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    फर्जी दरोगा का पिता असली पुलिसवाला:लखनऊ के स्कूल में भर्ती परीक्षा करवा रहा था: CM के सलाहकार का लेटरपैड मिला

    1 hour ago

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    कानपुर पुलिस ने एक फर्जी दरोगा को पकड़ा। आरोप लगे कि पुलिस की वर्दी की आड़ में वो लखनऊ के प्राइवेट स्कूल में भर्ती परीक्षा करवा रहा था। नए लड़कों को पुलिस विभाग की नौकरी का लालच देकर रुपए ऐंठ रहा था। ऐसे कितने बच्चे अभी तक ठगे गए हैं? इसकी छानबीन कानपुर पुलिस कर रही है। अभी तक 3 लड़के सामने आ सके हैं। फर्जी दरोगा के पास से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूर्व सलाहकार अवनीश अवस्थी का लेटर पैड और सचिव आवास विकास की मुहर समेत कई सरकारी दस्तावेज मिले हैं। CBI का आई कार्ड मिला है। इस बारे में संजय ने पुलिस को बताया- लोकल पुलिस के आई कार्ड में रेड मारने जाता, तो लोग पूछते थे कि कहां पर तैनात हो? जबकि CBI का कार्ड दिखाने पर सब डर जाते थे। ये सब संजय ने कहां से तैयार कराए, ये भी पुलिस पता कर रही है। मगर लखनऊ के एक साइबर कैफे के बारे में पुलिस को सुराग मिले हैं, जहां से फर्जी लेटरपैड और दस्तावेज तैयार कराए गए। अब सवाल उठा कि उन्नाव के संजय ने आखिर फर्जी दरोगा बनने की क्यों ठान ली? पुलिस कस्टडी में उसने अपनी जालसाज जिंदगी के कई पन्ने खोलकर रख दिए। पढ़िए रिपोर्ट… संजय बोला- दरोगा पापा का रसूख देखा इस केस की जांच कानपुर पुलिस के दरोगा राहुल शुक्ला कर रहे हैं। उन्होंने बताया- पूछताछ में संजय ने कहा कि मेरे पापा पुलिस विभाग में दरोगा थे। पापा रंजीत सिंह उन्नाव की काली मिट्‌टी पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में तैनात रहे। परिवार दोस्तीनगर में रहता है। हमारे घर में पापा, मां सूरजकली, मैं और 2 भाई जय और अजय हैं। मेरी शादी वन देवी सिंह से हुई। हमारी 2 बेटियां हैं। बड़े भाई जय उन्नाव में ही टेंट हाउस संचालक हैं। छोटे भाई अजय किराये पर कार चलवाते हैं। घर में आई-20, स्कार्पियो और अर्टिगा कार हैं। बता दें कि इसी आई-20 कार पर सरकारी वाहनों को आवंटित होने वाला फर्जी नंबर प्लेट (UP32EG2250) लगा था। गाड़ी, लखनऊ के इनकम टैक्स के ज्वाइंट कमिश्नर के नाम पर रजिस्टर्ड है। जबकि, उसका असली रजिस्ट्रेशन नंबर UP35BK8203 है। 2007 में पढ़ाई छोड़ी, दरोगा बनने का सपना टूटा संजय ने बताया- पापा का 2016 में रिटायरमेंट हुआ। मगर जब तक वो दरोगा थे, संजय के मुताबिक, घर में बड़े-बड़े रसूखदार लोग अपने काम करवाने के लिए आते रहते थे। ट्रेनिंग सेंटर से लेकर मार्केट में पापा की बहुत इज्जत थी। मैंने 2007 में पढ़ाई छोड़ दी। बीघापुर के कॉलेज से बीए सेकेंड ईयर तक पढ़ा हूं। इसके बाद दरोगा बनने के ख्वाब पर पानी फिर गया। मैं ये जानता था कि अब यूपी पुलिस भर्ती का एग्जाम नहीं दे सकता हूं, इसलिए 80 फीट रोड के सोनी वर्ल्ड शोरूम में सेल्समैन की जॉब कर ली। इसके बाद 2013 में काकादेव के ओम चौराहा के पास टिफिन सर्विस का काम करने लगे। हमारे टिफिन हैलट के जच्चा-बच्चा हॉस्पिटल में जाने लगे। 