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    बरेली में दिवाली से पहले सॉलिड वेस्ट प्लांट की सौगात:27 करोड़ का सॉलिड वेस्ट प्लांट शुरू, रोजाना 500 टन कूड़े का होगा निस्तारण, हटेंगे कूड़े के पहाड़

    2 hours ago

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    बरेली में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की शुरुआत हो गई है। 27 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुए इस प्लांट से रोजाना 500 टन कूड़े का निस्तारण होगा। जिससे बरेली के बाकरगंज में बने कूड़े के पहाड़ खत्म हो जाएंगे। बुधवार को मंत्री, सांसद मेयर और अधिकारियों ने प्लांट की शुरुआत की। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए लंबे अरसे से प्रयास चल रहा था। बरेली की स्वच्छता व्यवस्था को हाईटेक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। फरीदपुर तहसील क्षेत्र के सथरापुर में लगभग 27 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का विधिवत उद्घाटन कर दिया गया। इस प्लांट के शुरू होने से शहर से प्रतिदिन निकलने वाले सैकड़ों टन कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण संभव हो सकेगा। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इसे पूरे शहरवासियों के लिए दिवाली का सबसे बड़ा और स्वास्थ्यवर्धक उपहार करार दिया है। मेयर डॉ. उमेश गौतम बोले- जहां स्वच्छता, वहीं लक्ष्मी का वास महापौर डॉ. उमेश गौतम ने प्लांट के शुभारंभ को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि स्वच्छता ही स्वस्थ और खुशहाल शहर की नींव है। उन्होंने कहा, “दीपावली से पहले बरेलीवासियों को इससे बेहतर कोई उपहार नहीं हो सकता।” मेयर ने साफ किया कि अब बाकरगंज में कचरे का जाना पूरी तरह बंद हो जाएगा, जिससे वहां वर्षों से लगे कूड़े के पहाड़ों से स्थानीय लोगों को हमेशा के लिए निजात मिलेगी। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे नालियों और सड़कों पर कचरा फेंकने के बजाय नगर निगम के सफाई कर्मचारियों को ही सूखा व गीला कचरा अलग करके दें। सांसद छत्रपाल गंगवार ने सराहा, बोले- कूड़े और फिजूलखर्ची से मिलेगी मुक्ति सांसद छत्रपाल गंगवार ने नगर निगम की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि हर गली-मोहल्ले से निकलने वाले अवशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी था। उन्होंने कहा कि घरों से आने वाले कचरे से प्लास्टिक अलग की जाएगी और जैविक कचरे से उच्च गुणवत्ता की कंपोस्ट खाद बनेगी। इस आधुनिक व्यवस्था से शहरवासियों को गंदगी से मुक्ति मिलेगी और नगर निगम के कचरा प्रबंधन पर होने वाले अनावश्यक खर्चों में भी भारी कमी आएगी। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया प्लांट का पूरा रोडमैप नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने जानकारी दी कि शहर में रोजाना लगभग 500 से 550 टन कूड़ा उत्पन्न होता है। सथरापुर में स्थापित 600 टीपीडी क्षमता का यह नया प्लांट अत्याधुनिक प्री-सॉर्टिंग यूनिट से लैस है, जो सूखे और गीले कचरे को अलग करता है। इसके बाद विंड्रो कंपोस्टिंग तकनीक के तहत केमिकल और बायो-एंजाइम्स की मदद से करीब 45 दिनों में खाद तैयार की जाएगी। कचरे से निकलने वाले आरडीएफ (RDF) और इनर्ट मटेरियल के निस्तारण के लिए सीमेंट व प्लास्टिक उद्योगों से अनुबंध किया जा चुका है। जीरो लैंडफिल मॉडल के साथ सीबीजी और फ्लोरल वेस्ट प्लांट की तैयारी नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि निगम का मुख्य लक्ष्य शहर को पूरी तरह ‘जीरो लैंडफिल’ मॉडल पर लाना है। इसके साथ ही भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि इंडियन ऑयल के साथ मिलकर कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट लगाने का प्रस्ताव प्रक्रिया में है। नाथ नगरी और आला हजरत की पावन धरती होने के कारण बरेली में मंदिरों व दरगाहों से भारी मात्रा में फूलों और नारियल का कचरा निकलता है, जिसके प्रसंस्करण के लिए ‘सिटीज 2.0’ के तहत अलग से विशेष प्लांट लगाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
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