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    बेवजह परेशान को दाखिल जनहित याचिका खारिज:घरों को बताया था अतिक्रमण, बेदखल करने की थी मांग

    1 hour ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थाना दन्नाहार,जिला मैनपुरी की गांव सभा जिंदपुर स्थित मिनजुमला (कई लोगों की साझी जमीन)प्लाट संख्या 2666 एरिया 20.145 हेक्टेयर से अतिक्रमण हटाने व अवैध निर्माण रोकने की मांग में दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा साझी जमीन में 18 खातेदार है। राजस्व संहिता की धारा 30 जमीन के बंटवारे का उपबंध करती है।ऐसा न कर अन्य खातेदारो की बेदखली के लिए जनहित याचिका दायर करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।याची के पिता के खिलाफ भी इसी जमीन को लेकर धारा 67मे कार्यवाही चल रही है और दूसरों के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। जिसकी सुनवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट ने विपक्षी अजय कुमार उर्फ मिंटू के घर को कुर्क करने के अंतरिम आदेश को विखंडित करते हुए घर वापस करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय ने शिवम चौहान की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका का अधिवक्ता ने विरोध किया और कहा कि याचिका केवल प्राइवेट विपक्षियों को अनावश्यक परेशान करने के लिए दाखिल की गई है।जबकि उनका निर्माण अपने नाम दर्ज जमीन के हिस्से पर है।जिसे अनधिकृत बताया गया था। राज्य सरकार ने भी हलफनामा दाखिल कर कहा कि प्लाट संख्या 2666एम संयुक्त जमीन है।जिसके 18खाते है।याची के पिता के खिलाफ केस दर्ज है। विपक्षी छः अजय कुमार का नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज है।वह कब्जे में है।शेष विपक्षी गण 7,10,11,12 का आबादी की जमीन पर घर है।जिसको कुर्क नहीं किया जा सकता। जनहित याचिका कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। मालूम हो कि जनहित याचिका दायर कर विपक्षियों को विवादित प्लाट से बेदखल करने की मांग की गई।कहा यह जमीन पूर्वी पाकिस्तान से भागकर आये लोगों के लिए सुरक्षित है।जिसपर विपक्षियों ने अतिक्रमण कर लिया है और निर्माण कर रहे हैं। कोर्ट ने यथास्थिति कायम रखने और निर्माण कुर्क करने का आदेश देते हुए सरकार से जानकारी मांगी। बताया कि जमीन का हिस्सा अजय कुमार की मां के नाम था,उनकी मौत के बाद अजय कुमार के नाम आया है।पूर्व निर्मित ढांचे पर अपना मकान बनाया है। विवादित प्लाट में 18खातेदार है। कोर्ट ने निषेधाज्ञा के विपरीत निर्माण होने देने पर नाराजगी जताई, जिलाधिकारी मैनपुरी को कारण बताओ नोटिस दी कि अवमानना कार्यवाही क्यों न की जाय। इसके बाद सरकार की तरफ से विस्तृत जवाबी हलफनामा दायर किया गया और स्थिति का खुलासा किया गया। आपत्ति की गई कि जनहित याचिका व्यक्तिगत हित में है पोषणीय नहीं है। मकान रिहायशी जमीन पर है कुर्क नहीं किया जाना चाहिए।जिसपर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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