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    डॉक्टरों की 14 दिन न्यायिक रिमांड मंजूर:कानपुर में होमगार्ड भर्ती में घूस लेने के आरोप में कार्रवाई, ड्राइवर को राहत

    4 hours ago

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    कानपुर में होमगार्ड भर्ती घूसकांड मामले में आरोपी डॉ. प्रवीण कुमार और डॉ. महेश कुमार द्विवेदी को शनिवार देर रात पुलिस ने जेल भेज दिया गया। जेल जाने से बचने के लिए आरोपी डॉक्टर एंजाइना, सर्वाइकल जैसी बीमारियों का हवाला देकर उर्सला अस्पताल में भर्ती हो गए। तमाम तरह के दांवपेच आजमाने के बाद भी वह जेल जाने से नहीं बच सके। साथी डॉक्टरों से सांठ-गांठ कर खुद की हालत गंभीर बताते हुए एक महीने का बेडरेस्ट भी लिखवा लिया, लेकिन यह सारे हथकंडे हैलट अस्पताल पहुंचते ही फेल हो गए। शनिवार रात करीब 11 बजे पुलिस दोनों आरोपी डॉक्टरों को हैलट अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने सघन जांच शुरू की तो हकीकत कुछ और निकली। आरोपी डॉक्टरों की सभी जांच रिपोर्ट उनके पूरी तरह से स्वस्थ्य होने के दावे कर रही थीं। इसके बाद पुलिस देर रात करीब 11:40 पर पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया। हालांकि ड्राइवर अजीत का न्यायिक रिमांड खारिज होने की वजह से वह जेल जाने से बच गया। इसके पीछे कोतवाली पुलिस की लापरवाही रही। अब पहले जानिए पूरा मामला… पुलिस लाइन में 15 अक्टूबर को होमगार्ड भर्ती परीक्षा के लिए परीक्षार्थियों के दस्तावेज और मेडिकल चेकअप किया जा रहा था। इसके लिए पहले दिन 200 अभ्यर्थियों को परीक्षण के लिए बुलाया गया। मेडिकल परीक्षण के लिए सीएमओ हरिदत्त नेमी की ओर से चार–चार सदस्यीय डॉक्टरों के दो पैनल गठित किए गए थे। इसमें डॉ. प्रवीण, डॉ. महेश द्विवेदी और डॉ. देवेंद्र सिंह राजपूत भी अभ्यर्थियों का डॉक्टरी परीक्षण कर रहे थे। रात करीब आठ बजे परीक्षार्थियों ने डॉक्टरों पर नाक टेढ़ी और आंख में दिक्कत बताकर पास कराने के नाम पर रुपये मांगे गए। परीक्षा पास कराने के नाम पर रुपये मांगने को लेकर अभ्यर्थियों ने हंगामा शुरू कर दिय और डॉ. प्रवीण के ड्राइवर अजीत को जमकर पीटा था। इस मामले में होमगार्ड इंस्पेक्टर सुधांशु सिंह की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने अजीत कुमार, डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. महेश कुमार द्विवेदी, डॉ. देवेंद्र सिंह राजपूत और दो अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अरेस्ट होते ही तीनोंं ने खुद को बीमार बताया पुलिस ने डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. महेश कुमार द्विवेदी और अजीत को अरेस्ट कर लिया था। शुक्रवार को पुलिस तीनों का मेडिकल कराने उर्सला पहुंची, जहां तीनों ने हालत बिगड़ने की बात कही। डॉ प्रवीण ने खुद को एंजाइना बीमारी से परेशान, डॉ महेश ने सर्वाइल और अजीत ने हेंड इंजरी होने का हवाला दिया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने तीनों को अस्पताल में एडमिट कर लिया था। वहीं शुक्रवार देर शाम अस्पताल में डॉ. प्रदीप और डॉ. महेश का 14 दिनों के लिए न्यायिक रिमांड मंजूर हो गई, जबकि ड्राइवर अजीत के खिलाफ लगाए आरोप कोतवाली पुलिस साबित नहीं कर सकी। ऐसे में उसका न्यायिक रिमांड नहीं दिया गया। इंजाइना और स्पाइन की परेशानी बताकर रेफर हुए, जांच में फिट मिले शनिवार को उर्सला की निदेशक डॉ. सीमा श्रीवास्तव ने बताया कि डॉ. प्रवीण कुमार को इंजाइना की गंभीर समस्या है। जिसके चलते उन्हें कार्डियोलॉजी भेजा गया है जबकि डॉ. महेश को स्पाइन की दिक्कत और अजीत को हेड इंजरी के चलते हैलट रेफर किया गया था। