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    गैस संकट से वृद्धाश्रम की रसोई पर दबाव:33 बुजुर्गों के लिए 6 सिलेंडर की जरूरत, 2 अप्रैल को आश्रम के 10 साल पूरे होंगे

    3 hours ago

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    मेरठ में गैस सिलेंडर की किल्लत का असर अब सामाजिक संस्थाओं पर भी दिखने लगा है। श्रीसांई सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित वृद्धाश्रम की संचालिका नर्मता शर्मा का कहना है कि गैस की बढ़ती कीमत और कमी के कारण आश्रम चलाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। नर्मता शर्मा बताती हैं कि उनके आश्रम में इस समय 33 अम्मा-बाबा रह रहे हैं और सभी के लिए रोजाना भोजन बनता है। उन्होंने बताया कि एक सिलेंडर करीब 1500 रुपए में मिल रहा है और आश्रम में महीने भर में करीब 6 सिलेंडर लग जाते हैं। “मेरी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। कहीं से नियमित फंडिंग नहीं होती, जो भी है वह जनता के सहयोग से ही चलता है,” उन्होंने कहा। उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने दो सिलेंडर खरीदे हैं, जिन पर करीब 3000 रुपए खर्च हुए। गैस एजेंसी से और सिलेंडर देने की बात भी कही है, लेकिन मौजूदा स्थिति में समय पर सिलेंडर मिलना मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद नर्मता शर्मा ने साफ कहा कि उन्होंने आश्रम में खाने-पीने में कोई कटौती नहीं की है। “पहले जैसे नाश्ता, दोपहर का खाना, दाल-चावल, सब्जी, रोटी और सलाद बनता था, वैसे ही अब भी बन रहा है। अम्मा-बाबा के खाने में कटौती कैसे कर सकती हूं,” उन्होंने कहा। उन्होंने बताया कि कुछ बुजुर्ग ऐसे भी हैं जिन्हें दवा के साथ दूध देना पड़ता है, इसलिए बीच-बीच में दूध भी गर्म करना पड़ता है। ऐसे में गैस की जरूरत और बढ़ जाती है। नर्मता शर्मा के अनुसार 2 अप्रैल को आश्रम के 10 साल पूरे होने वाले हैं और स्थापना दिवस मनाने की योजना भी बनाई गई थी, लेकिन गैस संकट के कारण अब इसकी चिंता बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के लिए हलवाई ने भी करीब 6 सिलेंडर की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि यदि गैस की समस्या बनी रही तो आश्रम की रसोई चलाने के लिए पुराने तरीके अपनाने पड़ सकते हैं। “जरूरत पड़ी तो लकड़ी और उपलों के चूल्हे बनवाकर खाना बनवाएंगे, लेकिन अम्मा-बाबा को भूखा नहीं रहने देंगे।
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