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    गोरखपुर में शंकराचार्य बोले- देश तानाशाही की ओर बढ़ रहा:कहा- छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं; गो माता के लिए लड़ाई जारी रहेगी

    10 hours ago

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    गोरखपुर ग्रामीण से 81 दिन पहले शुरू हुई शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गविष्ट यात्रा का आज समापन हो गया। रामजानकी नगर के एक मैरिज हॉल में मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा- देश तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। अब इसे सरकार उत्तर कोरिया बनाना चाहती है। छात्र तो अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा- लखनऊ में 24 जुलाई को होने वाले कार्यक्रमों तक को प्रशासनिक स्तर पर रोकने का प्रयास किया गया। मैंने अपनी सेना को विधानसभाओं में कार्यक्रम के लिए बोल दिया है लेकिन मैं तय समय और तय जगह पर कार्यक्रम में शामिल रहूंगा। उन्होंने कहा- CM योगी ने न तो धर्म और न ही संविधान की लाज रखी। हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर कभी नमाज पढ़ी ही नहीं गई है। उन्होंने सफेद झूठ बोला। जब ये अयोध्या पहुंचे तो इन्होंने कहा- दूध का दूध पानी का पानी कर दूंगा। लेकिन ये कर नहीं पाए। दोबारा गए तो इन्होंने झूठी कहानी गढ़ ली। बता दें गो माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर 3 मई 2026 को गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा से अपनी यात्रा शुरू की थी। जो कि 21 जुलाई को गोरखपुर शहर में पहुंचकर समाप्त हुई। शंकराचार्य की 5 बड़ी बातें देशभर में गोहत्यापर पूर्ण प्रतिबंध तक आंदोलन जारी रहेगा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का अभियान था। 81 दिनों में लाखों लोगों का समर्थन मिला और देशभर में गौ संरक्षण का संदेश पहुंचा। उन्होंने दोहराया कि जब तक गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा और देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। युवा किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य के लिए लड़ रहे शंकराचार्य ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा- देश का युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। उनका कहना था कि छात्र किसी राजनीतिक दल या संगठन के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा-यदि कोई भी उनके भविष्य की गारंटी देगा तो युवा उसके साथ खड़े हो जाएंगे। इसलिए इस आंदोलन को किसी एक पार्टी या संगठन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा- आंदोलन के दौरान उन्होंने ऐसा दृश्य देखा, जहां संसद की ओर बढ़ रहे छात्रों के सामने पुलिस और सुरक्षा बल हथियारों के साथ खड़े थे। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए कहा कि जिस तरह छात्रों के साथ सख्ती की गई, उसी तरह भविष्य में आम नागरिकों के साथ भी व्यवहार किया जा सकता है। लोकतंत्र में विरोध की आवाज का जवाब संवाद से होना चाहिए, बल प्रयोग से नहीं। उत्तर कोरिया जैसे हालात बनने का खतरा शंकराचार्य ने कहा- देश में असहमति की आवाजों को दबाने का प्रयास हो रहा है। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है और विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा- यदि यही स्थिति बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब भारत की स्थिति उत्तर कोरिया जैसी हो जाएगी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा बताया। 24 जुलाई के कार्यक्रम को प्रशासन ने रोक दिया शंकराचार्य ने कहा- 24 जुलाई को लखनऊ में उनकी आशीर्वाणी सेना का संकल्प समारोह प्रस्तावित था। इसके लिए लगभग एक महीने पहले ही मैदान का शुल्क जमा कर दिया गया था और 15 दिन पहले प्रशासन को अनुमति के लिए आवेदन भी भेज दिया गया था। इसके बावजूद आज तक अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा- यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का मामला नहीं, बल्कि जानबूझकर उनके कार्यक्रम को विफल करने की कोशिश है। जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रम को इस तरह रोकना उचित नहीं है। समर्थकों को धमकाया गया शंकराचार्य ने कहा- गविष्ठि यात्रा के दौरान लगातार प्रशासनिक दबाव बनाया गया। जिन लोगों ने उन्हें अपने घर पर ठहराने या सहयोग देने की इच्छा जताई, उन्हें धमकाया गया। कई स्थानों पर उनके समर्थकों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए। यात्रा को सफल होने से रोकने के लिए प्रशासन ने हरसंभव प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद लोगों का समर्थन लगातार बढ़ता गया। उन्होंने कहा- अनुमति नहीं मिलने के बाद उन्होंने अपनी आशीर्वाणी सेना को निर्देश दिया है कि सभी कार्यकर्ता अपनी-अपनी विधानसभा में संकल्प कार्यक्रम आयोजित करें। वहीं वह स्वयं 24 जुलाई को तय समय और तय स्थान पर लखनऊ पहुंचकर अपने समर्थकों को संबोधित करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक प्रतिबंध से आंदोलन रुकने वाला नहीं है। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला-राममंदिर चढ़ावा चोरी नैतिक पतन की पराकाष्ठा; सरकार कानून में बदलाव करे, ताकि दोषियों को मौत की सजा मिले राममंदिर चढ़ावा चोरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने कहा कि यह घटना भारतीय समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को कानून में बदलाव करना चाहिए, ताकि करप्शन के दोषियों को मौत की सजा दी जा सके। पढ़िए पूरी खबर
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