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक डॉ. प्रवीण का इलाज उर्सला के डॉ. सपन गुप्ता कर रहे थे। जिन्होंने मेडिकल रिपोर्ट में बताया था कि डॉ. प्रवीण की स्थिति क्रिटिकल है, मूवमेंट पर जान का खतरा है, जिसपर उन्हें एक महीने तक बेडरेस्ट पर रखने की सलाह दी थी। डॉक्टर की सलाह पर शनिवार रात करीब 11 बजे दोनों डॉक्टरों के इलाज के लिए पुलिस हैलट अस्पताल पहुंची तो उनकी हालत सामन्य निकली, जिसके बाद करीब 11:40 पर पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया। भर्ती स्थल पर ड्राइवर के होने की बात साबित नहीं कर सकी पुलिस अभ्यर्थियों ने ड्राइवर अजीत को कैश रुपए देने के आरोप लगाए थे। ऐसे में पुलिस को अभ्यर्थियों की ओर से दिए गए रुपए की बरामदगी करने का प्रयास करना चाहिए था, लेकिन पुलिस उसके पास से कोई बरामदगी नहीं कर सकी। ड्राइवर न तो सरकारी कर्मचारी है और न ही पुलिस उसके भर्ती स्थल में होने की बात साबित कर सकी। यही कारण रहे कि उसका न्यायिक रिमांड नहीं मिला। 200 में 180 का हुआ था परीक्षण 70 किए गए फेल मेडिकल परीक्षा के पहले दिन परीक्षा सुबह नौ बजे शुरू होनी थी लेकिन डॉ. प्रवीण दोपहर एक बजे के बाद पहुंचे। जिसके बाद मेडिकल परीक्षण शुरू हो सका। मेडिकल टेस्ट में पहले दिन 200 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया,जिनमें से 180 का परीक्षण किया गया। शुरूआत में करीब 20 अभ्यर्थियों का सही परीक्षण हुआ, उसके बाद नाक, आंख में दिक्कत बताकर फेल किया जाने लगा। करीब 70 अभ्यर्थियों को फेल किया गया। फिर पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों को पर्ची पर एक नंबर लिखकर दिया गया और उस पर संपर्क करने को कहा गया। एसीपी कोतवाली अमित पांडेय ने बताया था कि परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों के बैग और मोबाइल जमा थे, लेकिन एक चपरासी के कहने पर अभ्यर्थियों को बैग दे दिए गए। इसी के बाद मोबाइल से ट्रांजेक्शन हुआ। कुछ अभ्यथियों ने फोन करके परिजनों को पैसा लेकर बुलाया। इस तरह खुली डॉक्टरों के भ्रष्टाचार की पोल होमगार्ड मेडिकल परीक्षा के लिए दो भाइयों को चयन हुआ था। पैसा देने के बाद एक भाई को मेडिकल हो गया। उसे फिट कर दिया गया। इसी बीच दूसरा भाई भी डॉक्टरों के एजेंट को पैसा देकर पहुंचा। यहां लाइन लगी हुई थी। उस अभ्यर्थी ने पहले मेडिकल करने को कहा तो दूसरे अभ्यर्थियों ने विरोध शुरू कर दिया। उसने कहा, मेरा मेडिकल पहले होगा। मैने पैसा दिया है। उससे अभ्यर्थियों ने पूछा तो उसने डॉ. प्रवीण का नाम लिया। जिसके बाद रुपये देने का खुलासा हुआ। 10 से 50 हजार रुपये तक वसूला गया परीक्षार्थियों ने आरोप लगाया कि मेडिकल पैनल में मौजूद डॉक्टर नाक टेढ़ी और आंख में समस्या होने की बात बताकर परीक्षार्थियों को अनफिट करने लगे। नाक टेढ़ी बताकर 10 से 15 हजार रुपए जबकि आंख में दिक्कत होने पर 50 हजार रुपए मांगे गए। पुलिस की जांच में सामने आया कि डॉ. प्रवीण का ड्राइवर अजीत रुपए वसूल रहा था। उसने यूपीआई के जरिये कई खातों में घूस की रकम ली। पुलिस को कई यूपीआई ट्रांजेक्शन आईडी मिली हैं, जिससे अभ्यर्थियों ने रुपए ट्रांसफर किए हैं। फोन पे करने के भी साक्ष्य पुलिस को मिले हैं। पुलिस के मुताबिक करीब 40 अभ्यर्थियों ने रुपये देने का आरोप लगाया है। पुलिस को 22 अभ्यर्थियों से तीन लाख रुपए से अधिक की वसूली के साक्ष्य भी मिले हैं।
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