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    घुटने की रोबोटिक-सर्जरी में देश का पहला सरकारी-अस्पताल बना BHU-ट्रामा-सेंटर:ट्रामा सेंटर प्रभारी बोले - पूर्वांचल के मरीजों के लिए तोहफा, कम पैसों में रोबोटिक सर्जरी वाला पहला अस्पताल

    1 hour ago

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    भारत सरकार लगातार देश में मेडिकल सुविधाओं को दुरुस्त कर रही है। इसी क्रम में भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को एडवांस मेडिकल टेक्निक से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए ट्रॉमा सेंटर, आईएमएस–बीएचयू में अत्याधुनिक Robotic-Assisted Knee Surgical System की शुरुआत की गई। इसके साथ ही BHU ट्रॉमा सेंटर देश का पहला सरकारी चिकित्सा संस्थान बन गया है। जहां नॉन-सीटी आधारित रोबोटिक नी सर्जरी शुरू की गयी है। BHU ट्रामा सेंटर के प्रोफेसर इंचार्ज डॉ सौरभ सिंह ने बताया - यह उन्नत रोबोटिक तकनीक सर्जरी में उच्च सटीकता, रोगी-विशिष्ट एलाइनमेंट, कम दर्द, शीघ्र रिकवरी तथा बेहतर लॉन्ग टाइम परिणाम सुनिश्चित करता है। इसके माध्यम से विश्वस्तरीय ट्रॉमा ऑर्थोपेडिक उपचार अब आम नागरिकों की पहुंच में उपलब्ध हो सकेगा। ONGC के सीएसआर फंड के सहयोग से हुई शुरुआत BHU ट्रामा सेंटर के प्रोफेसर इंचार्ज सौरभ सिंह ने बताया - ONGC के सीएसआर सहयोग से आज ट्राम सेंटर में रोबोटिक सर्जरी द्वारा नी प्रत्यारोपण किया गया। इसी के साथ ट्राम सेंटर देश का पहला सरकारी चिकित्सालय बन गया जहां रोबोटिक सर्जरी से नी प्रत्यारोपण होगा। उन्होंने आगे कहा - यह उपलब्धि पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के रोगियों के लिए एक बड़ी जनस्वास्थ्य सौगात के रूप में सामने आई है। अब उन्हें रोबोटिक-असिस्टेड ट्रॉमा ऑर्थोपेडिक नी सर्जरी जैसी उन्नत सुविधा सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध हो गई है। विश्वस्तरीय उपचार की दिशा में सशक्त कदम यह उपलब्धि विभिन्न संस्थानों के सामूहिक प्रयास और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की साझा प्रतिबद्धता का परिणाम है। ट्रॉमा सेंटर में रोबोटिक तकनीक की शुरुआत भविष्य-उन्मुख ट्रॉमा केयर, सटीक सर्जरी और सरकारी अस्पताल में विश्वस्तरीय उपचार को समान रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह सुखद वैज्ञानिक बदलाव का सूचक इस मौके पर मौजूद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने ट्रामा सेंटर ने कहा - पूर्वांचल के साथ-साथ बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास के लिए विश्वविद्यालय के चिकित्सा कार्यों में भी तकनीकी नवाचार का आना एक सुखद और वैज्ञानिक बदलाव का सूचक है। यह ऐतिहासिक पहल इस बात का सशक्त उदाहरण है कि किस प्रकार दूरदर्शी प्रशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने वाले कॉर्पोरेट संस्थान और अग्रणी शैक्षणिक संस्थान मिलकर सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच की तकनीकी खाई को सफलतापूर्वक पाट सकते हैं। BHU की लीडरशिप का एक तोहफा पहली रोबोटिक सर्जरी बिहार के औरंगाबाद के अवधेश कुमार (74) की हुई। इस सर्जरी में मौजूद डॉक्टर आलोक राय ने बताया - आज पहली बार घुटने के प्रत्यारोपण की सर्जरी रोबोट द्वारा हुई है। ये बहुत बड़ी उपलब्धि है। बहुत सारे सरकारी अस्पताल जो एपेक्स सेंटर भी हैं इंडिया के वहां भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। पूर्वांचल के मरीजों के लिए BHU की लीडरशिप का एक तोहफा है। जो मरीज प्राइवेट में यह सुविधा एफोर्ट नहीं कर सकते है। वो यहां आकर इस सुविधा का लाभ एक चौथाई से भी कम खर्च में ले सकते हैं। प्राइवेट अस्पताल में 4 से 5 लाख रुपए आता है खर्च डॉ आलोक राय ने बताया - घुटने के प्रत्यारोपण में एक मरीजों को प्राइवेट संस्थाओं में करीब 4 से 5 लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन बीएचयू ट्रामा सेंटर में आयुष्मान कार्ड से इसका प्रत्यारोपण होना है। इसके अलावा जिनका पैसा लगेगा भी वह प्राइवेट अस्पतालों के एक चौथाई पैसों से भी कम होगा। एक तरह से बीएचयू ट्रामा सेंटर ने वरदान शुरू किया है। जिससे निजी अस्पतालों में महंगे उपचार अथवा महानगरों की यात्रा की आवश्यकता समाप्त हो गई है। इससे रोगियों के आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च में कमी, समय पर 100 प्रतिशत सटीकता के साथ रोबोटिक सर्जरी उपलब्ध होगी। स्पाइनल और एपीटीयूरल दोनों तरह का दिया एनिस्थिसिया एनिस्थिसिया विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर रीना ने मरीज को एनस्थीसिया दी थी। उन्होंने बताया - मरीज का बीपी हाई था लेकिन हमने उसे कंट्रोल करने के बाद हमने उसे एनिस्थिसिया दिया। जो स्पाइनल और एपीटीयूरल दोनों तरह से एनिस्थिसिया दिया गया। इससे यह होता है कि हम मरीज को जल्द से जल्द चला फिरा सकते हैं। बिना दर्द के और आज के ऑपरेशन में दो घंटे का समय लगा।
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