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    गोरखपुर में ज्वाइंट वेंचर पर बिजली कर्मियों ने जताई चिंता:सस्ती बिजली के लिए उठाई आवाज, परियोजनाओं को उत्पादन निगम को सौंपने की मांग

    12 hours ago

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    गोरखपुर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने ओबरा डी और अनपरा ई ताप विद्युत परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के बजाय राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपने की मांग की है। समिति का कहना है कि फरवरी 2023 में एनटीपीसी के साथ समझौता होने के बाद भी तीन साल बीत जाने के बावजूद परियोजनाओं पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है, जिससे प्रदेश के हितों को नुकसान हो सकता है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह ने कहा कि सामान्य तौर पर ताप विद्युत परियोजनाएं करीब पांच साल में पूरी हो जाती हैं, लेकिन ज्वाइंट वेंचर को मंजूरी मिलने के बाद भी तीन साल से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होना गंभीर स्थिति है। देरी से बढ़ सकती है परियोजना की लागत समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि निर्माण कार्य में देरी के कारण प्लांट और मशीनरी की कीमत बढ़ने की संभावना है। इससे परियोजना की कुल लागत सैकड़ों करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है और इससे बनने वाली बिजली महंगी पड़ सकती है। संघर्ष समिति का कहना है कि यदि इन परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के बजाय राज्य विद्युत उत्पादन निगम को दे दिया जाए तो पहले से मौजूद बुनियादी सुविधाओं और साझा संसाधनों का उपयोग किया जा सकेगा। इससे बिजली उत्पादन की लागत करीब 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक कम हो सकती है। मध्य प्रदेश सरकार का उदाहरण दिया समिति ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने अमरकंटक परियोजना को पहले ज्वाइंट वेंचर में बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन दो साल तक काम आगे न बढ़ने पर वहां की सरकार ने ज्वाइंट वेंचर समाप्त कर परियोजना को अपने राज्य के उत्पादन निगम को सौंप दिया। संघर्ष समिति के अनुसार ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं के लिए अभी तक नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड से कोयला लिंकेज तय नहीं हो पाया है। ऐसी स्थिति में 500 से 700 किलोमीटर दूर से कोयला लाने की संभावना है, जिससे ढुलाई पर अधिक खर्च आएगा और बिजली उत्पादन की लागत बढ़ जाएगी। परिसर में संचालन से जुड़ी आ सकती हैं दिक्कतें समिति का कहना है कि एक ही परिसर में दो अलग-अलग स्वामित्व की परियोजनाएं बनने से संचालन से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। परिसर में फिलहाल एक ही रेलवे लाइन है, जिससे कोयले की आपूर्ति में टकराव की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा ऐश डिस्पोजल के लिए एक ही ऐश पोंड होने से भी भविष्य में परेशानी बढ़ सकती है। इस बीच पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलन के 471वें दिन प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की।
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