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    Greenland पर मेलोनी का साफ संदेश, युद्ध के लिए तैयार हो जाए यूरोप

    3 hours from now

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    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान से दुनिया की राजनीति में हलचल पैदा कर रहे हैं। इस बार मामला ग्रीनलैंड का है। दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप जो राजनीतिक रूप से डेनमार्क का हिस्सा है। लेकिन अब अमेरिका इसे किसी भी कीमत पर अपने नियंत्रण में लेने की बात कर रहा है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया तो रूस या चीन वहां अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं। अमेरिका किसी भी हाल में रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देगा। ट्रंप के इस बयान के बाद यूरोप में चिंता बढ़ गई है। वाइट हाउस की ओर से यह संकेत भी दिए गए हैं कि ग्रीनलैंड को लेकर सैन्य विकल्पों को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।इसे भी पढ़ें: Iran Protest: बगावत से सुलगता ईरान, ट्रंप को सैन्य विकल्पों पर ब्रीफिंग यही बात यूरोपीय देशों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई है क्योंकि ग्रीनलैंड का मुद्दा सीधे नाटो और यूरोप की सामूहिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। इसी बीच इस मामले पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का बड़ा बयान सामने आया है। मेलोनी ने ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह की सैन्य कारवाई का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं को समझा जा सकता है लेकिन उसका समाधान सैन्य कारवाई नहीं हो सकता। मिलोनी ने इस पूरे मामले में आर्कटिक क्षेत्र में नाटो की भूमिका को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।इसे भी पढ़ें: Iran की America और Israel को खुली धमकी, Donald Trump की एक गलती पड़ेगी बहुत भारी मेलोनी का साफ कहना है कि ग्रीनलैंड में मिलिट्री एक्शन किसी के भी हित में नहीं होगा और इसका असर सीधे नाटो पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इटली किसी भी सैन्य कारवाही का समर्थन नहीं करेगा। उनका मानना है कि सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को सहयोग और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। ग्रीनलैंड भले ही बर्फ से ढका हुआ एक विशाल द्वीप हो और यहां की आबादी सिर्फ 57,000 के आसपास हो, लेकिन इसकी रणनीतिक और आर्थिक अहमियत बहुत बड़ी है। भौगोलिक रूप से यह उत्तरी अमेरिका के बेहद करीब है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह डेनमार्क का हिस्सा है और इसकी संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है। ग्रीनलैंड सिर्फ बर्फ का इलाका नहीं है।
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