2015 में काकादेव की ओम साई हॉस्टल में कैंटीन चलाने लगा। लखनऊ में मुझे दुर्गेश-विजय मिले, उन्होंने वर्दी दी संजय ने आगे बताया- 2016 तक ये काम करने के बाद मैंने एक डंपर और एक JCB मशीन फाइनेंस करवा ली। फिर मैं मट्‌टी ढु़लाई का काम करने लगा। 2025 में इस कारोबार में मुझे घाटा हुआ, इसके बाद मैंने JCB और डंपर को बेच दिया। इतने कारोबार करने के बाद मुझे लगा कि मैं बिजनेस के लिए नहीं बना हूं। फिर मैं एक काम से लखनऊ गया तो वहां पर मुझे दुर्गेश सविता और विजय चौहान से हुई। विजय शुक्लागंज का रहने वाला था। उस वक्त दुर्गेश एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था। विजय एक होटल में काम करता था। दोस्ती होने के बाद दोनों ने बताया कि वो लड़कों की जॉब लगवाते हैं। इसके लिए वर्कशॉप करते हैं, सिर्फ जॉब के फार्म ही बेच-बेचकर हजारों कमा लेते हैं। विजय और दुर्गेश ने लखनऊ शासन में अपनी पहुंच के किस्से भी सुनाए थे। इसके बाद संजय ने अपने पिता के दरोगा रहते हुए रुआब के किस्से सुनाए। विजय और दुर्गेश ने पूछा- तुम्हें तो पुलिस डिपार्टमेंट के बारे में अच्छी खासी जानकारी होगी। संजय ने कहा- बिल्कुल। यहीं पर तय हुआ कि तुम हमारे साथ काम करो। तुम दरोगा की वर्दी में रहना, ताकि जो बच्चे आए, उन्हें भरोसा रहे कि हम कुछ गलत नहीं कर रहे हैं। लखनऊ में किराए का मकान, वहीं पर होती थी प्लानिंग दुर्गेश ने ही संजय को वर्दी लाकर दी। आईडी कार्ड, असली जैसी दिखने वाली पिस्टल और होल्डर दिया। इसके बाद ये लोग प्राइवेट कॉलेज के कैंपस खाली वक्त में किराए पर लेने लगे। यहां बच्चों को बुलाकर भर्ती परीक्षा अरेंज करने का नाटक करते। पहले फार्म और तैयारी के नाम पर रुपए लेते, फिर नौकरी लगवाने के लिए बतौर रिश्वत रुपए लेते। ये जालसाजी कैसे करनी है, जो पैसा आ रहा था, उसका सही से बंटवारे के लिए अमौसी एयरपोर्ट के पास एक मकान किराए पर लिया था। संजय ने पुलिस के सामने 3 लोगों को पुलिस डिपार्टमेंट में जॉब दिलाने के नाम पर ठगने की बात स्वीकार की है। इसमें 1 लड़का कानपुर सिटी, जबकि 2 लड़के कानपुर देहात के रहने वाले हैं। इन लड़कों से 7 से 8 लाख रुपए ठगे गए हैं। इंस्पेक्टर ने पूछा- कहां-कहां छापेमारी की? संजय खामोश रहा इंस्पेक्टर ने पूछा- CBI आई कार्ड कहां से बनवाया? संजय ने कहा- लखनऊ के एक साइबर कैफे से मैंने आईकार्ड बनवाया था। एक कार्ड पर अपना नाम राजेश मिश्रा रखा, जबकि दूसरे कार्ड पर विक्रम गोस्वामी की पहचान रखी। इंस्पेक्टर ने पूछा- CBI का ही आई कार्ड क्यों बनवाया? संजय ने कहा- लोकल पुलिस की पहचान से लोग तुरंत इंक्वायरी करने लगते थे। लेकिन CBI बताने के बाद कोई नहीं पूछता था कि मैं कहां बैठता हूं। इंस्पेक्टर ने पूछा- क्या छापेमारी भी की थी? संजय