Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    'एक पर हमला यानी सब पर हमला!' सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान की नई सुपरपावर जैसी घेराबंदी! Donald Trump का आया रिएक्शन | Mecca Joint Defence Pact 2026

    46 minutes from now

    1

    0

    वैश्विक राजनीति के कैनवास पर एक नया और शक्तिशाली समीकरण उभरकर सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' (Mecca Joint Defence Pact) का पुरजोर स्वागत किया है। मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के तीन बड़े मुस्लिम देशों के इस रणनीतिक गठजोड़ को ट्रंप ने क्षेत्रीय सुरक्षा, शांति और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम करार दिया है। इसे भी पढ़ें: Tarapith Hotel Fire Tragedy | पश्चिम बंगाल के तारापीठ में दर्दनाक हादसा, होटल में भीषण आग लगने से 7 लोगों की जलकर मौतरविवार को अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह देखकर "बहुत खुशी" हुई कि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने "आखिरकार" इस ​​समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ट्रंप ने लिखा, "इससे पता चलता है कि मध्य पूर्व कैसे एकजुट हो रहा है और देश आखिरकार किस तरह ज़्यादा असरदार तरीके से अपनी रक्षा कर सकेंगे।" उन्होंने इस समझौते को "एक बड़ा, साहसी और अहम पहला कदम" बताया।मक्का संयुक्त रक्षा समझौतामक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर 7 अगस्त को मक्का में सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता सामूहिक रक्षा और सैन्य व सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए एक ढांचा तैयार करता है।इस समझौते के तहत, तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। समझौते में बेहतर सैन्य तालमेल, संयुक्त अभ्यास और रक्षा तकनीक व सैन्य उद्योगों जैसे क्षेत्रों में सहयोग की भी बात कही गई है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने South Korea के साथ प्रस्तावित सैन्य अभ्यास में कटौती का आदेश पेंटागन को दियायह समझौता मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच हुआ है। तीनों देशों ने इस समझौते को रक्षात्मक प्रकृति का बताया है और कहा है कि इसका मकसद कोई सैन्य या सांप्रदायिक गुट बनाना नहीं है।‘दुनिया के लिए अहम संदेश’समझौते के तहत, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच विवाद को सुलझाने में मदद करने के लिए राजनयिक प्रयासों का समर्थन करने का भी वादा किया है। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने कहा कि मिस्र भी इस बढ़ते हुए समझौते में शामिल हो सकता है। उन्होंने काहिरा की भागीदारी को "संभव" बताया और संकेत दिया कि समझौते में और सदस्य भी शामिल हो सकते हैं।एर्दोआन ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का ज़िक्र करते हुए कहा, "इस समझौते ने दुनिया को एक अहम संदेश दिया है।"  क्या है 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता'?यह ऐतिहासिक समझौता 7 अगस्त को पवित्र शहर मक्का में हुआ था। इस पर सऊदी क्राउन प्रिंस व प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान (MBS), तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे।एक पर हमला, सब पर हमला: समझौते की सबसे मुख्य शर्त नाटो (NATO) की तर्ज पर तय की गई है—तीनों देशों में से किसी भी एक देश पर होने वाले सशस्त्र हमले को तीनों राष्ट्रों पर हमला माना जाएगा।सैन्य सहयोग: इसके तहत बेहतर सैन्य तालमेल, संयुक्त युद्ध अभ्यास, आधुनिक रक्षा तकनीक और सैन्य उद्योगों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा।रक्षात्मक रुख: तीनों राष्ट्रों ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता पूरी तरह से रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य कोई नया सैन्य या सांप्रदायिक गुट तैयार करना नहीं है। 
    Click here to Read more
    Prev Article
    Hayden Panettiere का 36 साल की उम्र में निधन, Heroes टीवी सीरीज से मिली थी पहचान
    Next Article
    Donald Trump ने सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान रक्षा समझौते को 'साहसिक कदम' बताया

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment