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    DDU में नेशनल सेमिनार में इंडियन नॉलेज सिस्टम चर्चा हुई:एक्सपर्ट बोलें- भूगोल सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, हमारी संस्कृति और पहचान है

    10 hours ago

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    दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के जिओग्राफी डिपार्टमेंट की ओर से इंटरनेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसके दूसरे सेशन में एक्सपर्ट्स ने इंडियन नॉलेज सिस्टम और भारत की वैश्विक भूमिका पर विस्तार से चर्चा किया। इस दौरान सभी वक्ताओं ने अलग-अलग सब्जेक्ट्स पर अपने विचार रखें और अनुभवों को साझा करते हुए महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस सेमिनार में डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। सेशन के सह-अध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि भूगोल को सिर्फ 'स्थान या जमीन' के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। हमारी परंपराओं और ज्ञान ने ही 'विशाल भारत' की पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि भारतीय सोच में शुरू से ही पूरे देश को एक सूत्र में पिरोकर देखने की परंपरा रही है। दुनिया का पेट भरने के लिए तैयार है भारत- डॉ. राम चेत चौधरी मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. राम चेत चौधरी ने भारत की खेती और भोजन की ताकत पर बात की। उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारत अपनी खाने की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर था, लेकिन आज हम न सिर्फ अपनी बड़ी आबादी का पेट भर रहे हैं। बल्कि पूरी दुनिया को भोजन देने (फूड बास्केट) की काबिलियत रखते हैं। उन्होंने बताया कि इंसान और पौधों का यह रिश्ता आज का नहीं, बल्कि 30,000 साल पुराना है। गंगा घाटी और इतिहास का संबंध प्रो. जे.एन. सिन्हा ने बताया कि भूगोल किस तरह इतिहास को बनाने में मदद करता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि मध्य गंगा घाटी की खास बनावट और वहां के माहौल ने ही प्राचीन भारत की बड़ी सभ्यताओं को जन्म दिया और उनके विकास में मुख्य भूमिका निभाई। 'धरती हमारी मां है' का दिया संदेश डॉ. रुचिका सिंह ने 'भारतीय ज्ञान परंपरा' (IKS) को समझाते हुए कहा कि यह सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि हमारे जीने के तरीके और रोजमर्रा के काम (कौशल) में बसी है। उन्होंने 'धरती हमारी मां है' का संदेश देते हुए कहा कि हमारा ज्ञान पूरी तरह से कर्म पर आधारित है। सत्र की अध्यक्षता कर रहे डॉ. बी.एन. सिंह ने सभी वक्ताओं के विचारों को समाहित करते हुए भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक अखंडता पर बल दिया। सत्र के सह-अध्यक्ष प्रो. सी.पी. सिंह ने भी अपने विचार साझा किए। सत्र के अंत में डॉ दीपेन्द्र मोहन सिंह ने सभी विद्वानों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान विभिन्न विभागों के आचार्य, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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