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    बदायूं डबल मर्डर केस में मुठभेड़ पर सवाल:पुलिस की FIR में खुलासा- तमंचा बरामदगी में आरोपी को जीप से उतारकर अकेले भेजा

    1 hour ago

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    बदायूं के एचपीसीएल प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड के आरोपी अजय प्रताप के पुलिस मुठभेड़ में घायल होने का मामला अब सवालों के घेरे में आ गया है। हैरानी की बात यह है कि ये सवाल किसी और ने नहीं, बल्कि खुद पुलिस की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) से उठ रहे हैं। एफआईआर के मुताबिक, तमंचा बरामदगी के दौरान आरोपी को जीप से उतारकर अकेले आगे भेजा गया था और उस समय उसके साथ कोई पुलिस टीम या सुरक्षा घेरा मौजूद नहीं था। मूसाझाग थाने के प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र तोमर की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में बताया गया है कि पुलिस टीम आरोपी अजय प्रताप को उसके बताए स्थान से तमंचा बरामद कराने के लिए साथ लेकर गई थी। रास्ते में मुड़सेना रोड नहर क्रॉसिंग के पास आरोपी ने गाड़ी रुकवाई और जीप से उतरकर आगे बढ़ गया। बताया गया कि वह झाड़ियों तक पहुंचा और वहां से तमंचा व कारतूस निकाल लिए। भागने की कोशिश में हुई मुठभेड़, टांग में लगी दो गोलियां एफआईआर के अनुसार, तमंचा निकालने के बाद आरोपी अचानक सूखी नहर की ओर भागने लगा। उसने पुलिस को ललकारते हुए कहा कि “एक-दो पुलिस वाले भी मेरे हाथ से मारे जाएंगे।” इसके बाद पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें आरोपी की टांग में दो गोलियां लगीं। इस दौरान एक सिपाही के घायल होने का भी जिक्र किया गया है। FIR से उठे कई बड़े सवाल पूरे घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे पहला सवाल यह है कि जब आरोपी को बरामदगी के लिए पुलिस अपने साथ ले गई थी, तो क्या उसे हथकड़ी नहीं लगाई गई थी। इसके अलावा यह भी सवाल है कि क्या आरोपी को पुलिस के सुरक्षा घेरे में नहीं रखा गया था। जब वह जीप से उतरा, तो उसके साथ कोई पुलिसकर्मी मौजूद क्यों नहीं था। पुलिस की मौजूदगी में आरोपी कैसे निकाल लाया तमंचा सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस की मौजूदगी में आरोपी अकेले झाड़ियों तक कैसे पहुंच गया, वहां से तमंचा निकाल लिया और फिर ललकारते हुए भागने भी लगा। इसके अलावा घटनास्थल पर आरोपी द्वारा की गई फायरिंग के कारतूस के खोखे तो बरामद होने की बात कही गई है, लेकिन इंस्पेक्टर की सरकारी पिस्टल से आत्मरक्षार्थ चलाई गई गोलियों के खोखे बरामद नहीं हुए हैं। लापरवाही या सुनियोजित मुठभेड़, उठ रहे संदेह ऐसे में पूरे मामले को लेकर संदेह गहरा गया है। यह स्थिति या तो पुलिस की गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है, या फिर यह आशंका भी जताई जा रही है कि आरोपी को जानबूझकर भागने का मौका दिया गया, ताकि उसे मुठभेड़ में गोली मारी जा सके।
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