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    बस्ती में कफन ओढ़कर डीएम ऑफिस के सामने लेटा बुजुर्ग:बोला- साहब, मुझे जिंदा कर दीजिए, कागजों में मृत दिखा जमीन दूसरे के नाम करने का आरोप

    4 hours ago

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    उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग डीएम कार्यालय पहुंचा और डीएम के चैंबर के सामने कफन ओढ़कर जमीन पर लेट गया। इस घटना से कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। इस दौरान बुजुर्ग ने अफसरों से कहा- “साहब, मुझे जिंदा कर दीजिए।” बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग ने उन्हें मृत घोषित कर उनकी 0.770 हेक्टेयर कृषि भूमि दूसरे के नाम दर्ज कर दी। उन्होंने बताया कि वे बैंक से पेंशन निकालकर अपना गुजारा कर रहे हैं, लेकिन रिकॉर्ड में अब भी मृत दिखाए जा रहे हैं। पीड़ित बुजुर्ग का कहना है कि वह पिछले 14 साल से सरकारी कागजों में मृत दर्ज हैं। उन्होंने कई बार शिकायत की और अपने जीवित होने के सबूत भी दिए, लेकिन अब तक सुधार नहीं हुआ। मामला लालगंज थाना क्षेत्र के बानपुर गांव का बताया जा रहा है। जानिए पूरा मामला पूरा मामला लालगंज थाना अंतर्गत ग्राम बानपुर गांव का है। पीड़ित इशहाक अली पुत्र फुल्लूर संतकबीर नगर के नाथनगर सीएचसी में स्वीपर के पद पर तैनात थे। रिकॉर्ड बताते हैं कि इशहाक अली ने 31 दिसंबर 2019 को अपनी सेवा पूरी की और विभाग ने उन्हें ससम्मान विदाई दी। बुजुर्ग इशहाक अली ने तत्कालीन राजस्व निरीक्षक ललित कुमार मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए 2 दिसंबर 2012 को कागजों में उन्हें मृत दर्ज कर दिया। मौत दर्ज होते ही उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि गाटा संख्या 892 को गांव की ही एक महिला शाहिदुन्निशा के नाम चढ़ा दिया गया। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2012 से 2019 के बीच, जब राजस्व विभाग के अनुसार इशहाक अली की मौत हो चुकी है। उसी दौरान स्वास्थ्य विभाग उन्हें हर महीने वेतन दे रहा था। इशहाक अली आज भी जीवित हैं और सरकार से नियमानुसार पेंशन ले रहे हैं। उनके पास पेंशन पेमेंट ऑर्डर है, बैंक का स्टेटमेंट है और जीवित होने का प्रमाण पत्र भी है। बावजूद इसके, तहसील के सरकारी कागजो में उन्हें 'मृत' बताकर उनकी जमीन किसी और के नाम कर दी गई। पीड़ित का कहना है कि वह पिछले कई सालों से अधिकारियों के ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं पर कोई भी सुनवाई नहीं हो रही है। अधिकारीयों के दफ्तरों में लग रहे चक्कर पीड़ित बुजुर्ग ने कहा- साहब, मैं हर दिन खुद को जिंदा साबित करने के लिए दस्तावेज दिखाता हूं। सरकार मुझे पेंशन दे रही है ताकि मैं पेट भर सकूं, लेकिन मेरे अपनों और मेरे गांव में मुझे कागजी तौर पर मार दिया गया है। कहा मेरी जमीन मेरी पहचान है, और मैं अपनी पहचान वापस लेने के लिए कई साल से अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा हूं। आजमगढ़ में भी ऐसा केस आया था सामने आजमगढ़ के मशहूर लाल बिहारी जिन्होंने खुद को जिंदा साबित करने के लिए 18 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी। बस्ती का यह मामला उससे भी गंभीर है क्योंकि यहां पीड़ित एक सरकारी मुलाजिम रहा है। इस प्रकरण को लेकर एसडीएम शत्रुघ्न पाठक से जब बात की गई तो उन्होंने बताया एक व्यक्ति उनके पास आए हैं, जो खुद को जीवित बता रहे हैं, मामले में जांच कर दोषी कर्मचारी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ------------------------------------------ ये खबर भी पढ़ेंः- युवक करंट से जिंदा जला, सिर अलग होकर नीचे गिरा:धड़ तारों में फंसकर जलता रहा, बदायूं में पोल पर चढ़कर बिजली ठीक कर रहा था बदायूं में बिजली के खंभे पर चढ़े युवक की जिंदा जलकर मौत हो गई। करंट के बाद आग इतनी तेजी से लगी कि उसका धड़ तारों में फंस गया, जबकि सिर अलग होकर नीचे गिर गया। परिजनों का आरोप है कि वह लाइनमैन के कहने पर पोल पर चढ़ा था। लाइनमैन ने शटडाउन लिया था, लेकिन अचानक बिजली सप्लाई चालू कर दी गई। पढ़ें पूरी खबर…
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