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    DM ने कारीखेड़ा गौ संरक्षण केंद्र का किया निरीक्षण:पेयजल, चारे और देखभाल पर निर्देश, हर तीसरे दिन बाहर छोड़े जाएं

    3 hours ago

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    फिरोजाबाद। भीषण गर्मी के मद्देनजर जिलाधिकारी (डीएम) रमेश रंजन ने सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) शत्रोहन वैश्य के साथ विकासखंड अरांव के ग्राम कारीखेड़ा स्थित वृहद गौ संरक्षण केंद्र का औचक निरीक्षण किया। 600 गौवंशों की क्षमता वाले इस केंद्र में डीएम ने गौवंशों के रखरखाव, हरे चारे, भूसे, पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान, जिलाधिकारी ने केंद्र में मौजूद गौवंशों की संख्या का भौतिक सत्यापन कराया। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि वर्तमान में केंद्र में 50 नर गौवंश और लगभग 50 छोटे बछड़े मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त, 8 से 10 गौवंश दुधारू स्थिति में हैं। डीएम ने गौवंशों के स्वास्थ्य, उनके खानपान और रहने की व्यवस्था के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। बढ़ती गर्मी को देखते हुए, जिलाधिकारी ने विशेष रूप से पेयजल की व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने पानी के टैंकों और पशुओं के लिए बनाए गए पीने के स्थानों का जायजा लिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में गौवंशों के लिए पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। डीएम ने जोर दिया कि गर्मी के मौसम में पशुओं के स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त पानी और छांव की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। केंद्र में स्थापित गोबर गैस प्लांट का भी जिलाधिकारी ने निरीक्षण किया। ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया को समझा उन्होंने वहां अपशिष्ट प्रबंधन और उससे होने वाले ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया को समझा। अधिकारियों ने बताया कि गोबर गैस प्लांट के माध्यम से गोबर का उपयोग ऊर्जा उत्पादन और अन्य कार्यों में किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने इस पर संतोष व्यक्त किया और इसे और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर, डीएम ने एक बछिया को माला पहनाई और उसे गुड़ खिलाकर आत्मीयता का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि गौवंशों की देखभाल केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का विषय है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि गौवंशों को विचरण के लिए सप्ताह में केवल एक बार बाहर छोड़ा जाता है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए उन्हें नियमित रूप से खुली जगह में छोड़ा जाना आवश्यक है, इसलिए अब गौवंशों को सप्ताह में एक दिन के बजाय प्रत्येक तीन दिन के अंतराल पर बाहर छोड़ा जाए। डीएम रमेश रंजन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि कारीखेड़ा की इस वृहद गौशाला को और अधिक उन्नत तथा आधुनिक बनाया जाए, ताकि इसे जिले की मॉडल गौशाला के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यहां की व्यवस्थाएं अन्य गौ संरक्षण केंद्रों के लिए भी उदाहरण बननी चाहिए।
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