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    Gujarat Local Body Elections में BJP ने अब तक की सबसे बड़ी जीत हासिल कर रचा इतिहास, सभी 15 नगर निगमों पर हुआ भगवा पार्टी का राज

    3 hours from now

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    गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले हुए निकाय चुनावों ने राज्य की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को स्पष्ट कर दिया है। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है, उसने यह संदेश दे दिया है कि राज्य में उसकी पकड़ अभी भी बेहद मजबूत है और विपक्ष के लिए उसे चुनौती देना आसान नहीं होगा। चुनाव परिणामों ने यह भी दिखाया कि जनता का भरोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व पर कायम है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भाजपा की इस शानदार जीत के लिए गुजरात के मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताया है।हम आपको बता दें कि गुजरात के निकाय चुनावों में भाजपा ने सभी 15 नगर निगमों में जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। यह जीत केवल सांकेतिक नहीं बल्कि व्यापक जनसमर्थन का प्रमाण है, क्योंकि हर नगर निगम में पार्टी ने पचास प्रतिशत से अधिक सीटें हासिल कीं। कुल मिलाकर 1044 सीटों में से 856 सीटें जीतकर भाजपा ने अपना दबदबा साबित किया। यह परिणाम दर्शाता है कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण निकायों में भी पार्टी की पकड मजबूत बनी हुई है।इसे भी पढ़ें: West Bengal: Himanta Sarma का Mamata पर तीखा हमला, 'आपका बयान खतरनाक-सांप्रदायिक है'राज्य के सबसे बडे शहर अहमदाबाद में भाजपा ने 192 में से 158 सीटें जीतकर शानदार विजय हासिल की। यह जीत न केवल संगठन की मजबूती को दर्शाती है बल्कि शहरी मतदाताओं के बीच पार्टी की लोकप्रियता का भी संकेत देती है। अहमदाबाद नगर निगम में इस तरह की जीत से यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा का शहरी वोट बैंक अभी भी अटूट है और विपक्षी दल वहां कोई ठोस चुनौती पेश करने में असफल रहे।सूरत में भी भाजपा ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और 127 में से 115 सीटें अपने नाम कीं। इस परिणाम ने विपक्ष, खासकर आम आदमी पार्टी के लिए बडी चुनौती खडी कर दी है। पिछले चुनाव में जहां इस पार्टी ने 27 सीटें जीती थीं, वहीं इस बार वह केवल 4 सीटों तक सिमट गई। कांग्रेस की स्थिति भी बहुत कमजोर रही और उसे पांच साल बाद केवल एक सीट मिली। सूरत के नतीजे यह दिखाते हैं कि विपक्ष अपनी जमीन बचाने में भी संघर्ष कर रहा है।सूरत में आम आदमी पार्टी को एक और झटका तब लगा जब उसकी वरिष्ठ नेता और निगम में विपक्ष की नेता पायल सकारिया अपनी सीट हार गईं। यह हार केवल एक सीट का नुकसान नहीं बल्कि संगठनात्मक कमजोरी का संकेत भी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी अपने प्रभाव को बरकरार रखने में नाकाम रही और भाजपा के सामने टिक नहीं पाई।उधर, भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे पार्टी नेतृत्व की रणनीति और कार्यकर्ताओं की मेहनत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व को दिया है। उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती वैश्विक ताकत और मजबूत आंतरिक सुरक्षा ने जनता के विश्वास को और मजबूत किया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी के कार्यकर्ता हर स्तर पर सुशासन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, चाहे वह केंद्र हो, राज्य हो या स्थानीय निकाय।सीआर पाटिल ने जीत के बाद मतदाताओं और कार्यकर्ताओं का आभार जताया और कहा कि यह जनादेश जनता के अटूट विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पार्टी पिछले लगभग तीस वर्षों से सूरत नगर निगम में सत्ता में है और लगातार जनता के भरोसे पर खरी उतर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी अपने वादों को पूरा करने और सबके साथ समान विकास करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।हम आपको बता दें कि इन चुनावों में लगभग 66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो यह दर्शाता है कि जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाई। मतदान में अमित शाह, भूपेंद्र पटेल और अन्य वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी भी देखने को मिली, जिससे चुनावी माहौल और अधिक सक्रिय हुआ। कुल मिलाकर देखें तो गुजरात के निकाय चुनावों के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में भाजपा की स्थिति बेहद मजबूत है। यह जीत आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के मनोबल को और बढाएगी। वहीं विपक्षी दलों के लिए यह संकेत है कि उन्हें अपनी रणनीति और संगठन दोनों पर गंभीरता से काम करना होगा, अन्यथा सत्ता तक पहुंचना उनके लिए और कठिन होता जाएगा।
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