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    एससी-एसटी की 188 एमबीबीएस सीटें प्रभावित होने की आशंका:चार मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण व्यवस्था पर रोक, ट्रस्ट ने सरकार से अध्यादेश लाने की मांग

    3 hours ago

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    कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एससी-एसटी वर्ग के लिए तय एमबीबीएस सीटों को लेकर विवाद फिर सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बुधवार को अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के मेडिकल कॉलेजों में करीब 91 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पर रोक लगा दी। कोर्ट ने 21 प्रतिशत एससी, 2 प्रतिशत एसटी और 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर काउंसलिंग आगे बढ़ाने की अनुमति दी है। पेरियार ललई सिंह यादव चैरिटेबल ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बृजेंद्र यादव ने सरकार से मामले में मजबूत पैरवी करने और एससी-एसटी वर्ग के हितों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल अध्यादेश लाने की मांग की है। ट्रस्ट का दावा है कि मौजूदा स्थिति से एससी वर्ग की 176 और एसटी वर्ग की 12, कुल 188 एमबीबीएस सीटों पर असर पड़ सकता है। ट्रस्ट के अनुसार, भारत सरकार के स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीपी) के तहत कन्नौज, अंबेडकरनगर, जालौन और सहारनपुर में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए थे। ट्रस्ट का कहना है कि एससीपी के तहत स्थापित संस्थानों में एससी-एसटी वर्ग के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी इन चार मेडिकल कॉलेजों की सीट मैट्रिक्स में प्रत्येक कॉलेज की 85 राज्य-कोटा सीटों में 62 एससी, 5 एसटी और 11 ओबीसी सीटें दर्शाई गई थीं। चारों कॉलेजों को मिलाकर इस व्यवस्था में 248 एससी और 20 एसटी सीटें दिखाई गई थीं। बृजेंद्र यादव का आरोप है कि पिछले मामले में सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं होने के कारण न्यायालय ने इस व्यवस्था को आरक्षण मानते हुए सवाल उठाया था। 2025 के मामले में हाईकोर्ट ने चारों मेडिकल कॉलेजों में लागू व्यवस्था को वैधानिक आरक्षण सीमा के अनुरूप करने का निर्देश दिया था। बाद में राज्य सरकार ने 2026-27 सत्र से व्यवस्था को निर्धारित सीमा के अनुरूप करने का आश्वासन दिया था। अब 2026-27 सत्र में फिर से चारों मेडिकल कॉलेजों में करीब 91 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है। कोर्ट ने काउंसलिंग को पूरी तरह रोकने के बजाय अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू 21 प्रतिशत एससी, 2 प्रतिशत एसटी और 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर आगे बढ़ाने की अनुमति दी है। ट्रस्ट ने सरकार से हाईकोर्ट में मामले की प्रभावी पैरवी करने के साथ एससी-एसटी वर्ग से जुड़ी विशेष व्यवस्था को लेकर आवश्यक कानूनी कदम उठाने की मांग की है।
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