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    बाराबंकी में सिलेंडर संकट: QR कोड से बिक रहे उपले:4 का कंडा 10 रुपये में मिल रहा, खरीदने वालों की लगी भीड़

    8 hours ago

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    मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर भारत में एलपीजी आपूर्ति पर पड़ा है। इसके चलते देश भर में रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत और कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में भी गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें लग रही हैं और उपभोक्ताओं को कई दिनों तक सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। इस स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग खाना पकाने के पारंपरिक विकल्पों, जैसे लकड़ी के चूल्हे और गोबर के उपलों का उपयोग करने को मजबूर हैं। बाराबंकी जिले के सतरीख क्षेत्र स्थित शरीफाबाद गांव में इन दिनों गोबर के उपलों की मांग में अचानक कई गुना वृद्धि हुई है। गांव की निवासी राजेश्वरी ने बताया कि वह पहले भी उपले बनाकर बेचती थीं, लेकिन गैस की किल्लत के बाद अब बड़ी संख्या में लोग इन्हें खरीदने आ रहे हैं। राजेश्वरी के अनुसार, एक उपला 10 रुपये में बिक रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि गोबर जुटाना आसान नहीं है, क्योंकि गांव में जानवरों की संख्या सीमित है और चारे की भी समस्या रहती है। इन चुनौतियों के बावजूद, ग्रामीण अपनी रसोई चलाने के लिए उपले बनाने और बेचने का काम कर रहे हैं। गांव की एक अन्य महिला रामकली ने जानकारी दी कि कई महिलाएं मिलकर सुबह से बागों में गोबर इकट्ठा करती हैं और फिर उपले बनाती हैं। सूखने के बाद इन्हें बाजार में बेचा जाता है। रामकली ने बताया कि पहले इतनी बिक्री नहीं होती थी, लेकिन अब मांग इतनी बढ़ गई है कि उपले जल्द ही बिक जाते हैं। महिलाओं के लिए यह अचानक बढ़ा हुआ काम एक प्रकार का अस्थायी रोजगार भी बन गया है, जिससे उन्हें कुछ अतिरिक्त आय हो रही है। इसी बीच, शरीफाबाद गांव में एक अनूठा दृश्य भी सामने आया। राजकुमारी नामक एक महिला उपलों के ढेर पर बारकोड स्कैनर लगाकर उन्हें बेच रही थीं। राजकुमारी ने बताया कि आजकल अधिकतर लोग नकद पैसे नहीं रखते, इसलिए उन्होंने ऑनलाइन भुगतान की सुविधा के लिए बारकोड की व्यवस्था की है। उनके यहां एक उपला लगभग 8 रुपये में बिक रहा है और ग्राहक स्कैन करके भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 5-6 महिलाएं मिलकर उपले बनाती हैं और इन दिनों मांग इतनी ज्यादा है कि यह काम अच्छा चल रहा है। लकड़ी और कंडों से चूल्हा जलाकर खाना बना रही थीं। उन्होंने बताया कि उनके पति की दो महीने पहले मौत हो गई और बेटे होटल में काम करते थे, लेकिन वहां भी सिलेंडर की किल्लत के कारण काम ठप हो गया। ऐसे में घर में गैस न होने की वजह से उन्हें चूल्हे पर ही खाना बनाना पड़ रहा है। उधर गांव में ही रहने वाली प्रेमा नाम की महिला अपने घर में एक अन्य गृहणी राजेश्वरी ने बताया कि उनका बेटा तीन दिन तक गैस एजेंसी की लाइन में लगा रहा लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि मजबूरी में अब चूल्हे पर उपलों से खाना बनाना पड़ रहा है। वहीं बाराबंकी शहर से शरीफाबाद उपले खरीदने पहुंचे सुरेंद्र कुमार ने बताया कि वह चार-पांच दिन से गैस एजेंसी के चक्कर लगा रहे थे लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। जानकारी मिलने पर वह बाइक से गांव पहुंचे और यहां 10 रूपये का एक उपला खरीदकर घर की रसोई चलाने की तैयारी कर रहे हैं।
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