Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    CJI Surya Kant की Bench का सख्त रुख, Public Safety की PIL पर कहा- हम सरकार नहीं, देश नहीं चला सकते

    3 hours from now

    1

    0

    देश में सड़कों, पुलों और बिजली व्यवस्था जैसी सार्वजनिक संरचनाओं की सुरक्षा को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इस तरह की व्यापक मांगों पर निर्देश देना संभव नहीं है और न्यायालय पूरे देश का संचालन नहीं कर सकता है।मौजूद जानकारी के अनुसार प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें इतनी व्यापक और अलग-अलग तरह की मांगें शामिल हैं कि उन पर एक साथ आदेश देना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता है।गौरतलब है कि अदालत ने याचिका की तुलना एक ऐसे स्थान से की जहां हर तरह की मांग रख दी गई हो। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिका किसी प्रदर्शन कक्ष या खरीदारी केंद्र की तरह लगती है, जिसमें गड्ढों वाली सड़कों की मरम्मत से लेकर अधूरे पुलों के निर्माण तक हर प्रकार की राहत मांग ली गई है।सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि इस तरह की व्यापक मांगों के साथ सर्वोच्च न्यायालय से पूरे देश के लिए निर्देश जारी करने की अपेक्षा करना उचित नहीं है।अदालत ने यह भी कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर आदेश देने के लिए राज्यों की वित्तीय स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों को समझना जरूरी होता है। ऐसे मामलों में संबंधित उच्च न्यायालय अधिक उपयुक्त मंच होते हैं क्योंकि उन्हें अपने राज्य की प्रशासनिक और आर्थिक स्थिति की बेहतर जानकारी रहती है।मौजूद जानकारी के अनुसार याचिका में केंद्र सरकार और अन्य संबंधित संस्थाओं को कई प्रकार के निर्देश देने की मांग की गई थी। इनमें सार्वजनिक ढांचे जैसे सड़क, पुल और बिजली की तारों की नियमित जांच, रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात शामिल थी।याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि देश भर में सार्वजनिक ढांचे की लापरवाही के कारण कई लोगों की जान चली जाती है, इसलिए इस दिशा में सख्त और व्यवस्थित निगरानी जरूरी है।गौरतलब है कि याचिका में एक उच्चस्तरीय स्वतंत्र सुरक्षा जांच समिति गठित करने की मांग भी की गई थी। इस समिति में सिविल इंजीनियर, बुनियादी ढांचा विशेषज्ञ, फोरेंसिक जांचकर्ता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया था।इसके अलावा याचिका में यह भी मांग की गई थी कि वर्ष दो हजार बीस के बाद से सार्वजनिक ढांचे से जुड़ी दुर्घटनाओं और मौतों का पूरा आंकड़ा एकत्र किया जाए, उसे डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जाए और हर तीन महीने में जिलेवार रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पेश की जाए।हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है। अदालत ने केवल इतना कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों को अधिक स्पष्ट और सीमित दायरे में लाकर संबंधित उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सकता है।अदालत के अनुसार यदि याचिकाकर्ता उचित तरीके से तैयार की गई नई याचिका के साथ उच्च न्यायालय का रुख करता है तो वहां इस विषय पर विस्तार से विचार किया जा सकता है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Israel US Iran War Updates LIVE: USA ने मुज्तबा की जानकारी देने वाले को 10 मिलियन डॉलर इनाम की घोषणा की
    Next Article
    Iran Israel War: ईरान-इजरायल जंग में रूस को होने वाला है जबरदस्त फायदा... समझिए क्या है 'तेल के खेल' का पूरा माजरा

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment