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    बरेली में फर्जी IAS बनकर ठगी करने वाली बहनें गिरफ्तार:नौकरी के नाम पर वसूले लाखों रुपए, फर्जी नियुक्ति पत्र भी भेजे

    8 hours ago

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    बरेली के बारादरी इलाके में खुद को आईएएस अधिकारी बताने वाली एक महिला और उसकी बहन को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कई बेरोजगार युवकों से लाखों रुपये की ठगी की। पुलिस ने यह कार्रवाई बारादरी थाने में दर्ज एक सामूहिक शिकायत के आधार पर की है। फिलहाल दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। ठगी का यह पूरा मामला साल 2022 से जुड़ा बताया जा रहा है। फाईक एन्क्लेव निवासी प्रीति लॉयल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी मुलाकात शिखा पाठक नाम की महिला से हुई थी। शिखा ने उसे भरोसा दिलाया कि उसकी बहन डॉ. विप्रा शर्मा एक बड़ी अधिकारी है और एसडीएम पद पर तैनात है। शिखा ने दावा किया कि उसकी बहन की उच्च स्तर तक पहुंच है और वह पैसे लेकर किसी को भी सरकारी नौकरी दिला सकती है। इसी भरोसे में आकर प्रीति के साथ उसके परिचित आदिल खान, संतोष कुमार और मुशाहिद अली भी इस जाल में फंस गए। बैंक ट्रांजैक्शन और नकद में लाखों रुपए वसूले आरोपियों ने पीड़ितों को अपने घर बुलाकर भरोसा कायम किया। यहां विप्रा शर्मा और शिखा पाठक के साथ उनके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा भी मौजूद रहते थे। आरोप है कि विप्रा शर्मा खुद को प्रभावशाली अधिकारी बताकर कहती थी कि कंप्यूटर ऑपरेटर पदों पर भर्ती निकली है और वह अधिकारियों को पैसे देकर नियुक्ति करवा देगी। इसके बाद पैसे का लेन-देन शुरू हो गया। प्रीति ने 2 लाख रुपये बैंक खाते में भेजे, आदिल खान ने 1.80 लाख रुपये दिए, मुशाहिद अली ने 5.21 लाख रुपये नकद घर जाकर दिए, जबकि संतोष कुमार ने भी 2 लाख रुपये का भुगतान किया। लखनऊ पहुंचकर खुला फर्जीवाड़ा आरोपियों ने बाद में पीड़ितों को फर्जी नियुक्ति पत्र भी थमा दिए। ये पत्र राजस्व परिषद लखनऊ के नाम पर तैयार किए गए थे और उन पर कथित अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर भी मौजूद थे। दस्तावेज डाक, व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भेजे गए। जब पीड़ित जॉइनिंग के लिए लखनऊ पहुंचे, तो वहां अधिकारियों ने साफ कर दिया कि सभी नियुक्ति पत्र फर्जी हैं। इसके बाद पीड़ितों को ठगी का एहसास हुआ। नीली बत्ती और एडीएम प्लेट लगाकर दिखाती थी रौब जांच में यह भी सामने आया है कि विप्रा शर्मा अपनी गाड़ी पर एडीएम एफआर उत्तर प्रदेश शासन की प्लेट लगाकर चलती थी, जिससे वह खुद को बड़ा अधिकारी साबित कर सके। जब पीड़ितों ने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने धमकी देकर इंकार कर दिया। इसके बाद पीड़ितों ने बारादरी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया है।
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