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    ब्रेस्ट पकड़ना, नाड़ा तोड़ना रेप का प्रयास- सुप्रीम कोर्ट:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेप की कोशिश नहीं माना था, SC ने फैसला पलटा

    7 hours ago

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    सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि किसी लड़की के पायजामे का नाड़ा तोड़ना और स्तनों को पकड़ना रेप के प्रयास के आरोप के लिए पर्याप्त नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा- इस तरह की हरकत रेप का प्रयास मानी जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से जुड़ा है। साल 2022 में महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि गांव के तीन युवकों ने उसकी नाबालिग बेटी को घर छोड़ने के बहाने रोका और उसके साथ गलत हरकत की। आरोपियों ने बच्ची के निजी अंगों को पकड़ा और पायजामे की डोरी तोड़ दी। पीड़िता की मां की शिकायत पर तीनों आरोपियों के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। कासगंज की विशेष POCSO अदालत ने 2023 में आरोपियों को समन जारी किया था। इसके बाद आरोपियों ने मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 मार्च, 2025 को दिए आदेश में कहा था कि ये कृत्य रेप या रेप के प्रयास की श्रेणी में नहीं आते, इसके बाद ‘अटेम्प्ट टु रेप’ का आरोप हटाने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट का फैसला सामने आते ही विवाद बढ़ गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर 25 मार्च, 2025 को रोक लगा दी और अब उसे पूरी तरह रद्द कर दिया। चलिए सिलसिलेवार तरीके से पूरा मामला समझते हैं…. चलिए सिलसिलेवार तरीके से पूरा मामला समझते हैं…. 2021 में बच्ची के साथ तीन युवकों ने की छेड़खानी कासगंज की एक महिला ने 12 जनवरी, 2022 को कोर्ट में एक शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि 10 नवंबर, 2021 को वह अपनी 14 साल की बेटी के साथ कासगंज के पटियाली में देवरानी के घर गई थी। उसी दिन शाम को अपने घर लौट रही थी। रास्ते में गांव के रहने वाले पवन, आकाश और अशोक मिल गए। पवन ने बेटी को अपनी बाइक पर बैठाकर घर छोड़ने की बात कही। मां ने उस पर भरोसा करते हुए बाइक पर बैठा दिया, लेकिन रास्ते में पवन और आकाश ने लड़की के प्राइवेट पार्ट को पकड़ लिया। आकाश ने उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करते हुए उसके पायजामे की डोरी तोड़ दी। लड़की की चीख-पुकार सुनकर ट्रैक्टर से गुजर रहे सतीश और भूरे मौके पर पहुंचे। इस पर आरोपियों ने देसी तमंचा दिखाकर दोनों को धमकाया और फरार हो गए। पीड़ित की मां की शिकायत पर आरोपी पवन और आकाश के खिलाफ IPC की धारा 376, 354, 354B और POCSO एक्ट की धारा 18 के तहत केस दर्ज किया गया। वहीं आरोपी अशोक पर IPC की धारा 504 और 506 के तहत केस दर्ज किया। आरोपियों ने समन आदेश से इनकार करते हुए हाईकोर्ट के सामने रिव्यू पिटीशन दायर की। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन स्वीकार कर ली थी। हाईकोर्ट ने कहा था- पायजामे का नाड़ा तोड़ना अटेम्प्ट टु रेप नहीं 17 मार्च, 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने कहा- किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश से रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ का मामला नहीं बनता। उन्होंने फैसला सुनाते हुए 2 आरोपियों पर लगी धाराएं बदल दीं। वहीं 3 आरोपियों के खिलाफ दायर क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन स्वीकार कर ली। हाईकोर्ट ने आरोपी आकाश और पवन पर IPC की धारा 376 (बलात्कार) और POCSO अधिनियम की धारा 18 के तहत लगे आरोपों को घटा दिया। उन पर धारा 354(बी) (कपड़े उतारने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और POCSO अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया। साथ ही निचली अदालत को नए सिरे से समन जारी करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया और फैसले पर रोक लगाई हाईकोर्ट के फैसले पर कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने विरोध जताया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वतः संज्ञान लिया। 25 मार्च, 2025 को हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी गई। तत्कालीन CJI बी.आर. गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इस केस पर सुनवाई की थी। बेंच ने कहा, “हाईकोर्ट के आदेश में की गई कुछ टिप्पणियां पूरी तरह असंवेदनशील और अमानवीय नजरिया दिखाती हैं।” सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- ऐसी भाषा न बोलें, जो पीड़ित को डरा दे मामले पर 8 दिसंबर, 2025 को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था- हम सभी हाईकोर्ट के लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर सकते हैं। ऐसी टिप्पणियां पीड़ित पर चिलिंग इफेक्ट यानी भयावह प्रभाव डालती हैं और कई बार शिकायत वापस लेने जैसा दबाव भी पैदा करती हैं। अदालतों को, विशेषकर हाईकोर्ट को, फैसले लिखते समय और सुनवाई के दौरान ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियों से हर हाल में बचना चाहिए। -------------------- ये खबर भी पढ़ें इंस्पेक्टर की मीनाक्षी से 3 दिन में 100 बार बातचीत, कॉल रिकॉर्ड ने खोले राज; पिता बोला- बेटी चिंता मत कर, छुड़ा लेंगे जालौन के कुठौंद थाने में तैनात इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय (52) की मौत का राज गहराता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इंस्पेक्टर राय और महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा (28) के बीच 3 दिन में 100 से ज्यादा बार फोन पर बातचीत हुई। ज्यादातर वीडियो कॉल हैं। महिला सिपाही ने कुछ की रिकॉर्डिंग भी की है। पढ़िए पूरी खबर
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