ने कहा- दुर्गेश और विजय के साथ मिलकर कुछ जगह पर छापेमारी की थी। मैं खुद को CBI ऑफिसर बताता था। कहां-कहां छापेमारी की? इस पर संजय खामोश रहा। जवाब नहीं दिया। संजय के पिता ने पुलिस को क्या बताया, ये जानिए संजय ने अरेस्ट होने के बाद अपने रिटायर्ड दरोगा पिता का जिक्र किया तो उन्हें भी थाने बुलाया गया। उन्होंने कहा- मुझे तो उसके बिजनेस करने की नॉलेज थी, वो कब ये दरोगा बनकर जालसाजियां करने लगा, मुझे तो पता ही नहीं चला। इंस्पेक्टर ने पूछा- क्या कभी घर में आपने उसको वर्दी में देखा? उन्होंने कहा- नहीं, कभी नहीं। न ही उसके पास कोई आई कार्ड होता था। जालसाज नंबर 2. यानी दुर्गेश के बारे में बताया गया कि वो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का PSO है। इस बारे में दरोगा राहुल शुक्ला कहते हैं- दुर्गेश को ट्रेस करने के बाद ही ये स्पष्ट हो पाएगा। उन्हें पकड़ने के लिए कानपुर पुलिस की 2 टीमों को टास्क दिया गया है। ACP अनवरगंज अभिषेक राहुल कहते हैं- कई सवालों के जवाब संजय ने दिए ही नहीं हैं। संजय ने जो कुछ बताया, उसके मुताबिक दुर्गेश और विजय से मिलने के बाद वो ठगी करने लगा। अब हम दुर्गेश और विजय को ट्रेस कर रहे हैं, ताकि इस पूरी जालसाजी के रैकेट से पर्दा उठाया जा सके। अब जानिए कैसे पकड़ा गया संजय ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर ठगी करता था DCP सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने बताया- मंगलवार को अनवरगंज पुलिस को एक सूचना प्राप्त हुई कि एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में घूम रहा है जो कि फर्जी है। सूचना पर पुलिस पहुंची और उसे गिरफ्तार किया गया। उसने यूपी पुलिस के दरोगा की वर्दी पहन रखी थी। पूछताछ की गई तो वह फर्जी निकला। उसकी गाड़ी की तलाशी ली गई तो फर्जी पिस्टल, आई कार्ड बरामद हुआ। ये लोगों को नौकरी और ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर ठगी करता था। अपनी ओर से होटल और स्कूल में इंटरव्यू कराता था। वहां लोगों को ठगता था। उसके गैंग में दो और लोग शामिल हैं। दोनों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस के मुताबिक, फर्जी दरोगा संजय ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के PSO का नाम लिया है। जोकि टर्मिनेट है। इसे वेरिफाई कराया जा रहा है। …………… ये पढ़ें - 'चोटी खींचना महाअपराध, लाठी इस्तेमाल कर सकते थे’:शंकराचार्य विवाद पर योगी से अलग केशव-ब्रजेश के सुर, VIDEO देखिए 'चोटी नहीं खींचनी चाहिए थी। बल प्रयोग करना था तो लाठी उठा लेते। चोटी खींचना महाअपराध है। देखिएगा महापाप लगेगा।’ ये बातें डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कही। शंकराचार्य विवाद में योगी से इतर केशव और ब्रजेश की लाइन अलग रही है। VIDEO में देखिए एक शंकराचार्य, एक विवाद पर सरकार की तीन अलग-अलग बातें…
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