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    CM Mamata Banerjee बोलीं- किसी की धमकी बर्दाश्त नहीं करेंगे, CEC Gyanesh Kumar ने आरोपों पर दी सफाई

    3 hours from now

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    पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें चेतावनी दी है कि वह अपनी सीमा से बाहर न जाएं। इसके जवाब में निर्वाचन आयोग ने कहा है कि राज्य में किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा और आयोग का लक्ष्य स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है।कोलकाता के एस्प्लानेड स्थित मेट्रो चैनल पर धरने के दौरान ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर कटाक्ष करते हुए कहा कि साहस होना अच्छी बात है, लेकिन दुस्साहस के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए हुई बैठक में राज्य के अधिकारियों को धमकाया गया। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बैठक में अधिकारियों को यह कहा गया कि अभी ही नहीं बल्कि मई के बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले अपनी कुर्सी बचाइए, फिर बंगाल के अधिकारियों और लोगों को धमकाइए।इसे भी पढ़ें: क्या President Murmu का हुआ अपमान? Bharat Ratna Ceremony के Protocol पर BJP-TMC में तकरारमुख्यमंत्री ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर व्यंग्य करते हुए यह भी कहा कि वह खुद को किसी काल्पनिक नायक की तरह समझ रहे हैं और ऐसे लोग लोकतंत्र को कमजोर करते हैं। कालीघाट मंदिर की उनकी यात्रा का जिक्र करते हुए ममता ने कहा कि मंदिर जाते समय कोई लगभग फिसल गया था, शायद यह संकेत है कि देवी मां भी वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने से खुश नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं और इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों को प्रभावित किया गया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम मतदाताओं को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है।ममता बनर्जी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची में कथित तर्कगत त्रुटियां हैं तो वह केवल पश्चिम बंगाल में ही क्यों सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तकनीकी साधनों के प्रयोग से उपनामों में गलतियां पैदा की गई हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एक योजना के तहत पहले वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं और बाद में मतदान मशीनों में गड़बड़ी करने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि मतगणना के दिन भी ऐसी रणनीति अपनाई जा सकती है जिससे जनता को गलत संदेश दिया जाए।धरना स्थल पर उनके साथ मौजूद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी कहा कि लगभग साठ लाख लोगों के मतदान अधिकार बहाल होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कोलकाता में हजारों होटलों के बावजूद मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने वही होटल क्यों चुना जहां अक्सर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता ठहरते हैं।उधर, इन आरोपों के बीच आज कोलकाता में संवाददाता सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग हमेशा शांतिपूर्ण और सहभागी लोकतंत्र में विश्वास करते रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आयोग का उद्देश्य राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है और हर पात्र मतदाता को मतदान का अवसर मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण पूरे देश में संविधान के प्रावधानों के अनुसार किया जा रहा है। ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और सही बनाना है ताकि केवल योग्य मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें और अयोग्य नाम हटाए जा सकें।उन्होंने कहा कि पुनरीक्षण के दौरान लगभग चार से पांच प्रतिशत मतदाता ऐसे पाए गए जो वर्ष 2002 की सूची से अपना मिलान नहीं कर पाए। इसके अलावा सात से आठ प्रतिशत मतदाताओं के विवरण में गलत मिलान पाया गया, जो या तो जानबूझकर किया गया प्रयास था या अनजाने में हुई त्रुटि का परिणाम था। उन्होंने बताया कि कई मामलों की जांच अभी निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर जारी है और विचाराधीन मामलों पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि चुनाव के दौरान हिंसा या मतदाताओं को डराने की किसी भी कोशिश के प्रति आयोग की शून्य सहनशीलता की नीति रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में लगभग अस्सी हजार मतदान केंद्र बनाए जाएंगे और मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सभी केंद्रों पर शत प्रतिशत वेब प्रसारण की व्यवस्था की जाएगी।
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