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    Donald Trump के 'टैरिफ बम' पर भारत का करारा जवाब! MEA की दहाड़- एक अरब चालीस करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा से रत्ती भर समझौता नहीं!

    1 hour ago

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    अमेरिकी कांग्रेस में 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' के पारित होने के बाद भारत सरकार ने कड़ा, संतुलित और बेहद स्पष्ट रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने अमेरिकी संसद के इस नए विधायी घटनाक्रम का गहराई से संज्ञान लिया है और वाशिंगटन में चल रही आगे की गतिविधियों पर बारीक नजर रखी जा रही है। भारत सरकार ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर यह दृढ़ संदेश दिया है कि देश के 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना उसकी सबसे पहली और गैर-समझौतावादी जिम्मेदारी है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत अपने घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति हासिल करना जारी रखेगा, और बाजार की बदलती परिस्थितियों व गतिशील प्राथमिकताओं के आधार पर अपने ऊर्जा व्यापार को पूरी तरह से स्वतंत्र रखेगा।रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर विदेश मंत्रालय का बयानरूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के बारे में विदेश मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार इसके असर से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।यह घटनाक्रम तब हुआ है जब अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ने एक बिल पास किया है। यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर प्रतिबंध लगाने और भारत व चीन समेत तेल और गैस के क्षेत्र में रूस के व्यापारिक साझेदारों पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का अधिकार देगा। 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' नाम का यह बिल पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने पास किया था और बुधवार शाम हाउस ने 262-159 वोटों से इसे मंज़ूरी दी। अब यह बिल ट्रंप के पास कानून बनने के लिए हस्ताक्षर हेतु जाएगा।रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के पक्ष में किसने वोट दिया?इस कानून के पक्ष में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सदस्य ने वोट दिया। सात रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट ने इसका विरोध किया। डेमोक्रेट्स का विरोध मुख्य रूप से ट्रंप को दिए गए टैरिफ लगाने के अधिकारों को लेकर था।इस नए बिल का नाम साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिनका जुलाई में निधन हो गया था। उन्होंने इस बिल के लिए समर्थन जुटाने में एक साल से ज़्यादा समय बिताया था।बिल पर बहस के दौरान डेमोक्रेट कांग्रेसी रिचर्ड नील ने कहा, "हम इस राष्ट्रपति को और ज़्यादा टैरिफ अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं।" नया बिल न केवल रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाने की बात करता है, बल्कि उन जहाज़ों के "शैडो फ्लीट" (गुप्त बेड़े) पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव करता है, जिनकी मदद से मॉस्को तेल की डिलीवरी पर लगे प्रतिबंधों से बचता है।इसे भी पढ़ें: गुरुग्राम के वेलनेस स्पा की आड़ में देहव्यापार गिरोह का भंडाफोड़, 13 लोग गिरफ्तार, अनैतिक व्यापार अधिनियम के तहत मामला दर्जनया बिल ट्रंप को चीन और भारत पर टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव करता हैनया बिल ट्रंप को चीन, भारत और अन्य देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव करता है ताकि रूसी तेल और गैस पर उनकी निर्भरता कम हो सके। साथ ही, यह ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव करता है। बिल पास होने के बाद डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने पत्रकारों से कहा, "चीन और भारत, बेहतर होगा कि आप अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें।" यह ध्यान देना ज़रूरी है कि यह बिल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका की आधिकारिक यात्रा से कुछ दिन पहले पास हुआ है। गौरतलब है कि पिछले महीने सीनेट ने भारी बहुमत (86-11 वोटों) से इस बिल को पास कर दिया था, लेकिन हाउस में इसकी रफ़्तार धीमी पड़ गई थी। अहम बात यह है कि हाउस में यह बिल उस आखिरी दिन पास हुआ जब 3 नवंबर के चुनावों से पहले वोटिंग के लिए हाउस का सत्र चल रहा था।इसे भी पढ़ें: Jammu and Kashmir Udhampur Encounter | उधमपुर के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, दो आतंकवादी ढेर, सर्च ऑपरेशन जारीइस बिल पर वोटिंग ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन-समर्थक समूह अपने मकसद के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज़ कर चुके हैं। कीव को लगातार समर्थन दिलाने के लिए अमेरिकी सांसदों से बातचीत करने के मकसद से 'अमेरिकन कोएलिशन फॉर यूक्रेन' की ओर से 'यूक्रेन एक्शन समिट' आयोजित किया जा रहा है।Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi 
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