
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