Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    चित्रकूट में मंदाकिनी संरक्षण पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू:दीनदयाल शोध संस्थान ने सीवेज, बाढ़ प्रबंधन पर विशेषज्ञों को बुलाया

    2 hours ago

    1

    0

    चित्रकूट में मां मंदाकिनी के निर्मल और अविरल प्रवाह को बनाए रखने के उद्देश्य से दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआई) द्वारा दो दिवसीय विचार-विमर्श बैठक-सह-कार्यशाला का शुभारंभ शुक्रवार को आरोग्यधाम सभागार में हुआ। यह आयोजन 25 और 26 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें विशेषज्ञ सीवेज प्रबंधन, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और बाढ़ प्रबंधन पर मंथन कर रहे हैं। इस दौरान क्षेत्रीय सर्वेक्षण के माध्यम से व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार करने की पहल भी शुरू की गई है। कार्यशाला में आईआईटी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनसीजीएम) और केंद्रीय भूजल बोर्ड सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन के स्वागत उद्बोधन से हुआ। अभय महाजन ने अपने संबोधन में कहा कि चित्रकूट के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए इसके विकास के लिए जनता की भागीदारी, पुरुषार्थ और शासकीय व सामाजिक संगठनों के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने जोर दिया कि माँ मंदाकिनी केवल एक नदी नहीं, बल्कि चित्रकूट की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान है, जिसके संरक्षण के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। डीआरआई के कोषाध्यक्ष वसंत पंडित ने बताया कि चित्रकूट मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिक क्षेत्र है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि बीते वर्षों में बढ़ते मानवजनित दबाव और बार-बार आने वाली मौसमी बाढ़ के कारण मंदाकिनी नदी की पारिस्थितिकी प्रभावित हुई है। इन चुनौतियों के समाधान के लिए एक समन्वित और बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भोपाल के निदेशक डॉ. अजीत कुमार विद्यार्थी ने जानकारी दी कि दीनदयाल शोध संस्थान ने पर्यावरणीय पुनरुद्धार, नदी के निर्मल-अविरल स्वरूप को बनाए रखने और बाढ़ प्रबंधन के लिए एक व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार करने की पहल की है। इसी उद्देश्य से यह दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई है। कार्यशाला के पहले दिन विशेषज्ञों ने विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्रों के लिए 12 संभावित स्थलों का निरीक्षण किया। इसके अतिरिक्त, ब्रह्मकुंड, बरहा और किल्होरा से रामघाट तक मंदाकिनी/पैसुनि नदी का सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान नालों व प्रदूषण स्रोतों की पहचान, ठोस अपशिष्ट व प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, जैव विविधता पार्क और आर्द्रभूमि विकास के संभावित स्थलों का आकलन भी किया गया। दूसरे दिन फील्ड सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर तकनीकी मंथन किया जाएगा, जिसके आधार पर एक विस्तृत कार्ययोजना और रोडमैप तैयार किया जाएगा।
    Click here to Read more
    Prev Article
    अखिलेश यादव 30 अप्रैल को हरदोई आएंगे:मल्लावां में शिल्पी हत्याकांड में पीड़ित परिवार से करेंगे मुलाकात
    Next Article
    बदायूं में पति-पत्नी से लाखों की लूट:सिर पर तमंचे की बट मारी, पुलिस बोली- ड्रामा कर रहे हैं, 11 लाख का उधार है

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment