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    चित्रकूट में खनिज न्यास निधि की बैठक:खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, स्वास्थ्य-शिक्षा पर अहम फैसले

    1 hour ago

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    चित्रकूट कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार को डीएम पुलकित गर्ग की अध्यक्षता में जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) की शासी परिषद एवं प्रबंध समिति की समीक्षा बैठक हुई। इसमें खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा कर उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डीएमएफ निधि से संचालित सभी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। इसका उद्देश्य खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने आगामी कार्ययोजना में स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े प्रस्तावों को विशेष प्राथमिकता देने पर जोर दिया। बैठक में लगभग 29.95 करोड़ रुपये की लागत से दो चेक गेट और एक मिनी कमांड सेंटर के संचालन व अनुरक्षण कार्य की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त, जिले में संचालित दो चेक गेटों के वार्षिक अनुरक्षण और बिजली बिल भुगतान को भी स्वीकृति दी गई। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए डीएमएफ खातों के ऑडिट हेतु 52.80 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव भी रखा गया। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाओं को मंजूरी मिली। इनमें जिला चिकित्सालय में अस्थि रोग व नेत्र सर्जरी से संबंधित उपकरण उपलब्ध कराना, पीएचसी और सीएचसी को सुदृढ़ करना, तथा लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर का उच्चीकरण शामिल है। दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए मोटरसाइकिल एंबुलेंस सेवा शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भरतकूप खनन क्षेत्र के आसपास की दस ग्राम पंचायतों में लगभग 50 लाख रुपये की लागत से सिलाई केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण, ईसीसीई (प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा) सामग्री उपलब्ध कराने और विद्यालयों में स्मार्ट क्लास बनाने के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने खनन क्षेत्रों में बढ़ रही अस्थमा और टीबी जैसी बीमारियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने क्रेशर संचालकों को सड़कों और कार्यस्थलों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराने का निर्देश दिया, ताकि धूल के कणों को नियंत्रित किया जा सके। साथ ही, माइनिंग क्षेत्र में कार्यरत सभी मजदूरों का श्रम विभाग के माध्यम से अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डी.पी. पाल, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) चंद्रशेखर, माइनिंग अधिकारी रणवीर सिंह सहित समिति के सदस्य और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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